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बंगाल उपचुनाव से पहले ममता गुट को झटका, दोनों सीटों पर प्रत्याशी नहीं

पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। ममता बनर्जी समर्थित गुट के रेजीनगर उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने शनिवार को अपना नामांकन वापस ले लिया। इससे एक दिन पहले नंदीग्राम से इसी गुट […]

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  • September 19, 2026 12:12 pm IST, Published 1 hour ago

पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। ममता बनर्जी समर्थित गुट के रेजीनगर उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने शनिवार को अपना नामांकन वापस ले लिया। इससे एक दिन पहले नंदीग्राम से इसी गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे भी चुनावी दौड़ से हट चुकी थीं। दोनों उम्मीदवारों के नामांकन वापस लेने के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट का इन दोनों सीटों पर कोई उम्मीदवार नहीं रह गया है।

रेजीनगर से उम्मीदवार बनाए गए रबीउल आलम चौधरी ने चुनाव से हटने के पीछे कम समय में नए चुनाव चिह्न को मतदाताओं तक पहुंचाने और संगठनात्मक तैयारियों से जुड़ी कठिनाइयों का उल्लेख किया है। ममता बनर्जी के गुट ने 13 सितंबर को नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव के लिए अपने प्रत्याशियों की घोषणा की थी। नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया गया था। उस समय दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान और 9 अक्टूबर को मतगणना की तारीख निर्धारित थी।

इसके बाद 18 सितंबर को नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया। उनके चुनावी मैदान से हटने के बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की। हालांकि, बाद में मिलन प्रधान की गिरफ्तारी की खबर भी सामने आई, जिसके बाद इस सीट का चुनावी घटनाक्रम और अधिक चर्चा में आ गया। रेजीनगर में रबीउल आलम चौधरी के नामांकन वापस लेने के बाद अब वहां ममता गुट की ओर से कोई उम्मीदवार नहीं है। नंदीग्राम के विपरीत रेजीनगर में ममता गुट की ओर से किसी अन्य उम्मीदवार के समर्थन को लेकर फिलहाल अलग राजनीतिक निर्णय सामने आया है। ऐसे में दोनों सीटों पर चुनावी मुकाबले का स्वरूप बदल गया है।

दोनों उम्मीदवारों के हटने की पृष्ठभूमि तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद से भी जुड़ी है। चुनाव आयोग ने दोनों गुटों के दावों पर सुनवाई करते हुए फिलहाल मूल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और आरक्षित ‘जोड़ाफूल’ चिह्न के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाई थी। ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी से जुड़े दोनों गुटों के बीच पार्टी संगठन, नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद पिछले कुछ समय से चल रहा है। उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग की कार्यवाही के कारण यह विवाद सीधे चुनावी मैदान तक पहुंच गया है।

नंदीग्राम सीट पश्चिम बंगाल की राजनीति में विशेष महत्व रखती है। 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के विधायक पद से इस्तीफा देने के कारण यह सीट रिक्त हुई। दूसरी ओर, रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद खाली रेजीनगर के उम्मीदवार के हटने के साथ ही अब ममता गुट की ओर से दोनों उपचुनावों में सीधे मुकाबला करने की स्थिति समाप्त हो गई है।

नंदीग्राम में यह गुट कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन दे रहा है, जबकि रेजीनगर में आगे की राजनीतिक स्थिति पर नजर रहेगी। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की नई व्यवस्था के तहत अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ चुनाव लड़ रहे गुटों की मौजूदगी भी इन उपचुनावों को महत्वपूर्ण बना रही है। अब दोनों विधानसभा क्षेत्रों में 6 अक्टूबर को मतदान होगा और 9 अक्टूबर को मतगणना है। दोनों सीटों पर उम्मीदवारों के नामांकन वापस लेने के बाद चुनावी समीकरणों में हुए बदलाव पर राजनीतिक दलों और पर्यवेक्षकों की नजर बनी हुई है।

 

 

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