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दिल्ली में बिजली होगी महंगी, अगले बिल में लगेगा बड़ा सरचार्ज

नई दिल्ली: दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बार फिर जेब पर असर डालने वाली खबर सामने आई है। दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) ने राजधानी की बिजली वितरण कंपनियों को फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) के तहत अतिरिक्त वसूली की अनुमति दी है। यह लगातार दूसरा महीना है जब बिजली खरीद […]

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  • August 14, 2026 4:40 pm IST, Published 56 minutes ago

नई दिल्ली: दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बार फिर जेब पर असर डालने वाली खबर सामने आई है। दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) ने राजधानी की बिजली वितरण कंपनियों को फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) के तहत अतिरिक्त वसूली की अनुमति दी है। यह लगातार दूसरा महीना है जब बिजली खरीद की बढ़ी लागत का एक हिस्सा उपभोक्ताओं से अतिरिक्त सरचार्ज के रूप में वसूलने की मंजूरी दी गई है। ऐसे में आने वाले बिलिंग साइकल में कई उपभोक्ताओं का बिजली बिल पहले की तुलना में अधिक हो सकता है।

अगले बिल पर क्यों पड़ेगा असर?

DERC के 10 जुलाई 2026 के आदेश के मुताबिक, मई 2026 में बिजली खरीद की वास्तविक लागत निर्धारित आधार लागत से काफी अधिक रही। बिजली वितरण कंपनियों ने आयोग के सामने दलील दी कि बढ़ी हुई पावर खरीद लागत की पूरी तरह भरपाई मौजूदा FPPAS सीमा के भीतर संभव नहीं हो पा रही है। इसके बाद आयोग ने नियामकीय सीमा से ऊपर अतिरिक्त FPPAS वसूलने की अनुमति दी।

इस फैसले का सीधा असर बिजली उपभोक्ताओं के बिल पर पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक बिल में बढ़ोतरी उपभोक्ता की बिजली खपत, लागू ऊर्जा शुल्क, फिक्स्ड चार्ज और संबंधित डिस्कॉम के क्षेत्र पर निर्भर करेगी। इसलिए हर उपभोक्ता के बिल में एक जैसी राशि की वृद्धि नहीं होगी।

तीनों डिस्कॉम के लिए अलग-अलग सरचार्ज

DERC ने दिल्ली की तीन प्रमुख बिजली वितरण कंपनियों के लिए अतिरिक्त FPPAS की अलग-अलग दरें तय की हैं। BSES राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL) को 7.94 प्रतिशत, BSES यमुना पावर लिमिटेड (BYPL) को 7.43 प्रतिशत और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPDDL) को 2.21 प्रतिशत अतिरिक्त FPPAS वसूलने की अनुमति दी गई है।

इसका मतलब है कि जिन इलाकों में BRPL और BYPL बिजली सप्लाई करती हैं, वहां अतिरिक्त सरचार्ज का प्रभाव TPDDL के मुकाबले अधिक हो सकता है। उपभोक्ताओं के लिए यह जानना जरूरी है कि उनका बिजली कनेक्शन किस डिस्कॉम के अंतर्गत आता है।

कुल FPPAS कितना हो सकता है?

DERC के नियमों के अनुसार सामान्य तौर पर एक बिलिंग साइकल में FPPAS की वसूली की सीमा 10 प्रतिशत है। लेकिन मई 2026 के लिए आयोग ने विशेष राहत देते हुए इस सीमा से अतिरिक्त वसूली की अनुमति दी है।

मई के लिए कुल अनुमत FPPAS BRPL के मामले में 17.94 प्रतिशत, BYPL के मामले में 17.43 प्रतिशत और TPDDL के मामले में 12.21 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसमें सामान्य 10 प्रतिशत सीमा के ऊपर अतिरिक्त मंजूर किया गया हिस्सा शामिल है।

यही वजह है कि दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं के बीच बिल बढ़ने को लेकर चिंता बढ़ी है। हालांकि इसे सीधे बेस बिजली टैरिफ में स्थायी बढ़ोतरी नहीं माना जाना चाहिए। यह पावर खरीद की लागत में बदलाव से जुड़ा समायोजन शुल्क है।

FPPAS आखिर होता क्या है?

