पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी की ओर से चलाए जा रहे अभियान के बीच दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने राज्य में नशे की स्थिति को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। नशा विरोधी यात्रा के दौरान लोगों से मुलाकात का हवाला देते हुए मिश्रा ने कहा कि कई परिवार नशे की समस्या से परेशान हैं और माताओं ने अपने बच्चों को लेकर चिंता जाहिर की है। भाजपा की ओर से पंजाब में नशा मुक्त पंजाब यात्रा का आयोजन 18 से 30 सितंबर के बीच किया जा रहा है और पार्टी के अनुसार इसका उद्देश्य राज्यभर में नशे के खिलाफ जनजागरूकता और अभियान को गति देना है।
कपिल मिश्रा ने कहा कि यात्रा के दौरान जब वह महिलाओं और परिवारों के बीच पहुंचे तो उन्हें नशे से जुड़ी कई समस्याओं के बारे में बताया गया। उनके मुताबिक, कुछ महिलाओं ने आरोप लगाया कि उनके इलाकों में नशे की बिक्री खुले तौर पर हो रही है। एक महिला का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि परिवार नशे की समस्या से परेशान हैं और युवाओं पर इसका गंभीर असर पड़ रहा है। मिश्रा ने इन बातों को पंजाब में नशे के खिलाफ व्यापक अभियान की जरूरत से जोड़ते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
मिश्रा ने अपने बयान में आरोप लगाया कि नशे की वजह से कई परिवार आर्थिक और सामाजिक संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ अभिभावकों ने युवाओं की मौत, रोजगार की कमी और नशे की लत के कारण परिवारों में बढ़ते तनाव की बात कही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नशे की जरूरत पूरी करने के लिए कुछ युवा अपने ही घरों में चोरी तक कर रहे हैं। हालांकि, ये बातें मिश्रा द्वारा यात्रा के दौरान लोगों से बातचीत के आधार पर किए गए राजनीतिक दावे हैं।
भाजपा नेता ने पंजाब में नशा खत्म करने को लेकर पहले किए गए वादों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य में नशे की समस्या समाप्त करने के लिए समयसीमा तय करने वाले दावे किए गए थे, लेकिन उनके अनुसार जमीनी स्थिति में अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है। मिश्रा ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को केवल चुनावी विषय के तौर पर नहीं, बल्कि युवाओं और परिवारों से जुड़े सामाजिक मुद्दे के रूप में उठा रही है।
पंजाब में नशे का मुद्दा आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बहस का प्रमुख हिस्सा बन चुका है। भाजपा ने अपनी यात्रा को राज्य के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों तक ले जाने की योजना बनाई है। पार्टी के अनुसार चार यात्राएं करीब 4,000 किलोमीटर की दूरी तय करेंगी और 30 सितंबर को जालंधर में समाप्त होंगी।
मिश्रा ने अपने बयान में गुलजार नाम के एक व्यक्ति के परिवार का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने के बाद परिवार को परेशानियों का सामना करना पड़ा और गुलजार की मौत हुई। उन्होंने परिवार की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नाम सौंपे गए पत्र का भी जिक्र किया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान के आधार पर नहीं की जा सकती। नशे से जुड़े मामलों में पुलिस जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही घटनाओं की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
उन्होंने मोहनजीत नामक व्यक्ति का भी जिक्र करते हुए दावा किया कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने और विरोध जताने के कारण उन्हें भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। मिश्रा ने इन घटनाओं को पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा से जोड़ते हुए सरकार से कार्रवाई की मांग की।
भाजपा के इस अभियान को लेकर राज्य में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हैं। रिपोर्टों के अनुसार आम आदमी पार्टी और अन्य दल भाजपा के आरोपों का जवाब देते हुए नशे की समस्या के लिए अलग-अलग समय की सरकारों और केंद्र की भूमिका पर सवाल उठाते रहे हैं। वहीं, पंजाब सरकार ने नशे के खिलाफ अपना अलग अभियान ‘युद्ध नशेया विरुद्ध’ चला रखा है, जिसमें पुलिस कार्रवाई के साथ स्कूलों में जागरूकता, युवाओं की भागीदारी और पुनर्वास जैसे उपायों पर भी जोर दिया जा रहा है।
मिश्रा ने यात्रा के दौरान जुट रही भीड़ को पंजाब में नशे के खिलाफ जनभावना से जोड़ते हुए कहा कि लोग अब इस मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रख रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि बुजुर्गों, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी से अभियान को समर्थन मिल रहा है। हालांकि, इस तरह के राजनीतिक दावों और भीड़ की संख्या का स्वतंत्र आकलन अलग-अलग स्रोतों से किया जाना जरूरी है।
पंजाब में नशे की समस्या को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। भाजपा की यात्रा 30 सितंबर को समाप्त होनी है, जबकि राज्य सरकार अपने मौजूदा नशा विरोधी कार्यक्रमों को आगे बढ़ा रही है। ऐसे में नशे की रोकथाम, तस्करी पर कार्रवाई, पुनर्वास, युवाओं के लिए रोजगार और प्रभावित परिवारों की सहायता जैसे मुद्दे सार्वजनिक बहस के केंद्र में बने हुए हैं।