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₹11 का IV सेट ₹325 का MRP, तुकाराम मुंढे ने उठाए गंभीर सवाल

मुंबई/नई दिल्ली। अस्पताल में इलाज के दौरान मरीज और उसके परिवार की सबसे बड़ी चिंता अक्सर बढ़ता हुआ मेडिकल बिल होता है। इसी बीच महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों को लेकर उठाया गया मुद्दा चर्चा में है। एक सर्वे के आंकड़ों के हवाले से सामने […]

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  • September 18, 2026 8:00 pm IST, Published 56 minutes ago

मुंबई/नई दिल्ली। अस्पताल में इलाज के दौरान मरीज और उसके परिवार की सबसे बड़ी चिंता अक्सर बढ़ता हुआ मेडिकल बिल होता है। इसी बीच महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों को लेकर उठाया गया मुद्दा चर्चा में है। एक सर्वे के आंकड़ों के हवाले से सामने आया है कि ₹11.05 में खरीदे गए एक IV इन्फ्यूजन सेट पर ₹325 का अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) दर्ज था। यह अंतर करीब 2,841 प्रतिशत के मार्कअप के बराबर बताया गया है।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मामला किसी सामान्य दवा की कीमत से ज्यादा अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले मेडिकल कंज्यूमेबल्स की खरीद कीमत और घोषित MRP के बीच अंतर से जुड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, महाराष्ट्र में किए गए सर्वे में IV सेट, सिरिंज, कैथेटर और अन्य मेडिकल उपकरणों की कीमतों में भी उल्लेखनीय अंतर सामने आया।

₹11.05 के IV सेट पर ₹325 का MRP

महाराष्ट्र FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली कुछ मेडिकल वस्तुओं की कीमतों को लेकर चिंता जताई है। रिपोर्टों में उनके हवाले से बताया गया है कि सर्वे के दौरान एक IV इन्फ्यूजन सेट की ट्रेड/खरीद कीमत ₹11.05 मिली, जबकि उसी उत्पाद पर ₹325 का MRP दर्ज था। इस अंतर को 2,841 प्रतिशत के मार्कअप के रूप में बताया गया है।

इसी सर्वे में अन्य मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों में भी बड़ा अंतर सामने आने की बात कही गई है। उदाहरण के तौर पर ₹6.75 की खरीद कीमत वाली सिरिंज का MRP ₹57.20 और ₹29.41 की खरीद कीमत वाले कैथेटर का MRP ₹310 बताया गया है।

इन आंकड़ों ने अस्पतालों में मरीजों से वसूले जाने वाले मेडिकल कंज्यूमेबल्स के शुल्क और उनकी कीमत तय करने की प्रक्रिया पर चर्चा तेज कर दी है।

मरीजों के लिए क्यों अहम है यह मामला?

अस्पताल में भर्ती मरीज आम तौर पर उपचार के दौरान इस्तेमाल होने वाली हर मेडिकल वस्तु की बाजार कीमत की तुलना नहीं कर पाता। IV सेट, सिरिंज, कैथेटर, ऑक्सीजन मास्क या अन्य आवश्यक वस्तुएं उपचार का हिस्सा होती हैं और मरीज की स्थिति में इनके इस्तेमाल से इनकार करना व्यावहारिक रूप से आसान नहीं होता।

ऐसे में खरीद कीमत, MRP और मरीज से वसूले जाने वाले शुल्क के बीच अंतर को समझना जरूरी हो जाता है। तुकाराम मुंढे ने भी इसी तरह की पारदर्शिता की आवश्यकता पर सवाल उठाया है। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने कहा कि इलाज के दौरान मरीजों के पास इस्तेमाल होने वाले मेडिकल उत्पादों की कीमत की तुलना करने या विकल्प तलाशने का सीमित अवसर होता है।

हालांकि, ₹11.05 और ₹325 का उदाहरण सर्वे में सामने आए एक उत्पाद का है। इसे सभी अस्पतालों या प्रत्येक मरीज के बिल पर लागू तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। किसी अस्पताल द्वारा किसी विशेष मरीज से वास्तव में कितना शुल्क लिया गया, यह उसके बिल, इस्तेमाल किए गए उत्पाद और संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद ही तय किया जा सकता है।

मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों पर उठे सवाल

भारत में दवाओं की कीमतों को लेकर कई तरह के नियामक प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन सभी मेडिकल डिवाइस और कंज्यूमेबल्स पर समान प्रकार का मूल्य नियंत्रण लागू नहीं होता। इसी वजह से अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले कुछ उत्पादों की खरीद कीमत और MRP के बीच अंतर का मुद्दा महत्वपूर्ण हो जाता है।

रिपोर्टों के मुताबिक, महाराष्ट्र FDA की ओर से इन कीमतों को लेकर केंद्रीय स्तर पर समीक्षा और स्पष्ट दिशा-निर्देशों की जरूरत का मुद्दा उठाया गया है। इसमें ट्रेड प्राइस और घोषित MRP के बीच स्वीकार्य अंतर को लेकर व्यवस्था बनाने तथा मूल्य निगरानी को मजबूत करने की बात सामने आई है।

अस्पताल का बिल देखते समय मरीज क्या करें?

मेडिकल बिल मिलने पर मरीज या उसके परिजन प्रत्येक मद को ध्यान से देख सकते हैं। अस्पताल से इस्तेमाल की गई दवाओं और मेडिकल कंज्यूमेबल्स की बिलिंग डिटेल, मात्रा, यूनिट कीमत और MRP की जानकारी मांगना उपयोगी हो सकता है।

यदि किसी उत्पाद की कीमत को लेकर संदेह हो तो संबंधित उत्पाद का पैकेट, लेबल और बिल सुरक्षित रखना चाहिए। शिकायत की स्थिति में केवल सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर शिकायत करना अधिक उचित है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पारदर्शी बिलिंग व्यवस्था में मरीज को यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि उपचार के दौरान कौन-कौन से उत्पाद इस्तेमाल किए गए और उनके लिए कितना शुल्क लिया गया। इससे मरीज और अस्पताल दोनों के बीच विवाद की संभावना कम हो सकती है।

अब निगाह नियामक कार्रवाई पर

₹11.05 के IV सेट पर ₹325 MRP वाला उदाहरण सामने आने के बाद मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों और अस्पताल बिलिंग को लेकर बहस तेज हुई है। तुकाराम मुंढे द्वारा उठाया गया मुद्दा मुख्य रूप से खरीद कीमत और घोषित MRP के बीच बड़े अंतर की निगरानी से जुड़ा है।

आने वाले समय में इस विषय पर नियामक स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं, यह महत्वपूर्ण रहेगा। यदि मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों के लिए स्पष्ट मानक और प्रभावी निगरानी व्यवस्था तैयार होती है, तो मरीजों को बिलिंग की जानकारी समझने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू यही है कि ₹11.05 की खरीद कीमत और ₹325 के MRP वाला IV सेट सर्वे में दर्ज एक उदाहरण है, जिसे लेकर महाराष्ट्र FDA ने मूल्य निर्धारण व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। इसे सभी अस्पतालों में एक जैसी बिलिंग या अनिवार्य रूप से मरीजों से ₹325 वसूले जाने का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।

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