ग्वालियर: सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऑनलाइन ठगी के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। मध्य प्रदेश के ग्वालियर से साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें Instagram पर दिखे एक विज्ञापन पर क्लिक करना युवक को भारी पड़ गया। विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद मोबाइल फोन अचानक हैंग हो गया और कुछ समय बाद UPI के जरिए खाते से करीब 98 हजार रुपये अलग-अलग ट्रांजेक्शन में निकाल लिए गए। घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर दिखने वाले विज्ञापनों और अनजान लिंक को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत को सामने ला दिया है।
Instagram पर दिखा था विज्ञापन
सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी के मुताबिक, ग्वालियर निवासी जयप्रताप सिंह बाथम Instagram इस्तेमाल कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें एक विज्ञापन दिखाई दिया। सामान्य विज्ञापन समझकर उन्होंने उस पर क्लिक कर दिया। बताया गया कि क्लिक करने के तुरंत बाद मोबाइल फोन हैंग हो गया।
शुरुआत में उन्हें लगा कि यह तकनीकी समस्या हो सकती है। लेकिन कुछ समय बाद जब उन्होंने अपने बैंक खाते से जुड़े लेनदेन की जानकारी देखी तो उनके होश उड़ गए। खाते से एक के बाद एक कई ट्रांजेक्शन किए जा चुके थे।
UPI के जरिए कई ट्रांजेक्शन में निकली रकम
बताई जा रही जानकारी के अनुसार, ठगी करने वालों ने UPI के माध्यम से अलग-अलग ट्रांजेक्शन किए। इन ट्रांजेक्शन के जरिए खाते से कुल करीब 98 हजार रुपये निकाल लिए गए। पीड़ित को जब इसकी जानकारी हुई तो उसने मामले को गंभीरता से लेते हुए बैंकिंग लेनदेन की जांच शुरू की।
इस तरह की घटनाओं में साइबर अपराधी अक्सर लोगों को आकर्षक ऑफर, डिस्काउंट, नौकरी, इनाम, निवेश या अन्य सुविधाओं का लालच देकर विज्ञापन अथवा लिंक पर क्लिक करने के लिए प्रेरित करते हैं। लिंक खोलने के बाद ठगी के अलग-अलग तरीके अपनाए जा सकते हैं।
एक क्लिक कैसे बन सकता है साइबर ठगी की वजह?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिखाई देने वाला हर विज्ञापन सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं है। साइबर अपराधी कई बार ऐसे विज्ञापन तैयार करते हैं जो देखने में वास्तविक कंपनियों या सेवाओं से जुड़े लगते हैं। विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद यूजर को किसी दूसरी वेबसाइट, फर्जी ऐप या संदिग्ध पेज पर ले जाया जा सकता है।
कुछ मामलों में यूजर से मोबाइल नंबर, बैंक डिटेल, कार्ड संबंधी जानकारी, OTP या UPI से जुड़ी संवेदनशील जानकारी मांगी जाती है। वहीं कुछ साइबर फ्रॉड में पीड़ित के मोबाइल या डिवाइस पर संदिग्ध गतिविधि शुरू हो सकती है।
हालांकि, इस मामले में खाते से रकम निकलने का सटीक तकनीकी तरीका जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। उपलब्ध सोशल मीडिया पोस्ट में घटना को Instagram विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद हुई साइबर ठगी के रूप में बताया गया है।
मोबाइल हैंग होने के बाद रहें सतर्क
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि किसी अनजान विज्ञापन या लिंक पर क्लिक करने के बाद मोबाइल असामान्य व्यवहार करने लगे, अचानक हैंग हो जाए या बार-बार कोई अनजान पॉप-अप दिखाई दे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ऐसी स्थिति में सबसे पहले इंटरनेट कनेक्शन बंद करना, संदिग्ध ऐप या वेबसाइट की जांच करना और बैंक खाते से जुड़े लेनदेन पर नजर रखना जरूरी है। यदि बैंक खाते से कोई अनधिकृत ट्रांजेक्शन दिखाई देता है तो तुरंत बैंक से संपर्क कर संबंधित सुविधा को ब्लॉक कराने की कोशिश करनी चाहिए।
UPI फ्रॉड से बचने के लिए क्या करें?
UPI का इस्तेमाल करते समय कुछ छोटी-छोटी सावधानियां बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती हैं। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर UPI PIN कभी दर्ज नहीं करना चाहिए। यह भी समझना जरूरी है कि UPI PIN पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि भुगतान को अधिकृत करने के लिए इस्तेमाल होता है।
किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसके स्रोत की जांच करें। सोशल मीडिया पर दिखने वाले विज्ञापन में यदि असामान्य रूप से बड़ा डिस्काउंट, इनाम या तुरंत पैसे कमाने का दावा किया गया हो तो अतिरिक्त सावधानी बरतें।
इसके अलावा मोबाइल में अनजान ऐप इंस्टॉल करने, स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करने या किसी व्यक्ति को रिमोट एक्सेस देने से बचना चाहिए। बैंक या UPI से संबंधित किसी समस्या के लिए केवल संबंधित बैंक या आधिकारिक सेवा के माध्यम से ही सहायता लें।
साइबर ठगी के बाद तुरंत उठाएं कदम
अगर खाते से अनधिकृत रूप से पैसा निकल गया है तो शिकायत करने में देरी नहीं करनी चाहिए। पीड़ित को बैंक को तुरंत सूचना देने के साथ साइबर अपराध की आधिकारिक शिकायत व्यवस्था का इस्तेमाल करना चाहिए। शुरुआती समय में शिकायत करने से लेनदेन को रोकने या रकम की रिकवरी की संभावना बढ़ सकती है।
पीड़ित को बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजेक्शन आईडी, SMS, स्क्रीनशॉट, संदिग्ध लिंक और संबंधित मोबाइल नंबर जैसी जानकारियां सुरक्षित रखनी चाहिए। ये विवरण जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
सोशल मीडिया यूजर्स के लिए बड़ा सबक
ग्वालियर का यह मामला सोशल मीडिया यूजर्स के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। किसी विज्ञापन पर सिर्फ इसलिए भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि वह किसी बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिखाई दे रहा है। साइबर अपराधी लगातार ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं और लोगों की जल्दबाजी या लालच का फायदा उठाते हैं।
इसलिए Instagram, Facebook, YouTube या किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर दिखाई देने वाले संदिग्ध विज्ञापन, लिंक और ऑफर से सावधान रहना जरूरी है। किसी भी डिजिटल लेनदेन से पहले कुछ सेकंड रुककर जानकारी की पुष्टि करना हजारों रुपये के नुकसान से बचा सकता है।
नोट: इस रिपोर्ट में 98 हजार रुपये की ठगी और घटना से जुड़े विवरण उपलब्ध सोशल मीडिया पोस्ट/दिए गए स्क्रीनशॉट के आधार पर हैं। पुलिस या बैंक की आधिकारिक जांच/पुष्टि उपलब्ध होने पर मामले के अन्य तथ्य स्पष्ट हो सकते हैं।