इंदौर/गोंडा। पतंजलि फूड्स लिमिटेड और भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बीच घी की गुणवत्ता को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है। पतंजलि फूड्स ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ 50 करोड़ रुपये के मानहानि दावे से जुड़ा मुकदमा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में दायर किया है। मामले की सुनवाई इंदौर पीठ में चल रही है। 15 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान सिंह की ओर से अधिवक्ता ने अदालत में वकालतनामा पेश किया और जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 18 सितंबर की तारीख तय की थी।
घी को लेकर बयान से शुरू हुआ विवाद
इस कानूनी विवाद की पृष्ठभूमि बृजभूषण शरण सिंह की ओर से पतंजलि के घी और अन्य उत्पादों को लेकर दिए गए सार्वजनिक बयानों से जुड़ी है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वर्ष 2022 में भी सिंह ने सार्वजनिक मंच से पतंजलि के घी की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए उसे नकली बताया था। बाद में यह मुद्दा दोबारा सार्वजनिक बहस में आया और बयानों को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली।
पतंजलि फूड्स का कहना है कि इस तरह के सार्वजनिक बयानों से कंपनी की प्रतिष्ठा और ब्रांड इमेज को नुकसान पहुंचा। कंपनी की ओर से अदालत में यह भी दावा किया गया कि विवादित बयानों का असर उसके आर्थिक हितों और शेयर मूल्य पर पड़ा। इन्हीं दावों के आधार पर 50 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की गई है। हालांकि, इन दावों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी नहीं आया है।
जिला अदालत से हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
रिपोर्टों के अनुसार, मामले की शुरुआती कार्यवाही इंदौर जिला अदालत में हुई थी। पतंजलि फूड्स का पंजीकृत कार्यालय इंदौर के विजय नगर क्षेत्र में होने के कारण मामला वहां दायर किया गया। बाद में सुनवाई के दौरान इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से जुड़े मुद्दे सामने आए और मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ तक पहुंचा।
पिछली सुनवाई में पतंजलि की ओर से अधिवक्ता विक्रम मालवीय ने कंपनी का पक्ष रखा। वहीं बृजभूषण शरण सिंह की ओर से पेश अधिवक्ता ने जवाब तैयार करने के लिए समय मांगा। अदालत ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 18 सितंबर के लिए निर्धारित की।
बृजभूषण ने कहा- जेल गया तो जमानत नहीं लूंगा
मानहानि के मुकदमे के बीच बृजभूषण शरण सिंह ने 17 और 18 सितंबर को दिए बयानों में मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया भी दी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने कहा कि यदि अदालत उन्हें सजा देकर जेल भेजती है तो वह जमानत नहीं लेंगे। उन्होंने खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और नकली उत्पादों के मुद्दे को लेकर अपनी बात दोहराई।
18 सितंबर को गोंडा में दिए गए एक बयान में सिंह ने पतंजलि के उत्पादों को लेकर फिर सवाल उठाए। उन्होंने कंपनी के उत्पादों के संबंध में कई आरोप लगाए। इन बयानों पर भी ध्यान देना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके खिलाफ चल रहा मानहानि मामला अदालत में विचाराधीन है। किसी पक्ष के सार्वजनिक आरोप या दावे को अदालत द्वारा सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता, जब तक न्यायिक प्रक्रिया में उसका निष्कर्ष न निकल जाए।
पतंजलि का पक्ष क्या है?
पतंजलि फूड्स की ओर से मामले में मुख्य तर्क यह है कि कंपनी के उत्पाद को सार्वजनिक रूप से ‘नकली’ बताए जाने से उसकी प्रतिष्ठा प्रभावित हुई। कंपनी का दावा है कि इससे उपभोक्ताओं के बीच भ्रम पैदा हुआ और कारोबारी हितों को नुकसान पहुंचा। इसी कथित नुकसान की भरपाई के लिए 50 करोड़ रुपये की मांग की गई है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि 50 करोड़ रुपये का दावा अदालत द्वारा मंजूर किया गया हर्जाना नहीं है। यह वादी पक्ष की ओर से मांगी गई राशि है। मामले में अदालत दोनों पक्षों की दलीलों, दस्तावेजों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगी।
घी की गुणवत्ता को लेकर पहले भी सामने आए मामले
पतंजलि के घी की गुणवत्ता को लेकर पहले भी विवाद सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लिए गए नमूनों और उसके बाद हुई कार्रवाई का उल्लेख किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2025 में घी के नमूनों से जुड़े मामले में कंपनी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी अलग मामले में खाद्य सुरक्षा संबंधी कार्रवाई अपने आप में वर्तमान मानहानि मुकदमे में बृजभूषण शरण सिंह के आरोपों को सही साबित नहीं करती। वर्तमान मामला मुख्य रूप से सार्वजनिक बयानों से कंपनी की प्रतिष्ठा और कथित आर्थिक नुकसान से जुड़े कानूनी दावों पर आधारित है।
18 सितंबर की सुनवाई पर नजर
अब इस मामले में 18 सितंबर 2026 की सुनवाई पर सबकी नजर है। अदालत में बृजभूषण शरण सिंह की ओर से जवाब और आगे की कानूनी दलीलों की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो सकती है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अभी तक 50 करोड़ रुपये के दावे पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
मामले का अंतिम परिणाम अदालत में प्रस्तुत होने वाले साक्ष्यों, दोनों पक्षों की दलीलों और न्यायालय के आदेश पर निर्भर करेगा। इसलिए फिलहाल इसे पतंजलि फूड्स बनाम बृजभूषण शरण सिंह के बीच चल रहा मानहानि विवाद कहना अधिक उपयुक्त है।
एक नजर में पूरा मामला
वादी: पतंजलि फूड्स लिमिटेड
प्रतिवादी: बृजभूषण शरण सिंह
मानहानि दावा: 50 करोड़ रुपये
विवाद का विषय: पतंजलि के घी/उत्पादों को लेकर सार्वजनिक बयान
अदालत: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, इंदौर पीठ
15 सितंबर 2026: सुनवाई, जवाब के लिए समय मांगा गया
18 सितंबर 2026: अगली सुनवाई निर्धारित
स्थिति: मामला विचाराधीन, अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
नोट: इस रिपोर्ट में ‘नकली’, ‘मानहानि’ और आर्थिक नुकसान से संबंधित बातें संबंधित पक्षों के आरोप, दावे या सार्वजनिक बयानों के संदर्भ में हैं। इन्हें अदालत के अंतिम निर्णय से पहले न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।