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UPI पेमेंट पर नया नियम, दुकानदार वसूल नहीं पाएंगे शुल्क

UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों के लिए इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही पोस्ट और वीडियो ने भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।

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Gauravshali Bharat News
  • September 19, 2026 8:00 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों के लिए इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही पोस्ट और वीडियो ने भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। कई तस्वीरों और वीडियो में दावा किया जा रहा है कि दुकानदार अब UPI से भुगतान करने पर ग्राहकों से अतिरिक्त रकम वसूल रहे हैं। कुछ वायरल पोस्ट में नकद, UPI और कार्ड भुगतान के लिए अलग-अलग कीमतें लिखी दिखाई गई हैं। ऐसे दावों के बीच केंद्र सरकार ने UPI के नए Merchant Discount Rate यानी MDR को लेकर स्थिति स्पष्ट की है।

सरकार की ओर से 15 सितंबर 2026 को जारी जानकारी के मुताबिक, UPI में नया MDR ढांचा लागू किया गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर UPI भुगतान पर ग्राहक से अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P भुगतान पूरी तरह निशुल्क रहेगा। वहीं ₹2,000 तक के अधिकांश व्यापारी भुगतान और छोटे व्यापारियों के लिए निर्धारित शून्य-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले लेनदेन भी शुल्क मुक्त रहेंगे। सरकार के अनुसार करीब 96 प्रतिशत P2M यानी व्यक्ति से व्यापारी वाले UPI लेनदेन पर इसका असर नहीं पड़ेगा।

सोशल मीडिया पर वायरल दावों ने बढ़ाई चिंता

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, जिनमें दुकानों पर UPI भुगतान के लिए अलग कीमत दिखाए जाने का दावा किया गया है। वायरल सामग्री में कहीं नकद भुगतान पर एक कीमत और UPI अथवा कार्ड भुगतान पर उससे अधिक कीमत बताई गई है। इससे ग्राहकों के बीच यह सवाल उठने लगा कि क्या अब डिजिटल भुगतान करने पर अलग से पैसा देना पड़ेगा।

हालांकि, वायरल पोस्ट को देखकर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि पूरे देश में सभी दुकानदार UPI भुगतान पर ग्राहक से अतिरिक्त शुल्क वसूल सकते हैं। नए MDR ढांचे में शुल्क का प्रावधान मुख्य रूप से व्यापारी-पक्ष के लिए किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR न तो सरकार द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स है और न ही NPCI द्वारा सीधे ग्राहक से लिया जाने वाला शुल्क है।

इसलिए ग्राहक के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि UPI भुगतान करते समय स्क्रीन पर दिखाई देने वाली अंतिम राशि को जरूर जांचें और किसी दुकानदार द्वारा अतिरिक्त रकम मांगे जाने पर उसका कारण स्पष्ट रूप से पूछें।

15 अक्टूबर से बड़े UPI व्यापारी भुगतान पर MDR

नए ढांचे के तहत 15 अक्टूबर 2026 से निर्धारित श्रेणी के ₹2,000 से अधिक के P2M UPI लेनदेन पर MDR लागू होगा। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और प्रकाशित विवरण के अनुसार सामान्य श्रेणी में MDR की दर 0.4 प्रतिशत रखी गई है और बड़ी राशि के लेनदेन के लिए इसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेनदेन निर्धारित है।

यहां यह समझना जरूरी है कि MDR का अर्थ ग्राहक के UPI ऐप पर लगने वाला सामान्य चार्ज नहीं है। यह डिजिटल भुगतान के व्यापारी पक्ष से संबंधित शुल्क है, जिसे भुगतान व्यवस्था में शामिल बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच वितरित किया जाता है।

वित्त मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि MDR को सरकार या NPCI द्वारा कर के रूप में नहीं वसूला जा रहा है। इसका उद्देश्य भुगतान व्यवस्था से जुड़े पारिस्थितिकी तंत्र की लागत और विस्तार से संबंधित व्यवस्था को समर्थन देना है।

₹2,000 तक के भुगतान पर क्या होगा?

