इंदौर में 13 बार पेनकिलर लेना पड़ा भारी, दोनों किडनी फेल

इंदौर: दर्द और बुखार से राहत पाने के लिए बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना कितना भारी पड़ सकता है, इसका एक मामला मध्य प्रदेश के इंदौर से सामने आया है। ललितपुर निवासी 31 वर्षीय नंदराम को एक महीने के भीतर करीब 13 बार पेनकिलर लेना महंगा पड़ गया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ […]

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  • August 23, 2026 2:00 pm IST, Published 4 minutes ago

इंदौर: दर्द और बुखार से राहत पाने के लिए बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना कितना भारी पड़ सकता है, इसका एक मामला मध्य प्रदेश के इंदौर से सामने आया है। ललितपुर निवासी 31 वर्षीय नंदराम को एक महीने के भीतर करीब 13 बार पेनकिलर लेना महंगा पड़ गया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ समय बाद उनकी दोनों किडनियां खराब हो गईं और उन्हें लंबे समय तक डायलिसिस कराना पड़ा। आखिरकार इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में उनका किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। उनकी मां ने अपनी किडनी दान कर बेटे को नई जिंदगी दी।

यह मामला सामने आने के बाद बिना चिकित्सकीय सलाह के बार-बार दर्द निवारक दवाएं लेने को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि हर पेनकिलर हर व्यक्ति के लिए नुकसानदायक नहीं होती और केवल एक-दो बार दवा लेने से सामान्य तौर पर किडनी फेल नहीं होती। जोखिम दवा के प्रकार, खुराक, सेवन की अवधि, व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और दूसरी दवाओं के इस्तेमाल जैसी कई परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

बुखार और दर्द के लिए मेडिकल स्टोर से ली दवा

रिपोर्ट के अनुसार, नंदराम अहमदाबाद में काम करते थे। इस दौरान उन्हें बुखार और हाथ-पैर में दर्द की शिकायत हुई। डॉक्टर से सलाह लेने के बजाय उन्होंने मेडिकल स्टोर से पेनकिलर लेकर उसका सेवन शुरू कर दिया।

दवा लेने के बाद उन्हें कुछ समय के लिए राहत मिलती थी। जब दर्द या बुखार दोबारा लौटता, तो वह फिर दर्द निवारक दवा ले लेते। इसी तरह करीब एक महीने के दौरान उन्होंने लगभग 13 बार पेनकिलर का सेवन किया।

शुरुआत में उन्हें शायद यह सामान्य दवा सेवन लगा, लेकिन बाद में उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। पेट में दर्द होने के बाद जब जांच कराई गई तो किडनी की गंभीर समस्या सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक, उनकी दोनों किडनियां खराब हो चुकी थीं और उन्हें नियमित डायलिसिस की जरूरत पड़ने लगी।

करीब एक साल तक डायलिसिस, फिर हुआ ट्रांसप्लांट

किडनी की स्थिति गंभीर होने के बाद नंदराम ने अलग-अलग जगहों पर इलाज कराया। उनकी हालत ऐसी हो गई कि करीब एक साल तक उन्हें डायलिसिस पर रहना पड़ा।

इसके बाद उन्हें इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल लाया गया। यहां डॉक्टरों की टीम ने जांच और उपचार के बाद किडनी ट्रांसप्लांट का फैसला किया।

रिपोर्ट के अनुसार, 4 अगस्त को उनकी मां भगवती ने अपनी किडनी दान की। ट्रांसप्लांट के बाद नंदराम की हालत स्थिर बताई गई और प्रत्यारोपित किडनी के सामान्य रूप से काम करने की जानकारी सामने आई है। यह प्रक्रिया आयुष्मान भारत योजना के तहत नि:शुल्क किए जाने की बात भी रिपोर्टों में कही गई है।

डॉक्टरों ने बताया, पेनकिलर से किडनी पर कैसे पड़ता है असर

एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग से जुड़े डॉक्टरों के मुताबिक, कुछ दर्द निवारक दवाओं का बार-बार या लंबे समय तक इस्तेमाल किडनी के लिए जोखिम बढ़ा सकता है।

