रघुवीर सिंह मीणा पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी सेवाओं में अलग-अलग समय पर अलग-अलग जाति प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल किया। शिकायत में दावा किया गया था कि पुलिस सेवा में चयन के दौरान उन्होंने अनुसूचित जनजाति यानी एसटी वर्ग से संबंधित प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया, जबकि इससे पहले सरकारी शिक्षक के पद पर नियुक्ति के समय अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी श्रेणी का प्रमाण पत्र इस्तेमाल किया गया था।
मामला तब सामने आया जब गुना निवासी हरवीर सिंह रघुवंशी ने इस संबंध में शिकायत की। शिकायत मिलने के बाद पुलिस मुख्यालय की ओर से मामले की जांच कराई गई। जांच के लिए गठित समिति ने उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड की पड़ताल की। इसी प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग अवसरों पर इस्तेमाल किए गए जाति प्रमाण पत्रों को लेकर सवाल उठे।
शिकायत से जुड़े आरोपों के अनुसार, रघुवीर सिंह मीणा ने वर्ष 1986 में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से डीएसपी पद पर चयन हासिल किया था। आरोप है कि इस चयन में एसटी वर्ग से संबंधित प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद पुलिस सेवा में रहते हुए उन्हें अन्य सरकारी लाभ और सेवागत अवसर भी इसी श्रेणी के आधार पर मिलने का दावा किया गया है। वर्ष 2001 में उन्हें आईपीएस अवॉर्ड मिला था।
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आने की बात कही गई है कि पुलिस सेवा में आने से पहले रघुवीर सिंह मीणा सरकारी शिक्षक के रूप में कार्यरत थे। शिक्षक पद पर नियुक्ति के लिए उनके द्वारा ओबीसी वर्ग का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए जाने का उल्लेख जांच से जुड़े दस्तावेजों में होने का दावा किया गया है। इसके बाद लोक सेवा आयोग की परीक्षा में एसटी श्रेणी का प्रमाण पत्र इस्तेमाल किए जाने को लेकर शिकायतकर्ता ने आपत्ति दर्ज कराई थी।
जांच में कथित एसटी प्रमाण पत्र के विदिशा जिले से जारी होने की बात भी सामने आई है। इसके साथ ही प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया और संबंधित कर्मचारी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। मामले में उनके मूल निवास और प्रमाण पत्र जारी किए जाने के अधिकार क्षेत्र से जुड़े पहलुओं की भी जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है।
रघुवीर सिंह मीणा की पत्नी ममता मीणा मध्य प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रही हैं। वह भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चाचौड़ा विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 2013 से 2018 तक विधायक रही थीं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा की ओर से टिकट नहीं मिला। वर्तमान में वह गुना जिला पंचायत की सदस्य हैं।
अब एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच एजेंसी मामले से जुड़े दस्तावेजों, प्रमाण पत्रों और उनके जारी होने की प्रक्रिया की विस्तृत पड़ताल करेगी। पुलिस यह भी देखेगी कि संबंधित प्रमाण पत्र वास्तविक थे या नहीं और यदि उनमें कोई अनियमितता थी तो उसका लाभ किस तरह लिया गया। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्ष और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।