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IRCTC केस में लालू परिवार की बढ़ी मुश्किलें, नौ आरोपियों पर आरोप तय

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बहुचर्चित IRCTC होटल मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत नौ आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय करने का आदेश दिया है। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत के इस आदेश के बाद मामला अब ट्रायल […]

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  • September 18, 2026 4:17 pm IST, Published 1 hour ago

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बहुचर्चित IRCTC होटल मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत नौ आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय करने का आदेश दिया है। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत के इस आदेश के बाद मामला अब ट्रायल के अगले चरण में प्रवेश करेगा। हालांकि, अदालत में आरोप तय होने का अर्थ यह नहीं है कि आरोपियों को दोषी करार दिया गया है। मामले में अभियोजन पक्ष को अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य पेश करने होंगे और बचाव पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा।

यह मामला वर्ष 2004 से 2009 के बीच के घटनाक्रम से संबंधित है। उस समय लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक, रेलवे के रांची और पुरी स्थित बीएनआर होटलों के संचालन और रखरखाव के ठेके देने की प्रक्रिया में कथित तौर पर नियमों की अनदेखी की गई। जांच में आरोप लगाया गया कि दोनों होटलों के संचालन का ठेका सुजाता होटल्स को दिया गया था और इस प्रक्रिया के बदले कथित तौर पर पटना की एक जमीन के लेनदेन के जरिए लाभ पहुंचाने की व्यवस्था की गई।

सीबीआई ने इस मामले में जुलाई 2018 में प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच शुरू की। जांच एजेंसियों का आरोप रहा है कि रेलवे होटल के ठेकों और पटना की जमीन से संबंधित लेनदेन के बीच आपसी संबंध था। एजेंसियों ने जमीन की कीमत, उसके हस्तांतरण और कंपनियों के स्वामित्व में हुए बदलावों समेत कई पहलुओं की जांच की।

जांच के दौरान एजेंसियों ने आरोप लगाया कि पटना की जमीन को कथित तौर पर वास्तविक बाजार मूल्य या सर्किल रेट की तुलना में काफी कम कीमत पर एक ऐसी कंपनी से जोड़ा गया, जिसका संबंध यादव परिवार से बताया गया। ईडी ने इस कथित लेनदेन से जुड़े धन को अपराध से अर्जित आय यानी ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ के तौर पर जांच के दायरे में लिया। इसी आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून यानी PMLA के तहत कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

मामले में अदालत ने कुल नौ आरोपियों के खिलाफ मुकदमे को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ किया है। इनमें लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के अलावा प्रेम चंद गुप्ता, सरला गुप्ता, विनय कोचर और विजय कोचर शामिल हैं। इनके साथ लारा प्रोजेक्ट्स और सुजाता होटल्स को भी आरोपी बनाया गया है। वहीं, अदालत ने सात आरोपियों को मामले से डिस्चार्ज कर दिया है। डिस्चार्ज किए गए आरोपियों में राहुल यादव, गौरव गुप्ता, नाथ मल कांकड़िया, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, राजीव रेलन और एबीसीएल से संबंधित कंपनी शामिल हैं।

अदालत में आरोपियों की ओर से जांच और अभियोजन की कार्रवाई को लेकर कई दलीलें रखी गईं। बचाव पक्ष की ओर से राजनीतिक दुर्भावना से कार्रवाई किए जाने का तर्क भी सामने आया। हालांकि, अदालत ने उपलब्ध सामग्री और परिस्थितियों के आधार पर मामले को ट्रायल के लिए आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। अदालत के स्तर पर इस चरण का मतलब यह है कि प्रथम दृष्टया आरोपों की न्यायिक जांच के लिए पर्याप्त आधार माना गया है, जबकि अंतिम निष्कर्ष ट्रायल के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।

IRCTC होटल मामले में रेलवे से जुड़े ठेकों, निजी कंपनियों और पटना की जमीन के कथित लेनदेन के बीच संबंध जांच का प्रमुख बिंदु रहा है। जांच एजेंसियों ने यह पता लगाने की कोशिश की कि होटल संचालन का ठेका किस प्रक्रिया के तहत दिया गया और इसके समानांतर जमीन से जुड़े लेनदेन कैसे हुए। ईडी की जांच का केंद्र इस बात पर भी रहा कि कथित अपराध से प्राप्त रकम या संपत्ति को किस तरह इस्तेमाल या हस्तांतरित किया गया।

अब अदालत में मामले की सुनवाई साक्ष्य और गवाहों के चरण की ओर बढ़ेगी। अभियोजन पक्ष को अपने आरोपों को प्रमाणित करने के लिए दस्तावेज और अन्य साक्ष्य पेश करने होंगे। इसके बाद बचाव पक्ष को उन आरोपों का जवाब देने और अपने पक्ष में सामग्री प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। रिपोर्ट के अनुसार, मामले में आगे की औपचारिक कार्रवाई के लिए 3 अक्टूबर की तारीख तय की गई है।

इस पूरे घटनाक्रम में आरोप तय किए जाने और दोष सिद्ध होने के बीच अंतर समझना जरूरी है। अदालत का मौजूदा आदेश केवल मुकदमे को आगे बढ़ाने से संबंधित है। आरोपों की अंतिम पुष्टि या खारिजी ट्रायल के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों, गवाहों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर होगी। इसलिए राउज एवेन्यू कोर्ट के ताजा आदेश के बाद फिलहाल इतना तय हुआ है कि लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य आरोपी PMLA से जुड़े इस मामले में मुकदमे का सामना करेंगे।

 

 

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