खास तौर पर NSAIDs यानी Non-Steroidal Anti-Inflammatory Drugs जैसी कुछ दवाएं शरीर में किडनी के रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकती हैं। कुछ परिस्थितियों में इससे Acute Kidney Injury यानी अचानक किडनी को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है। डिहाइड्रेशन, पहले से मौजूद किडनी की बीमारी और कुछ दूसरी दवाओं के साथ इनका इस्तेमाल जोखिम को और बढ़ा सकता है।

हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि पेनकिलर को लेकर सामान्यीकरण नहीं किया जाना चाहिए। हर दर्द की दवा किडनी को नुकसान नहीं पहुंचाती और दवा का असर व्यक्ति की स्थिति तथा इस्तेमाल किए गए मेडिसिन पर निर्भर करता है।

दर्द दबाना नहीं, उसकी वजह जानना जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार, बार-बार सिरदर्द, शरीर में दर्द, बुखार या किसी अन्य तकलीफ की स्थिति में लगातार पेनकिलर लेते रहना सही तरीका नहीं है। दर्द या बुखार कई अलग-अलग बीमारियों का लक्षण हो सकता है। ऐसे में केवल लक्षण को दबाने के बजाय उसके मूल कारण की जांच जरूरी है।

यदि किसी व्यक्ति को बार-बार दर्द हो रहा है और उसे लगातार दवा लेने की जरूरत पड़ रही है, तो डॉक्टर से परामर्श लेना बेहतर है। डॉक्टर मरीज की उम्र, वजन, पहले से मौजूद बीमारी, दूसरी चल रही दवाओं और किडनी-लिवर की स्थिति को देखते हुए उचित दवा और उसकी खुराक तय कर सकते हैं।

एक और मरीज लंबे समय से डायलिसिस पर

इंदौर में इसी तरह का एक और मामला भी सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 37 वर्षीय जितेंद्र कुमार शरीर में होने वाले दर्द और थकान से राहत के लिए लंबे समय तक पेनकिलर लेते रहे। इसके बाद उनकी किडनी की स्थिति खराब हुई और वह कई वर्षों से डायलिसिस करा रहे हैं।

उनकी स्थिति यह बताती है कि लगातार दर्द की दवा लेना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। अगर दर्द किसी बीमारी, संक्रमण या अन्य स्वास्थ्य समस्या के कारण हो रहा है, तो उस बीमारी का उपचार जरूरी है।

इंदौर के अस्पताल में हुए कई किडनी ट्रांसप्लांट

रिपोर्टों के अनुसार, एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में अब तक कई किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। इनमें से कई प्रत्यारोपण आयुष्मान भारत योजना के तहत किए जाने की जानकारी सामने आई है।

नंदराम के मामले में उनकी मां का किडनी दान करना परिवार के लिए बेहद भावुक क्षण रहा। लंबे इलाज और डायलिसिस के बाद ट्रांसप्लांट ने उन्हें सामान्य जीवन की ओर लौटने की उम्मीद दी है।

पेनकिलर लेते समय किन बातों का रखें ध्यान?

पेनकिलर को पूरी तरह खतरनाक मानना सही नहीं है, लेकिन इसे बिना जरूरत और बिना चिकित्सकीय सलाह के बार-बार लेना भी उचित नहीं माना जाता। खासकर जिन लोगों को पहले से किडनी की बीमारी, डिहाइड्रेशन या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

दर्द होने पर दवा लेने से पहले यह समझना जरूरी है कि दर्द क्यों हो रहा है। अगर दर्द लगातार बना हुआ है या बार-बार लौट रहा है, तो डॉक्टर से जांच कराना चाहिए। किसी दूसरे व्यक्ति को दी गई दवा या मेडिकल स्टोर से मिली दवा को अपनी स्थिति के अनुसार लेना जोखिम भरा हो सकता है।

नंदराम की कहानी इसी बात की ओर इशारा करती है कि मामूली लगने वाले दर्द को दबाने के लिए बार-बार दवा लेने के बजाय बीमारी की सही वजह जानना ज्यादा जरूरी है। साथ ही, इस मामले को किसी एक पेनकिलर से किडनी फेल होने का सार्वभौमिक प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए; दवा की किस्म, मात्रा और मरीज की स्वास्थ्य स्थिति जैसे कारकों की चिकित्सकीय जांच आवश्यक है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। दवाओं से जुड़े किसी भी निर्णय के लिए योग्य चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा शुरू, बंद या उसकी खुराक में बदलाव न करें।

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