मंदिर में पानी की बोतल पर ₹7 ज्यादा लिए, अब भरेंगे ₹7 लाख

आंध्र प्रदेश के अन्नवरम मंदिर से जुड़ा यह मामला इन दिनों चर्चा में है। पानी की बोतल पर कथित तौर पर सिर्फ ₹7 अतिरिक्त वसूलना एक दुकानदार को इतना भारी पड़ा कि उपभोक्ता आयोग ने उस पर ₹7 लाख उपभोक्ता कल्याण निधि में जमा करने का आदेश दे दिया। आंध्र प्रदेश के काकीनाडा जिले के […]

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  • September 12, 2026 11:00 pm IST, Published 51 minutes ago

आंध्र प्रदेश के अन्नवरम मंदिर से जुड़ा यह मामला इन दिनों चर्चा में है। पानी की बोतल पर कथित तौर पर सिर्फ ₹7 अतिरिक्त वसूलना एक दुकानदार को इतना भारी पड़ा कि उपभोक्ता आयोग ने उस पर ₹7 लाख उपभोक्ता कल्याण निधि में जमा करने का आदेश दे दिया।

आंध्र प्रदेश के काकीनाडा जिले के प्रसिद्ध अन्नवरम मंदिर परिसर से उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने छोटी रकम की कथित अतिरिक्त वसूली और उसके बाद हुई कानूनी कार्रवाई को लेकर लोगों का ध्यान खींचा है। एक श्रद्धालु ने आरोप लगाया कि मंदिर परिसर में संचालित दुकान से पानी की बोतल खरीदने पर उससे बोतल पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य यानी MRP से ₹7 ज्यादा वसूले गए। मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा और सुनवाई के बाद दुकानदार पर ₹7 लाख की राशि उपभोक्ता कल्याण निधि में जमा करने का आदेश दिया गया।

₹18 की बोतल के लिए लिए गए ₹25

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पीठापुरम निवासी डी. वेंकटेश्वर राव 22 फरवरी 2026 को अन्नवरम मंदिर दर्शन के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने मंदिर परिसर के सत्यगिरि क्षेत्र में स्थित एक दुकान से पैकेज्ड पानी की बोतल खरीदी। रिपोर्ट के मुताबिक बोतल पर MRP ₹18 अंकित था, लेकिन दुकानदार ने ग्राहक से ₹25 लिए। यानी निर्धारित MRP से ₹7 अधिक राशि वसूली गई।

शिकायतकर्ता ने अतिरिक्त रकम लिए जाने पर दुकानदार से सवाल किया। जब मामले का समाधान नहीं हुआ तो उन्होंने उपलब्ध साक्ष्यों के साथ मंदिर प्रशासन के अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाने की कोशिश की। रिपोर्टों में कहा गया है कि शिकायतकर्ता ने इस संबंध में व्हाट्सऐप के माध्यम से भी मंदिर अधिकारियों को जानकारी दी थी।

मामला आगे बढ़ने के बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद शिकायत, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित पक्षों की दलीलों पर सुनवाई हुई।

शिकायत के बाद उपभोक्ता आयोग पहुंचा मामला

इस मामले की सुनवाई ईस्ट गोदावरी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग से जुड़ी बताई गई है। India Today की रिपोर्ट के अनुसार आयोग ने 28 अगस्त 2026 के आदेश में दुकानदार द्वारा पैकेज्ड पानी की बोतल की MRP से ₹7 अधिक वसूलने की बात दर्ज की। आयोग ने अतिरिक्त राशि वापस करने के साथ शिकायतकर्ता को मुआवजा और मुकदमे से संबंधित खर्च देने का भी निर्देश दिया।

रिपोर्टों के मुताबिक, शिकायतकर्ता को ₹10,000 मुआवजे के रूप में और ₹5,000 मुकदमे के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया गया। इसके अलावा दुकानदार को ₹7 लाख उपभोक्ता कल्याण निधि में जमा करने का निर्देश दिया गया।

यही वजह है कि यह मामला सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में खासा चर्चा में है। ₹7 की कथित अतिरिक्त वसूली और उसके बाद ₹7 लाख की राशि जमा करने के आदेश ने लोगों का ध्यान खींचा है।

