नई दिल्ली। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में गंभीर खामियां सामने आई हैं। कैग ने पाया कि रेलवे बोर्ड द्वारा यात्री सुविधाओं को लेकर जारी किए गए कई दिशा-निर्देशों का विभिन्न जोन में प्रभावी ढंग से पालन नहीं किया गया। इसके चलते कई स्टेशनों पर पेयजल की गुणवत्ता, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं में लापरवाही सामने आई।
कैग की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ रेलवे स्टेशनों पर वाटर कूलर से लिए गए पानी के नमूनों में ई-कोली बैक्टीरिया पाया गया। वहीं कई स्टेशनों के वाशरूम में गंदगी, पर्याप्त बैठने की व्यवस्था का अभाव, कूड़ेदानों की कमी और इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन इंडिकेटर बोर्ड से जुड़ी समस्याएं भी सामने आईं।
कैग रिपोर्ट सामने आने के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार को देशभर के रेलवे स्टेशनों पर स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए। रेलवे मंत्रालय के अनुसार, रेल मंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पूरे दिन इस मुद्दे की समीक्षा की।
अधिकारियों को स्टेशनों पर पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाने, पुरानी पानी की टंकियों को बदलने और पेयजल की नियमित जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
कैग ने 12 अगस्त को संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में बताया कि देश के सभी जोन के 512 रेलवे स्टेशनों पर यात्री सेवाओं का अध्ययन किया गया। रिपोर्ट में पाया गया कि छह जोन के 59 स्टेशनों पर पीने के पानी का बैक्टीरिया विश्लेषण तक नहीं किया गया था।
जांच के दौरान कई प्रमुख स्टेशनों के वाटर कूलर से लिए गए पानी के नमूनों में ई-कोली बैक्टीरिया पाया गया। इनमें दक्षिण रेलवे के कोयंबटूर और पलक्कड़ जंक्शन, दक्षिण मध्य रेलवे का हैदराबाद स्टेशन, मध्य रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावाला तथा पूर्वी रेलवे का मधुपुर स्टेशन शामिल हैं।
कैग की रिपोर्ट में देश के कई बड़े रेलवे स्टेशनों पर भी यात्री सुविधाओं में कमी की ओर इशारा किया गया है। छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, हावड़ा, सियालदह, नई दिल्ली और मुंबई सेंट्रल जैसे प्रमुख स्टेशनों पर बैठने की व्यवस्था, यूरिनल और शौचालय, कूड़ेदान तथा इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन इंडिकेटर बोर्ड से संबंधित कमियां मिलीं।
बड़े स्टेशनों की जांच में 12 स्टेशनों पर पेयजल व्यवस्था, आठ स्टेशनों पर पंखे और वाटर कूलर, जबकि पांच स्टेशनों पर यात्री संकेतक से जुड़ी कमियां सामने आईं।
कैग ने कहा कि रेलवे बोर्ड ने स्टेशनों पर यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए समय-समय पर विभिन्न दिशा-निर्देश जारी किए थे। ऑडिट का उद्देश्य यह जांचना था कि इन दिशा-निर्देशों को लागू करने से यात्रियों को अपेक्षित लाभ मिल रहा है या नहीं।
रिपोर्ट में सामने आई खामियों के बाद अब रेलवे मंत्रालय के सामने स्टेशनों पर पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने तथा निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की चुनौती है।