सुबह 9 बजे तक राखी बांधना शुभ; भद्रा का नहीं रहेगा साया वाराणसी। भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का पर्व रक्षाबंधन इस साल 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार रक्षाबंधन पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं। खास बात यह है कि पर्व के दिन भद्रा का साया नहीं […]
August 25, 2026 8:31 am IST, Published 26 minutes ago
सुबह 9 बजे तक राखी बांधना शुभ; भद्रा का नहीं रहेगा साया
वाराणसी। भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का पर्व रक्षाबंधन इस साल 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार रक्षाबंधन पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं। खास बात यह है कि पर्व के दिन भद्रा का साया नहीं रहेगा, जिससे बहनें बिना किसी बाधा के भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी।
इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे तक रहेगी। हिंदू धर्म में उदयातिथि को विशेष महत्व दिया जाता है, इसलिए रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि के दौरान राखी बांधना विशेष शुभ माना जा रहा है।
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, 28 अगस्त की सुबह 6 बजे से 9 बजे तक राखी बांधने का समय विशेष शुभ माना जा रहा है। सुबह करीब 9 बजे के आसपास सुकर्मा योग शुरू होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस योग में किए गए शुभ और धार्मिक कार्य फलदायी माने जाते हैं।
हालांकि, सुबह 9:45 बजे से दोपहर 12 बजे तक राहुकाल रहेगा। इस दौरान राखी बांधने से बचने की सलाह दी गई है।
इसके बाद दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक भी राखी बांधने का शुभ समय बताया गया है। 2 बजे के बाद भी राखी बांधी जा सकती है और इसे लेकर किसी विशेष दोष की बात नहीं कही गई है।
इस बार नहीं रहेगा भद्रा का प्रभाव
रक्षाबंधन पर अक्सर भद्रा काल को लेकर विशेष सावधानी बरती जाती है, लेकिन इस बार 28 अगस्त को भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनें शुभ समय देखकर भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं।
वाराणसी के मंगला गौरी मंदिर के पुजारी गिरिश गुरु के मुताबिक, राहुकाल को छोड़कर दिनभर रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा सकता है। हालांकि, पूर्णिमा तिथि के दौरान राखी बांधना सबसे अधिक शुभ माना जाता है।
शतभिषा नक्षत्र में मनाया जाएगा पर्व
इस बार रक्षाबंधन शतभिषा नक्षत्र में पड़ रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शतभिषा नक्षत्र मानसिक शांति और स्थिरता से जुड़ा माना जाता है। इसके अलावा सुकर्मा योग का संयोग भी बन रहा है।
ज्योतिषाचार्य श्नीराम शर्मा के अनुसार, इन शुभ संयोगों के कारण इस बार रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, स्थिरता और मजबूती का प्रतीक माना जा रहा है।
राहुकाल में राखी बांधने से बचें
रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने के लिए मुख्य शुभ समय इस प्रकार बताया गया है:
सुबह 6:00 बजे से 9:00 बजे तक — शुभ समय
सुबह 9:45 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक — राहुकाल, राखी बांधने से बचें
दोपहर 12:00 बजे से 2:00 बजे तक — शुभ समय
दोपहर 2 बजे के बाद — राखी बांधी जा सकती है
कार्टून वाली राखी को लेकर क्या कहा गया?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार राखी केवल सजावटी वस्तु नहीं, बल्कि भाई की मंगलकामना और रक्षा के संकल्प का प्रतीक मानी जाती है। इसलिए राखी खरीदते समय उसकी पवित्रता और पारंपरिक स्वरूप का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। बच्चों के लिए कार्टून या अन्य डिजाइन वाली राखियां बाजार में उपलब्ध हैं, लेकिन धार्मिक अनुष्ठान के लिए पारंपरिक और सरल राखी को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है।
नोट: शुभ मुहूर्त और पंचांग की गणना स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकती है। पूजा या राखी बांधने का अंतिम समय स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना उचित रहेगा।