नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही महज एक मिनट चली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में वंदे मातरम का गायन कराया और इसके बाद कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।
कार्यवाही के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत पूरी केंद्रीय मंत्रिपरिषद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी सदन में मौजूद थे। सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार विभिन्न मुद्दों को लेकर टकराव देखने को मिला।
संसद परिसर में भी गुरुवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसदों ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे की चोरी के मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया। वहीं, NDA सांसद झारखंड में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में प्रदर्शन करते नजर आए।
विपक्षी सांसदों का एक समूह संसद परिसर में मंकी टॉय लेकर भी पहुंचा और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में प्रियंका गांधी वाड्रा, सुप्रिया सुले समेत कई विपक्षी सांसद शामिल रहे।
राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में उनके कार्यक्रम के बाद कथित तौर पर किए गए शुद्धिकरण का मुद्दा उठाया। इसके बाद सदन में माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026 पारित किया गया।
राज्यसभा की कार्यवाही करीब 1 घंटे 6 मिनट चली। बिल पारित होने के बाद सदन में वंदे मातरम का गायन हुआ और राज्यसभा की कार्यवाही भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
इस मानसून सत्र में लोकसभा की कुल 19 बैठकें हुईं। सामान्य तौर पर एक दिन में करीब 6 घंटे सदन की कार्यवाही चलती है। इस हिसाब से 19 बैठकों में लगभग 114 घंटे काम होना था, लेकिन लोकसभा में करीब 17 घंटे 30 मिनट ही कार्यवाही हो सकी।
इस तरह लोकसभा में निर्धारित समय की तुलना में करीब 96 घंटे 30 मिनट कम काम हुआ। लगातार हंगामे और विरोध प्रदर्शन के कारण सदन की उत्पादकता प्रभावित रही।
पिछले साल 2025 के मानसून सत्र में भी लोकसभा में करीब 37 घंटे ही कार्यवाही हो सकी थी। इस बार भी सत्र का बड़ा हिस्सा सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध की भेंट चढ़ गया।