AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है। ओवैसी ने सवाल उठाया कि यदि सरकार देश में समान नागरिक संहिता को लेकर गंभीर है, तो उसे गोवा के मौजूदा कानूनों को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात में UCC की चर्चा के जरिए लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है।
ओवैसी ने अमित शाह के उस बयान के संदर्भ में अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने लोगों से ‘क्रोनोलॉजी समझने’ की बात कही थी। AIMIM प्रमुख ने कहा कि अगर सरकार वास्तव में देश में एक समान नागरिक कानून की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है, तो उसे गोवा में भी जाकर स्पष्ट रूप से घोषणा करनी चाहिए कि वहां लागू व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा। उनका कहना था कि उत्तराखंड, गुजरात और असम में UCC को लेकर जिस तरह की पहल की गई है, उसी मॉडल को गोवा में भी लागू करने की बात सरकार को सामने रखनी चाहिए।
ओवैसी ने गोवा के कानूनों को लेकर कई सवाल उठाए। उनका दावा है कि गोवा में अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए कुछ मामलों में अलग प्रावधान और प्रक्रियाएं मौजूद हैं। इसी आधार पर उन्होंने गोवा को पूरी तरह समान नागरिक संहिता का उदाहरण बताए जाने पर आपत्ति जताई। उनके मुताबिक, जब किसी राज्य में समुदाय विशेष के लिए अलग कानूनी व्यवस्थाएं या छूट मौजूद हों, तो उसे देश के लिए पूर्ण UCC का आदर्श मॉडल बताना उचित नहीं है।
AIMIM प्रमुख ने गोवा में विवाह और पारिवारिक कानूनों से जुड़े प्रावधानों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि कुछ परिस्थितियों में हिंदू दंपतियों के लिए दूसरी शादी से संबंधित विशेष प्रावधान मौजूद हैं। हालांकि, ऐसे प्रावधानों की कानूनी व्याख्या और वर्तमान प्रभाव अलग-अलग परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं। ओवैसी ने इन्हीं प्रावधानों का हवाला देते हुए सरकार से सवाल किया कि अगर उसका लक्ष्य सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून बनाना है, तो गोवा की व्यवस्था को लेकर स्पष्टता क्यों नहीं दिखाई जाती।
उन्होंने कैथोलिक समुदाय से जुड़े कुछ प्रावधानों का भी उल्लेख किया। ओवैसी के अनुसार, गोवा में कैथोलिक विवाह के पंजीकरण से जुड़ी प्रक्रिया में चर्च के पादरियों की भूमिका हो सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि धार्मिक संस्थाओं को कुछ वैवाहिक मामलों में भूमिका हासिल है, जबकि दूसरे समुदायों के लोगों को समान विवादों के लिए अदालत का रुख करना पड़ता है।
ओवैसी ने चर्च ट्रिब्यूनल से जुड़े प्रावधानों का भी हवाला देते हुए कहा कि कुछ परिस्थितियों में विवाह की वैधता को लेकर वहां धार्मिक संस्थाओं की भूमिका दिखाई देती है। उनके मुताबिक, ऐसी व्यवस्थाओं के रहते गोवा को पूरी तरह समान नागरिक संहिता का उदाहरण बताना बहस को अधूरा प्रस्तुत करना है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह गोवा का उदाहरण देकर UCC के मुद्दे पर जनता के बीच एक खास धारणा बनाने की कोशिश कर रही है।
UCC को लेकर देश में पहले से ही राजनीतिक बहस तेज है। केंद्र सरकार और बीजेपी लंबे समय से समान नागरिक संहिता को समानता और एकरूपता से जोड़ते रहे हैं, जबकि विपक्षी दल इसके प्रावधानों, सामाजिक प्रभाव और विभिन्न समुदायों की धार्मिक एवं पारंपरिक व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उत्तराखंड में UCC लागू होने के बाद अन्य राज्यों में भी इसे लेकर चर्चा बढ़ी है।
ओवैसी की ताजा टिप्पणी ने इस बहस को एक बार फिर राजनीतिक रूप से गरमा दिया है। उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि यदि UCC को लेकर उसका रुख स्पष्ट है, तो गोवा सहित उन सभी व्यवस्थाओं पर भी समान दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, जहां अलग-अलग समुदायों के लिए अलग कानूनी प्रावधान होने का दावा किया जाता है। अब इस मुद्दे पर सरकार या बीजेपी की ओर से आने वाली प्रतिक्रिया पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं।