नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव से पहले हुई हिंसा को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि लोकतंत्र को अपराधियों का समाज नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन, दिल्ली पुलिस और सरकार से शुक्रवार तक इस मामले में रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
अदालत ने चेतावनी दी कि यदि हिंसा रोकने के लिए उठाए गए कदम संतोषजनक नहीं पाए गए तो छात्रसंघ चुनाव के मतों की गिनती और परिणाम घोषित करने पर रोक लगाई जा सकती है। मामले की सुनवाई चुनाव प्रचार के दौरान हुई हिंसा और कथित गुंडागर्दी से संबंधित जनहित याचिका पर हुई।
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के लिए प्रचार अभियान 16 सितंबर को समाप्त हो चुका है। मतदान 18 सितंबर को होगा, जबकि मतगणना 19 सितंबर को की जाएगी। चुनाव से ठीक पहले उत्तर परिसर में बुधवार रात छात्रों के दो गुटों के बीच झड़प हुई थी।
इस घटना के बाद पुलिस ने उत्तर परिसर में रात के समय गश्त और शक्ति प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन ने एक-दूसरे से जुड़े लोगों पर अलग-अलग स्थानों पर हमला करने के आरोप लगाए हैं।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आरोप लगाया कि विधि केंद्र-1 के बाहर उसके एक सदस्य पर जानलेवा हमला किया गया। संगठन का दावा है कि इस हमले में कांग्रेस, भारतीय युवा कांग्रेस और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन से जुड़े लोग शामिल थे।
संगठन ने दिल्ली विश्वविद्यालय के हरि मंदिर में अपने सदस्यों के घर पर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं द्वारा हमला किए जाने का भी आरोप लगाया। परिषद के अनुसार, उस समय उसके सदस्य शांतिपूर्ण बैठक कर रहे थे और वहां महिला छात्र सदस्य भी मौजूद थीं। परिषद ने दावा किया कि एक कथित हमलावर को पकड़कर पुलिस के हवाले किया गया।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस से जुड़े गैर-छात्र राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार किया। संगठन ने चुनाव प्रचार में बाहरी राजनीतिक कार्यकर्ताओं की कथित मौजूदगी और कक्षाओं में प्रचार किए जाने पर सवाल उठाए हैं।
परिषद ने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों को प्रभावित करने के लिए धन का इस्तेमाल किया जा रहा है। संगठन ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
हिंसा की घटना के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के उत्तर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पुलिस ने परिसर और आसपास के इलाकों में गश्त की। हाईकोर्ट की चेतावनी के बाद अब चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन और पुलिस के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान हिंसा या अनुशासनहीनता को गंभीरता से लिया जाएगा। अब दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन, दिल्ली पुलिस और सरकार की ओर से शुक्रवार को अदालत के सामने दी जाने वाली रिपोर्ट पर नजर रहेगी।