नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून की देश से वापसी शुरू हो गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 19 सितंबर को पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से मानसून वापस लौट गया। इस बार मानसून की वापसी सामान्य तिथि से दो दिन पहले शुरू हुई है। सामान्य तौर पर पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी 17 सितंबर के आसपास शुरू होती है।
मौसम विभाग के मुताबिक, अगले तीन से चार दिनों के दौरान राजस्थान के कुछ और हिस्सों के साथ पंजाब, सौराष्ट्र और कच्छ के कुछ इलाकों से भी दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल रहने की संभावना है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 4 जून से 19 सितंबर के बीच देश में सामान्य से 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। बारिश की कमी का सबसे अधिक असर दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में देखने को मिला है, जहां सामान्य से 29 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून ने इस वर्ष 4 जून को केरल में दस्तक दी थी। इसके बाद 9 जुलाई तक मानसून पूरे देश में फैल गया था। अब सितंबर के दूसरे पखवाड़े में इसकी वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है।
मौसम विभाग ने 31 अगस्त को जारी अपनी मासिक रिपोर्ट में बताया था कि अगस्त में देशभर में 213.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यह वर्ष 2001 के बाद अगस्त महीने में दर्ज की गई सातवीं सबसे कम बारिश रही।
इस मानसून सत्र में जुलाई ही ऐसा महीना रहा, जब देश में औसत से अधिक बारिश हुई। जुलाई में सामान्य बारिश का आंकड़ा 280.5 मिलीमीटर है, जबकि इस वर्ष इस महीने में 283.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
मानसून की शुरुआत के दौरान जून में बारिश की स्थिति काफी कमजोर रही। जून में देशभर में सामान्य से 35 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। इस महीने सामान्य बारिश करीब 165 मिलीमीटर मानी जाती है, जबकि इस वर्ष केवल 106.8 मिलीमीटर बारिश हुई।
मौसम विभाग के अनुसार, जून में कम बारिश के प्रमुख कारणों में अल नीनो की स्थिति भी शामिल रही। इसके प्रभाव से मानसून की गतिविधियों पर असर पड़ा और देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई।
मानसून की वापसी के साथ देश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियों में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है। हालांकि, मानसून की वापसी एक साथ पूरे देश से नहीं होती, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों से चरणबद्ध तरीके से होती है।
फिलहाल मौसम विभाग राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में मानसून की वापसी पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में मानसून के अन्य हिस्सों से भी पीछे हटने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।