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अमृतसर में ASI हरजीत सिंह की हत्या, आतंकी संगठन ने ली जिम्मेदारी

अमृतसर: पंजाब के अमृतसर में रात के समय गश्त पर तैनात पुलिस अधिकारी की गोली मारकर हत्या किए जाने की घटना से पुलिस विभाग में चिंता बढ़ गई है। मृतक अधिकारी की पहचान एएसआई हरजीत सिंह के रूप में हुई है, जो अमृतसर पुलिस में तैनात थे और पीसीआर ड्यूटी से जुड़े हुए थे। जानकारी […]

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  • September 18, 2026 12:49 pm IST, Published 51 minutes ago
अमृतसर: पंजाब के अमृतसर में रात के समय गश्त पर तैनात पुलिस अधिकारी की गोली मारकर हत्या किए जाने की घटना से पुलिस विभाग में चिंता बढ़ गई है। मृतक अधिकारी की पहचान एएसआई हरजीत सिंह के रूप में हुई है, जो अमृतसर पुलिस में तैनात थे और पीसीआर ड्यूटी से जुड़े हुए थे।

जानकारी के मुताबिक, यह वारदात थाना गेट हकीमां के अंतर्गत आने वाले इलाके में भगतांवाला अनाज मंडी के आसपास हुई। रात में ड्यूटी के दौरान मोटरसाइकिल पर आए कुछ हमलावरों ने हरजीत सिंह पर फायरिंग कर दी। गोली लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने इलाके में जांच शुरू कर दी। आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। इसके साथ ही पुलिस टीमों द्वारा घटनास्थल से तकनीकी और अन्य साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं, ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके और उनके घटनास्थल से निकलने के रास्ते का पता लगाया जा सके।

घटना के बाद सोशल मीडिया पर तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान नाम से एक संगठन की ओर से हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा सामने आया है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की ओर से भी फिलहाल इसे आतंकी हमला घोषित किए जाने की पुष्टि नहीं की गई है।

ऐसे में जांच पूरी होने तक हमले के पीछे की वास्तविक वजह और आरोपियों की पहचान को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच एजेंसियां इस पहलू समेत सभी संभावित कारणों की पड़ताल कर रही हैं।

हरजीत सिंह की हत्या ऐसे समय हुई है जब पंजाब में पुलिसकर्मियों को निशाना बनाए जाने की कुछ अन्य घटनाएं भी सामने आई हैं। हाल ही में अजनाला क्षेत्र में एक एएसआई पर गोली चलाए जाने की घटना में पुलिस अधिकारी घायल हुए थे। उस मामले में भी एक समूह की ओर से जिम्मेदारी लेने का दावा सामने आया था, जिसकी जांच सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई। इन घटनाओं के बाद पुलिसकर्मियों की सुरक्षा, खासकर रात की गश्त और संवेदनशील इलाकों में तैनाती को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

हरजीत सिंह की मौत के बाद पंजाब की कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। भाजपा नेता तरुण चुघ और शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने घटना को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। मजीठिया ने पुलिसकर्मियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल किए। हालांकि, ये विपक्षी नेताओं की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं हैं और इन्हें घटना की जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

पंजाब सरकार की ओर से दिवंगत एएसआई हरजीत सिंह के परिवार के लिए एक करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की गई है। इसके अतिरिक्त, अधिकारियों के अनुसार एचडीएफसी बैंक की ओर से परिवार को करीब एक करोड़ रुपये की बीमा राशि भी मिलने की बात कही गई है। हरजीत सिंह को पुलिस सम्मान के साथ अंतिम विदाई दिए जाने की भी जानकारी सामने आई है। पंजाब पुलिस ने अधिकारी के निधन पर शोक व्यक्त किया और उनके परिवार के प्रति संवेदना जताई। डीजीपी गौरव यादव ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

फिलहाल पुलिस का मुख्य फोकस हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी पर है। घटनास्थल के आसपास मौजूद सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग, तकनीकी साक्ष्य और अन्य सुरागों की जांच की जा रही है।

जांच के दौरान यह भी पता लगाने की कोशिश होगी कि हमलावरों ने हरजीत सिंह को ही क्यों निशाना बनाया और इसके पीछे व्यक्तिगत दुश्मनी, आपराधिक गतिविधि या कोई अन्य कारण था। जांच पूरी होने के बाद ही हमले की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

एएसआई हरजीत सिंह की मौत ने एक बार फिर ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों की सुरक्षा से जुड़े सवालों को सामने ला दिया है। फिलहाल पुलिस आरोपियों तक पहुंचने और पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है।

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