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2027 की जनगणना में अलग से दर्ज नहीं होंगे भिखारी

गैर-आर्थिक गतिविधियों की सूची में बड़ा बदलाव नई दिल्ली। वर्ष 2027 की जनगणना में पिछली जनगणनाओं की तरह भिखारियों और आवारा लोगों का आंकड़ा अलग से दर्ज नहीं किया जाएगा। जनगणना की प्रश्नावली में गैर-आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी श्रेणियों में बदलाव किया गया है और ‘भिखारी और आवारा’ की श्रेणी को हटा दिया गया है। […]

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Gauravshali Bharat News
  • August 25, 2026 8:36 am IST, Published 34 minutes ago

गैर-आर्थिक गतिविधियों की सूची में बड़ा बदलाव

नई दिल्ली। वर्ष 2027 की जनगणना में पिछली जनगणनाओं की तरह भिखारियों और आवारा लोगों का आंकड़ा अलग से दर्ज नहीं किया जाएगा। जनगणना की प्रश्नावली में गैर-आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी श्रेणियों में बदलाव किया गया है और ‘भिखारी और आवारा’ की श्रेणी को हटा दिया गया है।

सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला पिछली जनगणनाओं में इस श्रेणी से मिली सीमित और कम विश्वसनीय जानकारी को देखते हुए लिया गया है। 2011 की जनगणना में करीब 3.8 लाख लोगों ने खुद को गैर-कामकाजी या सीमांत कामगार श्रेणी में भिखारी और आवारा बताया था।

अब ‘अन्य’ श्रेणी में दर्ज होंगे

2011 और उससे पहले की जनगणनाओं में भिखारी और आवारा लोगों को छात्रों, घरेलू कामकाज करने वालों, आश्रितों, पेंशनभोगियों, किराये से आय प्राप्त करने वालों और अन्य गैर-आर्थिक गतिविधियों में शामिल लोगों के साथ अलग श्रेणी में दर्ज किया जाता था।

2027 की जनगणना में यह श्रेणी खत्म कर दी गई है। अब ऐसे लोगों को ‘अन्य’ गैर-आर्थिक गतिविधि की श्रेणी में शामिल किया जाएगा।

इस बदलाव के बाद जनगणना की तालिकाओं में देश में भिखारियों की कुल संख्या या उनकी उम्र, धर्म, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश और शिक्षा के स्तर के आधार पर अलग से आंकड़े उपलब्ध नहीं होंगे।

पिछली जनगणनाओं के आंकड़ों पर भी उठे सवाल

सूत्रों के अनुसार, पिछली जनगणनाओं में भिखारियों और आवारा लोगों की संख्या को पूरी तरह विश्वसनीय नहीं माना गया था। इसकी एक वजह यह बताई गई कि सामाजिक बदनामी या अन्य कारणों से कई लोग खुद को इस श्रेणी में दर्ज कराने से हिचकते थे।

जनगणना के नियमों के अनुसार, गणनाकर्मी वही पेशा या गैर-आर्थिक गतिविधि दर्ज करता है, जो संबंधित व्यक्ति स्वयं बताता है।

आंकड़ों के मुताबिक:

  • 1991: करीब 5.4 लाख
  • 2001: करीब 6.3 लाख
  • 2011: करीब 3.8 लाख

इन आंकड़ों में गिरावट को भी इस श्रेणी की पहचान और स्व-घोषणा से जुड़ी चुनौतियों के संदर्भ में देखा गया है।

माइग्रेशन के कारणों में प्राकृतिक आपदा भी शामिल

2027 की जनगणना में माइग्रेशन यानी एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के कारणों को लेकर भी बदलाव किया गया है।

अब तक काम, व्यापार, शिक्षा, शादी, जन्म के बाद दूसरी जगह जाना, परिवार के साथ स्थानांतरण और अन्य कारणों के विकल्प थे। नई प्रश्नावली में प्राकृतिक आपदा को भी माइग्रेशन के कारण के रूप में शामिल किया गया है।

इससे बाढ़, भूकंप, चक्रवात या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण विस्थापित होकर दूसरी जगह जाने वाले लोगों से जुड़ा डेटा जुटाने में मदद मिल सकती है।

माता-पिता की जानकारी के लिए नए कॉलम

2027 की जनगणना की प्रश्नावली में माता और पिता से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी के लिए भी नए कॉलम शामिल किए गए हैं। इसमें उनके जन्म की तारीख, जन्म स्थान और धर्म जैसी जानकारी ली जाएगी।

यह जानकारी उन परिस्थितियों में मांगी जाएगी, जब माता-पिता एक ही घर में दर्ज नहीं हैं या उनकी मृत्यु हो चुकी है। वहीं, एक ही घर में रहने वाले परिवार के सदस्यों की जानकारी में धर्म और जन्म स्थान जैसी जानकारियां पहले से दर्ज की जाती रही हैं।

माता-पिता दोनों का धर्म दर्ज किए जाने से अंतरधार्मिक विवाह और धर्म परिवर्तन जैसे सामाजिक रुझानों से संबंधित आंकड़ों का विश्लेषण संभव हो सकता है।

नागरिकता से जुड़े आंकड़ों में भी मदद

माता-पिता के जन्म स्थान और जन्म तिथि से संबंधित जानकारी का इस्तेमाल नागरिकता कानून के तहत नागरिकता की पात्रता से जुड़े आंकड़ों के विश्लेषण में भी किया जा सकता है।

हालांकि, यह जानकारी जनगणना के व्यापक सामाजिक और जनसांख्यिकीय डेटा का हिस्सा होगी और इसका इस्तेमाल निर्धारित नियमों के तहत किया जाएगा।

मोबाइल और आधार जैसी जानकारी भी मांगी जाएगी

नई जनगणना प्रक्रिया में मोबाइल नंबर, आधार, वोटर आईडी और भारतीय पासपोर्ट नंबर जैसी जानकारियों के लिए भी कॉलम रखे गए हैं, जहां ये दस्तावेज उपलब्ध हों।

सूत्रों के अनुसार, गणनाकर्मियों को लोगों को इन जानकारियों को उपलब्ध कराने के लिए समझाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। लोगों को यह भरोसा भी दिलाया जाएगा कि जनगणना के दौरान जुटाई गई व्यक्तिगत जानकारी गोपनीय रखी जाएगी

यदि कोई व्यक्ति ऐसी जानकारी देने से इनकार करता है, तो गणनाकर्मी संबंधित कॉलम को खाली छोड़ सकता है।

2027 की जनगणना में महत्वपूर्ण बदलाव

2027 की जनगणना में किए जा रहे ये बदलाव सामाजिक और जनसांख्यिकीय आंकड़ों को नए तरीके से दर्ज करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। खास तौर पर भिखारियों की अलग श्रेणी हटाने, प्राकृतिक आपदा को माइग्रेशन के कारण में जोड़ने और माता-पिता से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी लेने से जनगणना के आंकड़ों का स्वरूप पहले की तुलना में अलग हो सकता है।

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