मंदिर परिसर की दुकानों पर भी नजर

इस फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू सिर्फ दुकानदार पर लगाया गया आर्थिक दंड नहीं है, बल्कि मंदिर परिसर में संचालित दुकानों की निगरानी से जुड़े निर्देश भी हैं। India Today के अनुसार आयोग ने देवस्थानम को अपनी निगरानी व्यवस्था का इस्तेमाल करते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा कि मंदिर परिसर में लाइसेंस प्राप्त दुकानों पर पैकेज्ड उत्पादों की MRP स्पष्ट रूप से प्रदर्शित हो।

इससे यह संदेश जाता है कि धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालु भी सामान्य उपभोक्ताओं की तरह अपने अधिकारों को लेकर जागरूक रह सकते हैं। किसी उत्पाद की कीमत को लेकर संदेह होने पर बिल, पैकेजिंग और MRP जैसे प्रमाण सुरक्षित रखना आगे की शिकायत में उपयोगी हो सकता है।

सिर्फ ₹7 की बात नहीं, उपभोक्ता अधिकारों का सवाल

इस मामले को केवल ₹7 की अतिरिक्त वसूली के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। उपभोक्ता अधिकारों के लिहाज से यह मामला इस बात को रेखांकित करता है कि ग्राहक से किसी पैकेज्ड उत्पाद के लिए निर्धारित MRP से अधिक राशि वसूलने पर शिकायत की जा सकती है और मामला संबंधित उपभोक्ता मंच तक पहुंच सकता है।

खासकर मंदिर, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, पर्यटन स्थल और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर लोग अक्सर पानी या दूसरी जरूरी चीजें तत्काल खरीदते हैं। ऐसे स्थानों पर कीमत को लेकर विवाद होने की संभावना रहती है। इसलिए ग्राहकों के लिए जरूरी है कि वे खरीदारी से पहले पैकेट पर अंकित MRP जरूर देखें और संभव हो तो खरीदारी का बिल भी लें।

श्रद्धालुओं के लिए क्या है जरूरी?

अगर किसी ग्राहक को लगता है कि उससे MRP से अधिक कीमत वसूली गई है तो सबसे पहले उसे खरीदारी का प्रमाण सुरक्षित रखना चाहिए। बोतल या पैकेज पर छपी MRP, दुकान का नाम, बिल या भुगतान का रिकॉर्ड आगे शिकायत के दौरान उपयोगी हो सकता है।

ग्राहक को दुकानदार से अतिरिक्त राशि वसूलने का कारण पूछना चाहिए और विवाद की स्थिति में उपलब्ध उपभोक्ता शिकायत व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि हर मामले के तथ्य अलग होते हैं और किसी भी शिकायत पर अंतिम निर्णय संबंधित प्राधिकरण या उपभोक्ता आयोग के आदेश के आधार पर होता है।

₹7 से ₹7 लाख तक पहुंचा मामला

अन्नवरम का यह मामला इसलिए भी खास है क्योंकि शुरुआत एक छोटी रकम को लेकर हुई थी। शिकायत के अनुसार पानी की बोतल पर ₹7 अतिरिक्त लिए गए, लेकिन उपभोक्ता आयोग के आदेश के बाद दुकानदार को अतिरिक्त राशि लौटाने, मुआवजा और मुकदमे का खर्च देने के साथ ₹7 लाख उपभोक्ता कल्याण निधि में जमा करने का निर्देश मिला।

यह फैसला उन दुकानदारों के लिए भी चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है जो ग्राहकों से निर्धारित कीमत से अधिक राशि वसूलते हैं। वहीं, उपभोक्ताओं के लिए यह मामला अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का संदेश देता है।

नोट: इस खबर में ₹7 लाख की राशि को दुकानदार को सीधे शिकायतकर्ता को देने वाली रकम नहीं बताया जाना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह राशि Consumer Welfare Fund में जमा करने का आदेश है, जबकि शिकायतकर्ता के लिए अलग से ₹7 की वापसी, ₹10,000 मुआवजा और ₹5,000 मुकदमे के खर्च का उल्लेख है।

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