नए नियमों को लेकर सबसे ज्यादा सवाल ₹2,000 की सीमा को लेकर हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान सामान्यतः इस नए MDR के दायरे में नहीं आएंगे। इसके अलावा छोटे व्यापारियों के लिए निर्धारित zero-MDR व्यवस्था भी जारी रहेगी। यही वजह है कि सरकार का कहना है कि करीब 96 प्रतिशत P2M लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे।

इसका सीधा मतलब यह है कि रोजमर्रा की छोटी खरीदारी करने वाले ग्राहकों के अधिकांश UPI भुगतान पर नए MDR का असर नहीं पड़ेगा। चाय, किराना, छोटी दुकान, सब्जी या अन्य सामान्य खरीदारी में ₹2,000 तक के भुगतान के लिए ग्राहक को केवल इसलिए अतिरिक्त रकम नहीं देनी चाहिए कि उसने UPI का इस्तेमाल किया है।

हालांकि, किसी विशेष व्यापारी या भुगतान श्रेणी पर लागू नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए बड़े भुगतान में ग्राहक को भुगतान से पहले अंतिम राशि और किसी संभावित शुल्क की जानकारी देखना जरूरी होगा।

छोटे दुकानदारों के लिए भी राहत का प्रावधान

नए ढांचे में छोटे व्यापारियों को लेकर भी विशेष व्यवस्था की गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार UPI QR के जरिए प्रति माह ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों को zero-MDR व्यवस्था का लाभ मिलता रहेगा। इसका उद्देश्य छोटे दुकानदारों और सड़क किनारे कारोबार करने वाले विक्रेताओं पर अतिरिक्त डिजिटल भुगतान लागत का बोझ सीमित रखना है।

यानी हर दुकानदार के लिए यह मान लेना सही नहीं है कि 15 अक्टूबर के बाद UPI भुगतान पर MDR देना ही होगा। भुगतान की राशि, व्यापारी की श्रेणी और लेनदेन का प्रकार यह तय करेगा कि संबंधित MDR व्यवस्था लागू होती है या नहीं।

क्या दुकानदार ग्राहक से MDR वसूल सकता है?

यही इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। सरकार ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि MDR का बोझ ग्राहकों पर न डाला जाए। यानी यदि किसी व्यापारी के लेनदेन पर MDR लागू होता है, तो उसे ग्राहक से अलग से MDR के नाम पर रकम वसूलने की अनुमति नहीं दी गई है।

इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल ऐसे दावे, जिनमें यह कहा जा रहा है कि अब UPI करने वाले हर ग्राहक से एक या दो प्रतिशत अतिरिक्त पैसा लिया जाएगा, उन्हें बिना आधिकारिक नियम देखे सच मानना उचित नहीं है।

उदाहरण के लिए यदि किसी सामान की कीमत ₹500 है और ग्राहक UPI से भुगतान करता है, तो केवल डिजिटल भुगतान का विकल्प चुनने के कारण दुकानदार द्वारा कीमत बढ़ाकर ₹510 या ₹520 करना नए MDR नियम की सामान्य व्यवस्था के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।

अलग-अलग भुगतान माध्यम के लिए अलग कीमत दिखे तो सावधान

वायरल तस्वीरों में कुछ दुकानों पर नकद, UPI और कार्ड के लिए अलग-अलग दरें लिखी दिखाई गई हैं। ऐसी तस्वीरें किसी खास दुकान या स्थान की स्थिति दिखा सकती हैं, लेकिन उनसे पूरे देश के लिए नियम तय नहीं किए जा सकते।

ग्राहकों को ऐसी स्थिति में बिल जरूर लेना चाहिए। यदि दुकानदार किसी अतिरिक्त रकम को UPI शुल्क, MDR या डिजिटल पेमेंट चार्ज बताकर वसूल रहा है, तो ग्राहक उससे शुल्क का आधार पूछ सकता है। भुगतान से पहले कुल राशि की पुष्टि करना और स्क्रीन पर दिखाई जा रही रकम को ध्यान से देखना भी जरूरी है।

RBI के पुराने निर्देशों में भी भुगतान से जुड़े शुल्क को ग्राहक पर डालने से संबंधित स्पष्ट प्रावधान रहे हैं। UPI के संदर्भ में 2020 से डिजिटल भुगतान शुल्क को लेकर केंद्र की नीति ने इसे बड़े पैमाने पर शुल्क-मुक्त रखने पर जोर दिया था।

किन मामलों में शुल्क की संरचना अलग हो सकती है?

