पुलिस के मुताबिक, यह मामला 18 सितंबर को अमृतसर की दाना मंडी में सामने आया था। ड्यूटी के दौरान एएसआई हरजीत सिंह पर हमला किया गया था, जिसमें उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए आरोपियों की तलाश शुरू की। घटनास्थल और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को जांच का अहम हिस्सा बनाया गया। फुटेज में सामने आए संदिग्धों और उनकी गतिविधियों के आधार पर पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाया।
जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी माध्यमों का भी इस्तेमाल किया। संदिग्ध मोबाइल नंबरों, उनकी लोकेशन और अन्य उपलब्ध तकनीकी जानकारी को खंगाला गया। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर पुलिस के सूचना तंत्र को सक्रिय किया गया। पुलिस के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी जांच और लोकल इंटेलिजेंस से मिले इनपुट को आपस में जोड़ने के बाद दीपक सिंह की पहचान मुख्य आरोपी के तौर पर हुई।
आरोपी की पहचान सामने आने के बाद पुलिस ने उसकी तलाश में कई स्थानों पर दबिश दी। इसी कार्रवाई के दौरान पुलिस और आरोपी के बीच मुठभेड़ होने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, मुठभेड़ में दीपक सिंह घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई। घटना के संबंध में पुलिस की ओर से आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
एएसआई हरजीत सिंह की हत्या के बाद पुलिस के सामने आरोपियों तक पहुंचने और मामले की कड़ियों को जोड़ने की चुनौती थी। पुलिस ने जांच के दौरान उपलब्ध डिजिटल और जमीनी सूचनाओं का इस्तेमाल किया। सीसीटीवी फुटेज से लेकर तकनीकी जानकारी और स्थानीय सूत्रों से मिले इनपुट को जांच में शामिल किया गया। पुलिस का दावा है कि इन्हीं प्रयासों के जरिए मुख्य आरोपी तक पहुंच बनाई गई।
मुठभेड़ के बाद अब पुलिस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कर रही है। इसमें मुठभेड़ की परिस्थितियों, आरोपी की गतिविधियों और एएसआई हरजीत सिंह की हत्या से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा सकती है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुट सकती है कि वारदात में आरोपी की भूमिका क्या थी और उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं।
इस कार्रवाई के बाद हरजीत सिंह हत्याकांड की जांच में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। हालांकि मामले से जुड़े अन्य पहलुओं और मुठभेड़ की परिस्थितियों को लेकर पुलिस की विस्तृत रिपोर्ट तथा जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।