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नेपाल बाढ़ में 291 विदेशी लापता, 105 भारतीय भी; मचा हड़कंप

काठमांडू। नेपाल में आई अचानक बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। रासुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में पर्यटकों और यात्रियों के लापता होने की खबर सामने आई। नेपाल पर्यटन बोर्ड की शुरुआती रिपोर्ट में 384 यात्रियों के संपर्क से बाहर होने की जानकारी दी […]

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  • August 27, 2026 11:00 pm IST, Published 2 hours ago

काठमांडू। नेपाल में आई अचानक बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। रासुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में पर्यटकों और यात्रियों के लापता होने की खबर सामने आई। नेपाल पर्यटन बोर्ड की शुरुआती रिपोर्ट में 384 यात्रियों के संपर्क से बाहर होने की जानकारी दी गई थी। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल थे। सबसे चिंता की बात यह रही कि लापता विदेशी नागरिकों में कम से कम 105 भारतीय नागरिक भी शामिल बताए गए। हालांकि, यह आंकड़ा प्रारंभिक था और अधिकारियों की ओर से लगातार सत्यापन किया जा रहा था।

भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ से मची तबाही

रासुवा क्षेत्र में बुधवार सुबह अचानक भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ गया। देखते ही देखते पानी ने नदी के आसपास के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। कई मकान, सड़कें, वाहन और अन्य ढांचे मलबे में तब्दील हो गए। बाढ़ के तेज बहाव ने सामान्य जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया और कई इलाकों का संपर्क भी बाधित हो गया। राहत एवं बचाव दलों के लिए दुर्गम पहाड़ी इलाका और खराब मौसम बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में सामने आई तस्वीरों में बाढ़ की भयावहता साफ दिखाई दे रही है। बड़ी मात्रा में कीचड़ और मलबा बस्तियों में जमा है। कई स्थानों पर सड़कें दिखाई तक नहीं दे रही हैं। बाढ़ के पानी के साथ बहकर आए पेड़, पत्थर, वाहन और अन्य सामान जगह-जगह बिखरे नजर आए। इस आपदा ने नेपाल के पर्यटन क्षेत्र को भी गहरा झटका दिया है।

291 विदेशी यात्रियों में सबसे ज्यादा भारतीय

नेपाल पर्यटन बोर्ड की शुरुआती सूची के अनुसार 291 विदेशी नागरिकों के लापता होने की सूचना थी। इनमें 105 भारतीय नागरिक शामिल थे। इसके अलावा 37 गैर-निवासी भारतीय यानी एनआरआई भी सूची में दर्ज किए गए थे। अन्य लापता विदेशी यात्रियों में अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका और नीदरलैंड समेत कई देशों के नागरिक शामिल थे।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया था कि इन आंकड़ों को अंतिम नहीं माना जा सकता। पर्यटन एवं ट्रैवल एजेंसियों से मिले रिकॉर्ड के आधार पर प्रारंभिक सूची तैयार की गई थी। नेपाल पर्यटन बोर्ड, टूरिस्ट पुलिस, स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियां, गाइड और ट्रैवल कंपनियां यात्रियों के बारे में जानकारी जुटाने में लगी थीं। इसलिए किसी व्यक्ति के सूची में शामिल होने का मतलब यह जरूरी नहीं था कि उसकी मौत हो गई है या वह निश्चित रूप से बाढ़ में फंस गया है। कई यात्रियों से संपर्क टूटने के कारण उन्हें फिलहाल ‘लापता’ या ‘संपर्क से बाहर’ की श्रेणी में रखा गया था।

भारतीय पर्यटकों को लेकर बढ़ी चिंता

105 भारतीय नागरिकों के लापता होने की शुरुआती सूचना के बाद भारत में भी चिंता बढ़ गई थी। नेपाल भारतीय पर्यटकों के लिए बेहद लोकप्रिय पर्यटन और धार्मिक यात्रा स्थल है। बड़ी संख्या में भारतीय हर साल नेपाल के विभिन्न हिस्सों में घूमने के लिए जाते हैं। रासुवा और तिब्बत सीमा से जुड़े इलाके भी धार्मिक तथा पर्यटन यात्राओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।