नए ढांचे में कुछ विशेष क्षेत्रों के लिए अलग MDR व्यवस्था बताई गई है। प्रकाशित विवरणों के अनुसार रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कुछ अन्य आवश्यक श्रेणियों में ₹2,000 से अधिक के लेनदेन के लिए प्रतिशत आधारित MDR के बजाय ₹5 का फ्लैट MDR लागू होने की व्यवस्था है। पूंजी बाजार से जुड़े कुछ लेनदेन के लिए अलग दर का प्रावधान बताया गया है।

इसका अर्थ यह है कि हर ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर एक ही गणना लागू नहीं होगी। लेनदेन की श्रेणी के अनुसार नियम बदल सकते हैं।

यही कारण है कि ग्राहकों और व्यापारियों दोनों के लिए सोशल मीडिया पोस्ट के बजाय आधिकारिक दिशा-निर्देश और बैंक अथवा भुगतान सेवा प्रदाता की जानकारी देखना अधिक सुरक्षित है।

UPI से पैसा भेजना पहले की तरह निशुल्क

यदि कोई व्यक्ति अपने परिवार के सदस्य, दोस्त या किसी दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में UPI के माध्यम से पैसा भेजता है, तो इसे P2P भुगतान कहा जाता है। सरकार ने साफ किया है कि नए ढांचे का P2P लेनदेन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान राशि कितनी भी हो, UPI के जरिए यह भुगतान निशुल्क रहेगा।

इसलिए किसी दोस्त को ₹5,000 भेजना और किसी दुकान पर ₹5,000 का सामान खरीदना एक ही तरह का लेनदेन नहीं है। पहला P2P और दूसरा P2M भुगतान है। नए MDR नियम मुख्य रूप से निर्दिष्ट व्यापारी भुगतान से संबंधित हैं।

ग्राहकों के लिए सबसे जरूरी बातें

UPI के नए नियमों को समझने के लिए ग्राहकों को कुछ बातें ध्यान में रखनी चाहिए। पहली, हर UPI भुगतान पर नया शुल्क नहीं लगा है। दूसरी, P2P भुगतान निशुल्क है। तीसरी, ₹2,000 तक के अधिकांश व्यापारी भुगतान नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे। चौथी, छोटे पात्र व्यापारियों के लिए zero-MDR व्यवस्था जारी है। पांचवीं, लागू MDR को ग्राहक से अलग शुल्क के रूप में वसूलने की अनुमति नहीं दी गई है।

ऐसे में वायरल पोस्ट देखकर घबराने के बजाय भुगतान की श्रेणी, राशि और व्यापारी की स्थिति को समझना जरूरी है।

वायरल दावे और नए नियम में अंतर समझना जरूरी

सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरें इस पूरे मामले का एक हिस्सा दिखा सकती हैं, लेकिन उन्हें नए राष्ट्रीय नियम का प्रमाण नहीं माना जा सकता। वर्तमान आधिकारिक जानकारी के अनुसार UPI अभी भी बड़ी संख्या में लेनदेन के लिए शुल्क-मुक्त बना हुआ है। सरकार के मुताबिक लगभग 96 प्रतिशत व्यापारी लेनदेन पर नए MDR ढांचे का असर नहीं होगा।

इसलिए ग्राहकों को यह समझना चाहिए कि UPI पर नया MDR आया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर ग्राहक से UPI भुगतान के समय अतिरिक्त पैसा लिया जाएगा। यदि किसी दुकान पर UPI भुगतान के नाम पर अलग रकम मांगी जाती है, तो ग्राहक को बिल और शुल्क का विवरण मांगना चाहिए तथा जरूरत पड़ने पर संबंधित बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता के शिकायत तंत्र का उपयोग करना चाहिए।

नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध आधिकारिक सरकारी जानकारी और वर्तमान प्रकाशित नियमों के आधार पर तैयार की गई है। अलग-अलग व्यापारी श्रेणियों और विशेष लेनदेन के लिए लागू शर्तें संबंधित आधिकारिक अधिसूचनाओं के अनुसार देखी जानी चाहिए।

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