Greater Noida Owl Attack: ग्रेटर नोएडा वेस्ट की एक सोसायटी में इन दिनों उल्लुओं का खौफ लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, पिछले तीन-चार दिनों में उल्लुओं ने कई लोगों पर हमला किया है। रात के अंधेरे में अचानक सिर पर झपट्टा मारने और नुकीले पंजों से हमला करने की घटनाओं के बाद सोसायटी के लोगों में डर का माहौल है। स्थिति यह है कि शाम ढलने के बाद बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग घर से बाहर निकलने में भी सावधानी बरत रहे हैं।
स्थानीय लोगों का दावा है कि अब तक करीब सात लोगों पर उल्लुओं के हमले की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इनमें से एक व्यक्ति को गंभीर चोटें आने की बात कही जा रही है। चोट इतनी गहरी बताई गई कि उसे अस्पताल जाकर उपचार कराना पड़ा और इंजेक्शन भी लगवाने पड़े। लगातार हो रही घटनाओं के बाद निवासियों ने मामले की जानकारी वन विभाग को भी दी है।
रात होते ही बढ़ जाता है उल्लुओं का डर
निवासियों के अनुसार, उल्लुओं का व्यवहार सबसे ज्यादा रात के समय देखने को मिल रहा है। अंधेरा होने के बाद जब लोग सोसायटी परिसर में निकलते हैं तो पेड़ों या आसपास की जगहों से अचानक उल्लू उड़कर व्यक्ति के सिर की तरफ झपट्टा मार देते हैं। कई लोगों ने बताया कि हमले के दौरान उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिलता।
उल्लू अपने नुकीले पंजों की वजह से चोट पहुंचा सकते हैं। अचानक हमला होने पर व्यक्ति घबरा भी सकता है और गिरने से अतिरिक्त चोट लगने का खतरा भी रहता है। यही वजह है कि सोसायटी के लोग अब रात में अकेले बाहर निकलने से बच रहे हैं।
चार से पांच उल्लू कैमरे में कैद होने का दावा
मामले को लेकर सोसायटी परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली गई है। स्थानीय निवासियों का दावा है कि सीसीटीवी फुटेज में चार से पांच उल्लू दिखाई दिए हैं। इसके बाद लोगों को आशंका है कि परिसर में एक से ज्यादा उल्लू सक्रिय हैं और इन्हीं की वजह से लगातार हमले हो रहे हैं।
हालांकि, यह पुष्टि करना जरूरी है कि कैमरे में दिखाई देने वाले सभी उल्लू हमले की घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं या नहीं। इस संबंध में वन विभाग की जांच और विशेषज्ञों की राय महत्वपूर्ण होगी। किसी जंगली पक्षी के व्यवहार के आधार पर उसके बारे में निष्कर्ष निकालने के बजाय विशेषज्ञों द्वारा स्थिति का आकलन किया जाना जरूरी है।
पांच से छह लोगों पर हमला होने की बात
सोसायटी में रहने वाले लोगों के मुताबिक, पिछले तीन-चार दिनों के दौरान करीब पांच से छह लोगों पर उल्लुओं के हमले हुए हैं। अलग-अलग घटनाओं को जोड़ने पर प्रभावित लोगों की संख्या सात तक बताई जा रही है। कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं, जबकि एक व्यक्ति को अधिक गंभीर चोट लगने की जानकारी सामने आई है।
लगातार घटनाओं के बाद सोसायटी में रहने वाले लोगों ने रात में पार्क में घूमना और देर तक बाहर बैठना तक बंद कर दिया है। लोगों का कहना है कि पहले जहां रात के समय बच्चे और परिवार पार्क में नजर आते थे, वहीं अब अंधेरा होते ही अधिकांश लोग अपने घरों में चले जाते हैं।
डर के कारण शाम के बाद घरों से निकलना मुश्किल
उल्लुओं के हमलों की चर्चा फैलने के बाद सोसायटी में डर का माहौल और बढ़ गया है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, अब शाम ढलते ही लोग अपने बच्चों को बाहर भेजने से बच रहे हैं। बुजुर्ग और महिलाएं भी जरूरत होने पर ही बाहर निकल रही हैं।
रात में टहलने वाले लोगों ने भी अपना रूट बदल लिया है। पार्क और पेड़ों के आसपास जाने से लोग बच रहे हैं। कई निवासियों का कहना है कि जब तक वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित नहीं करती, तब तक सावधानी बरतना ही बेहतर है।
वन विभाग को दी गई सूचना, टीम का इंतजार
सोसायटी निवासी सुमिल जलोटा के हवाले से बताया गया है कि वन विभाग को इस संबंध में सूचना दी जा चुकी है। लोगों ने व्हाट्सऐप ग्रुप और फोन के जरिए भी शिकायत की है। हालांकि, खबर के अनुसार सूचना दिए जाने के बाद भी टीम के मौके पर पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है।
निवासियों की मांग है कि वन विभाग की टीम सोसायटी में पहुंचकर उल्लुओं को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करे और उन्हें ऐसे स्थान पर छोड़े जहां पक्षियों के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।
उल्लुओं को नुकसान पहुंचाने के बजाय सुरक्षित रेस्क्यू की मांग
स्थानीय लोगों की मांग सिर्फ हमलों को रोकने तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि उल्लुओं को किसी तरह का नुकसान पहुंचाए बिना सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया जाना चाहिए। वन्यजीव विशेषज्ञ भी आम तौर पर ऐसी परिस्थितियों में लोगों को जंगली पक्षियों से दूरी बनाए रखने और उन्हें पकड़ने या परेशान करने की कोशिश नहीं करने की सलाह देते हैं।
उल्लुओं का प्राकृतिक आवास पेड़ों और शांत इलाकों में होता है। यदि वे किसी रिहायशी परिसर में लगातार दिखाई दे रहे हैं, तो इसके पीछे कई पर्यावरणीय कारण हो सकते हैं। इसलिए समस्या का स्थायी समाधान विशेषज्ञों की मदद से ही किया जाना बेहतर होगा।
लोगों को फिलहाल क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
जब तक वन विभाग की टीम स्थिति का निरीक्षण नहीं करती, सोसायटी के लोगों को रात में पेड़ों और घने झुरमुट वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखनी चाहिए। बच्चों को अकेले बाहर नहीं भेजना चाहिए और उल्लू दिखाई देने पर उसके करीब जाकर फोटो या वीडियो बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
अगर किसी व्यक्ति को पक्षी के पंजों या चोंच से चोट लगती है, तो घाव को तुरंत साफ कराकर चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है। खासकर गहरे घाव की स्थिति में इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए।
फिलहाल ग्रेटर नोएडा वेस्ट की इस सोसायटी में रहने वाले लोगों की नजर वन विभाग की कार्रवाई पर टिकी है। सीसीटीवी फुटेज में उल्लुओं की मौजूदगी और लगातार सामने आ रही हमले की शिकायतों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। अब देखना होगा कि वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर उल्लुओं को सुरक्षित रेस्क्यू करती है या नहीं और लोगों में बना डर कब खत्म होता है।
नोट: उल्लुओं द्वारा हमले और सीसीटीवी में उनकी मौजूदगी से जुड़ी जानकारी स्थानीय निवासियों के दावों पर आधारित है। वन विभाग की आधिकारिक जांच/पुष्टि के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।