भारतीय यात्रियों के परिजनों के लिए सबसे बड़ी चिंता संपर्क टूटने को लेकर रही। आपदा के कारण सड़क और संचार व्यवस्था प्रभावित होने से यात्रियों की तत्काल जानकारी जुटाना मुश्किल हुआ। नेपाल की एजेंसियों ने यात्रियों और उनके परिवारों से अपील की कि प्रारंभिक सूची को अंतिम स्थिति न माना जाए और आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जाए।

नेपाल में राहत और बचाव अभियान तेज

बाढ़ के बाद नेपाल सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और लापता यात्रियों की तलाश करने के प्रयास किए गए। पर्यटन बोर्ड ने भी ट्रैवल एजेंसियों और स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय बढ़ाया। प्रभावित क्षेत्र में मौजूद पर्यटकों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई।

आपदा के कारण नेपाल के कई इलाकों में हाई अलर्ट की स्थिति बनी। बाढ़ का असर केवल लोगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सड़कों, पुलों, मकानों और बिजली से जुड़ी परियोजनाओं पर भी पड़ा। शुरुआती रिपोर्टों में कई जलविद्युत परियोजनाओं के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई थी। इससे नेपाल के बुनियादी ढांचे पर भी बड़ा दबाव पैदा हुआ।

आंकड़ों में लगातार हो रहा बदलाव

इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि लापता लोगों के आंकड़े लगातार अपडेट हो रहे हैं। 26 अगस्त को नेपाल पर्यटन बोर्ड की प्रारंभिक सूची में 384 यात्रियों के संपर्क से बाहर होने की जानकारी थी, लेकिन 27 अगस्त को जारी नए अपडेट में यह संख्या बढ़कर 644 यात्रियों तक पहुंच गई। नए आंकड़े भी सत्यापन की प्रक्रिया में हैं।

इसलिए 291 विदेशी और 105 भारतीय वाला आंकड़ा उस समय की प्रारंभिक स्थिति को दर्शाता है, न कि मौजूदा अंतिम आंकड़े को। समाचार रिपोर्टिंग में यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि राहत और बचाव अभियान के दौरान नए नाम जुड़ सकते हैं और कई लोगों के सुरक्षित होने की पुष्टि भी हो सकती है।

परिवारों से आधिकारिक सूचना का इंतजार करने की अपील

नेपाल पर्यटन बोर्ड ने यात्रियों और उनके परिवारों से संयम बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों के मुताबिक ट्रैवल एजेंसियों, गाइडों और स्थानीय प्रशासन से लगातार जानकारी जुटाई जा रही है। लापता यात्रियों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए सुरक्षा एजेंसियां भी अभियान में जुटी हैं।

नेपाल की यह आपदा एक बार फिर दिखाती है कि हिमालयी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन कितने खतरनाक हो सकते हैं। तेज बारिश, नदी का अचानक बढ़ता जलस्तर और पहाड़ी इलाकों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियां राहत कार्यों को और चुनौतीपूर्ण बना देती हैं।

फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता यात्रियों का पता लगाना, प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालना और तबाह हुए इलाकों में राहत पहुंचाना है। भारत समेत कई देशों के नागरिकों के प्रभावित होने के कारण इस आपदा पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है। बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ लापता यात्रियों की संख्या और उनकी स्थिति को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

नोट: इस खबर में 291 विदेशी और 105 भारतीय नागरिकों का आंकड़ा नेपाल पर्यटन बोर्ड की 26 अगस्त की प्रारंभिक सूची पर आधारित है। 27 अगस्त के अपडेट में कुल 644 यात्रियों के लापता होने की सूचना दी गई है और आंकड़ों का सत्यापन जारी है।

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