FPPAS यानी Fuel and Power Purchase Adjustment Surcharge वह अतिरिक्त शुल्क है जिसके जरिए बिजली खरीदने में आने वाली लागत में बदलाव का एक हिस्सा उपभोक्ताओं से वसूला जाता है। जब बिजली खरीद की लागत बढ़ती है, तो नियामक नियमों के तहत वितरण कंपनियों को कुछ परिस्थितियों में इस अतिरिक्त लागत को उपभोक्ताओं के बिल में समायोजित करने की अनुमति मिलती है।

इस शुल्क की गणना उपभोक्ता के बिल में शामिल फिक्स्ड चार्ज और एनर्जी चार्ज के आधार पर की जाती है। DERC इसे हर महीने निर्धारित करता है। यही कारण है कि FPPAS की दर समय-समय पर बदल सकती है।

लगातार दूसरे महीने मिली अतिरिक्त वसूली की अनुमति

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि DERC ने लगातार दूसरे महीने डिस्कॉम को अतिरिक्त FPPAS वसूलने की अनुमति दी है। इससे पहले अप्रैल 2026 के लिए भी BRPL को 7.94 प्रतिशत, BYPL को 7.43 प्रतिशत और TPDDL को 6 प्रतिशत अतिरिक्त FPPAS की अनुमति दी गई थी। इसके बाद मई के लिए TPDDL की अतिरिक्त दर घटाकर 2.21 प्रतिशत कर दी गई, जबकि BRPL और BYPL की दरें 7.94 प्रतिशत और 7.43 प्रतिशत बनी रहीं।

DERC के फैसले के पीछे मुख्य वजह मई में बिजली खरीद लागत में हुई तेज वृद्धि बताई गई है। गर्मियों के दौरान बिजली की मांग बढ़ने से डिस्कॉम को अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ती है। बिजली बाजार में खरीद लागत बढ़ने पर उसका असर नियामकीय व्यवस्था के तहत FPPAS के जरिए उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।

क्या हर दिल्लीवासी का बिल बढ़ेगा?

यह कहना सही नहीं होगा कि हर उपभोक्ता के बिल में बिल्कुल समान प्रतिशत की वृद्धि होगी। सरचार्ज का असर उपभोक्ता के बिल की संरचना और संबंधित डिस्कॉम पर निर्भर करेगा। जिन उपभोक्ताओं का एनर्जी चार्ज अधिक है, उनके बिल में सरचार्ज की राशि भी अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है।

इसके अलावा सब्सिडी और अन्य लागू नियमों के कारण अलग-अलग श्रेणी के उपभोक्ताओं पर प्रभाव अलग हो सकता है। इसलिए बिल आने के बाद उपभोक्ताओं को उसमें FPPAS या संबंधित पावर परचेज एडजस्टमेंट मद को ध्यान से देखना चाहिए।

आगे भी जारी रह सकती है व्यवस्था

DERC के आदेश के अनुसार यह राहत और अतिरिक्त वसूली की व्यवस्था आयोग के अगले आदेश तक महीने-दर-महीने लागू रह सकती है। इसका अर्थ है कि भविष्य में बिजली खरीद लागत में बदलाव होने पर FPPAS की दर भी बदल सकती है।

इसलिए दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाले महीनों में बिल पर नजर रखना जरूरी होगा। खासकर अधिक बिजली खपत करने वाले परिवारों और व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर इस तरह के सरचार्ज का वित्तीय असर ज्यादा दिखाई दे सकता है।

उपभोक्ताओं के लिए जरूरी बात

दिल्ली में बिजली के बेस टैरिफ और FPPAS को एक ही चीज नहीं समझना चाहिए। मौजूदा खबर बिजली खरीद लागत से जुड़े अतिरिक्त सरचार्ज की है। DERC द्वारा दी गई मंजूरी का उद्देश्य डिस्कॉम को बढ़ी हुई बिजली खरीद लागत का एक हिस्सा वसूलने की अनुमति देना है। इसलिए अगले बिल में अतिरिक्त राशि दिख सकती है, लेकिन इसकी वास्तविक रकम हर उपभोक्ता के मामले में अलग होगी।

निष्कर्ष: दिल्लीवालों के लिए बिजली बिल को लेकर राहत की खबर नहीं है। DERC की मंजूरी के बाद BRPL और BYPL उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त FPPAS का प्रभाव अपेक्षाकृत ज्यादा पड़ सकता है, जबकि TPDDL के लिए अतिरिक्त दर कम है। अब उपभोक्ताओं की नजर आने वाले बिल पर रहेगी कि इस फैसले का उनकी जेब पर वास्तविक असर कितना पड़ता है।

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