• होम
  • पंजाब
  • पंजाब में गुलजार सिंह की मौत पर कांग्रेस-बीजेपी ने आप सरकार घेरा

पंजाब में गुलजार सिंह की मौत पर कांग्रेस-बीजेपी ने आप सरकार घेरा

पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर कांग्रेस और बीजेपी ने तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने गुलजार सिंह की मौत को लेकर पंजाब सरकार से सवाल पूछे हैं। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले गुलजार […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • September 8, 2026 2:22 pm IST, Published 33 minutes ago

पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर कांग्रेस और बीजेपी ने तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने गुलजार सिंह की मौत को लेकर पंजाब सरकार से सवाल पूछे हैं। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले गुलजार सिंह पर दबाव बनाया गया और उनकी मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पंजाब की आप सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नशे की समस्या से अपने बेटे के बर्बाद होने का दर्द सार्वजनिक रूप से बताने वाले गुलजार सिंह ने वित्त मंत्री हरपाल चीमा से राज्य में खुलेआम नशा बिकने को लेकर सवाल किया था। रमेश के मुताबिक, गुलजार सिंह को सच बोलने के बाद माफी मांगने के लिए दबाव का सामना करना पड़ा और अंततः उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि गुलजार सिंह ने अपनी मौत के लिए वित्त मंत्री हरपाल चीमा और पंचायत के सरपंच को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा कि यदि सरकार का नशा माफियाओं के साथ कोई संबंध नहीं है तो संबंधित मंत्री को तत्काल पद से हटाया जाना चाहिए। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।

बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने भी इस मामले को लेकर पंजाब सरकार पर हमला बोला। उन्होंने गुलजार सिंह द्वारा जहर खाने के बाद बनाए गए वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि इसे मृत्युपूर्व बयान यानी Dying Declaration के तौर पर देखा जाना चाहिए। भाटिया के अनुसार, वीडियो में गुलजार सिंह ने हरपाल चीमा का नाम लेते हुए उन्हें अपनी मौत के लिए जिम्मेदार बताया था। उन्होंने पंचायत के सरपंच को भी जिम्मेदार ठहराए जाने का दावा किया।

भाटिया ने कहा कि गुलजार सिंह दलित समाज से आते थे और उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में पंजाब में कथित रूप से चल रहे ड्रग कारोबार तथा उस पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल उठाए थे। बीजेपी ने इस मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

गुलजार सिंह की मौत के मामले ने पंजाब में नशे की समस्या को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। विपक्षी दल लगातार आम आदमी पार्टी सरकार के उन दावों पर सवाल उठाते रहे हैं, जिनमें राज्य से नशे के कारोबार को खत्म करने की बात कही जाती है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार नशे के मुद्दे पर सवाल उठाने वालों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है, जबकि बीजेपी ने भी इस घटना को कानून-व्यवस्था और नशे के खिलाफ सरकारी कार्रवाई से जोड़ते हुए सवाल खड़े किए हैं।

जयराम रमेश ने अपने बयान में कुछ दिन पहले नौजवान मोहनजीत शेरों के साथ पुलिस द्वारा कथित तौर पर किए गए व्यवहार का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, मोहनजीत ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यक्रम में नशे के मुद्दे को लेकर विरोध किया था और बाद में पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। कांग्रेस ने इसे भी सरकार के रवैये पर सवाल उठाने वाला मामला बताया है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा मुद्दा पंजाब में नशे की समस्या और उस पर राजनीतिक दलों के बीच बढ़ता टकराव बन गया है। विपक्ष सरकार से नशे के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई, शिकायत उठाने वाले लोगों की सुरक्षा और गुलजार सिंह की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।

वहीं, गुलजार सिंह की ओर से बनाए गए कथित वीडियो में लगाए गए आरोपों की कानूनी स्थिति और उसमें कही गई बातों की प्रमाणिकता जांच का विषय है। किसी व्यक्ति को मौत के लिए जिम्मेदार ठहराने संबंधी आरोपों पर अंतिम फैसला संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगा। फिलहाल इस मामले ने पंजाब की राजनीति में नशे के मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है और सरकार पर विपक्ष का दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

 

Advertisement