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रेजीनगर उपचुनाव से पहले हुमायूं कबीर ने बेटे के प्रचार से दूरी बनाई

हुमायूं कबीर ने जिन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का दावा किया है, उसे वह चुनाव प्रचार में बाधा के तौर पर देख रहे हैं। दूसरी ओर, पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई संबंधित मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत होने की बात सामने आई है

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  • September 21, 2026 10:26 am IST, Published 2 hours ago

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की रेजीनगर विधानसभा सीट पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले राजनीतिक माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख हुमायूं कबीर ने अपने बेटे और पार्टी उम्मीदवार गुलाम नबी आजाद के चुनाव प्रचार से फिलहाल दूरी बनाने का फैसला किया है। कबीर ने प्रशासन पर पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई और राजनीतिक भेदभाव के आरोप लगाए हैं।

हुमायूं कबीर का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ सक्रिय रूप से जुड़ना मुश्किल हो गया है। उन्होंने दावा किया कि AJUP से जुड़े करीब 25 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है और कई लोगों को पुलिस कार्रवाई या कथित धमकियों का सामना करना पड़ा है। हालांकि, इन आरोपों पर प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया इस घटनाक्रम में सामने नहीं आई है।

कबीर ने कहा है कि वह फिलहाल मैदान में प्रचार करने के बजाय सोशल मीडिया के जरिए मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाएंगे। उनका कहना है कि मतदान के दिन वह स्वयं सक्रिय रहेंगे और चुनाव प्रक्रिया पर नजर रखेंगे। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से संविधान और कानून के अनुरूप काम करने की अपील भी की है।

रेजीनगर सीट पर उपचुनाव की नौबत हुमायूं कबीर के विधानसभा क्षेत्र बदलने के फैसले के बाद आई। हालिया विधानसभा चुनाव में उन्होंने रेजीनगर और नाओदा, दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी। बाद में रेजीनगर सीट खाली किए जाने के कारण यहां उपचुनाव कराया जा रहा है। AJUP ने अब इस सीट से उनके बेटे गुलाम नबी आजाद को मैदान में उतारा है। कबीर के प्रचार से पीछे हटने के घटनाक्रम के बीच उनके बेटे गुलाम नबी आजाद ने भी चुनाव अभियान से दूरी बनाने की बात कही है। इससे AJUP के चुनाव प्रचार और संगठन की सक्रियता को लेकर सवाल उठे हैं।

रेजीनगर चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी नेतृत्व वाले गुट से जुड़े घटनाक्रम ने भी राजनीतिक तस्वीर को प्रभावित किया है। पार्टी के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने पहले चुनाव से हटने की घोषणा की थी। उन्होंने नए नाम और चुनाव चिह्न के साथ मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए मिले सीमित समय को इसकी एक वजह बताया था। हालांकि बाद में उन्होंने अपना फैसला बदलते हुए चुनाव मैदान में बने रहने का ऐलान कर दिया। रिपोर्टों के अनुसार, इस दौरान ममता बनर्जी के साथ बातचीत और सुरक्षा संबंधी आश्वासन का भी जिक्र हुआ।

इस बीच निर्दलीय उम्मीदवार सैफुल इस्लाम की गिरफ्तारी ने भी रेजीनगर के चुनावी माहौल को प्रभावित किया है। पुलिस के मुताबिक, उन्हें 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान हुई कथित हिंसक झड़प से जुड़े एक पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया। सैफुल इस्लाम का संबंध हुमायूं कबीर की पार्टी AJUP से बताया जाता है।

हुमायूं कबीर ने जिन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का दावा किया है, उसे वह चुनाव प्रचार में बाधा के तौर पर देख रहे हैं। दूसरी ओर, पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई संबंधित मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत होने की बात सामने आई है। ऐसे में घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक दलों और प्रशासन के दावों में अंतर दिखाई देता है।

रेजीनगर में चुनावी मुकाबले के बीच तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस से जुड़े समीकरण भी चर्चा में हैं। इससे पहले नंदीग्राम में ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की थी। वहीं रेजीनगर में ममता गुट के उम्मीदवार के नामांकन को लेकर भी कई बार स्थिति बदली। हालांकि इन घटनाक्रमों के बावजूद दोनों दलों के बीच किसी व्यापक नए गठबंधन की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।

अब सभी की नजर 6 अक्टूबर को होने वाले मतदान पर है। मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। चुनाव से पहले उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों की गतिविधियों के साथ-साथ कानून-व्यवस्था और निष्पक्ष मतदान को लेकर प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। रेजीनगर में हुमायूं कबीर की प्रचार से दूरी, उनके बेटे की चुनावी रणनीति, उम्मीदवारों से जुड़े विवाद और पुलिस कार्रवाई से जुड़े घटनाक्रम ने इस उपचुनाव को खासा महत्वपूर्ण बना दिया है।

 

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