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पार्किंग से कार चोरी हुई तो पैसा कौन देगा, जानें पूरा नियम

नई दिल्ली। कार को मॉल, होटल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन या किसी अन्य अधिकृत पार्किंग में खड़ा करने के बाद अगर वह चोरी हो जाए, तो वाहन मालिक के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है—चोरी हुई कार का नुकसान बीमा कंपनी उठाएगी या पार्किंग संचालक को भुगतान करना होगा? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण […]

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  • September 19, 2026 7:00 pm IST, Published 3 minutes ago

नई दिल्ली। कार को मॉल, होटल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन या किसी अन्य अधिकृत पार्किंग में खड़ा करने के बाद अगर वह चोरी हो जाए, तो वाहन मालिक के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है—चोरी हुई कार का नुकसान बीमा कंपनी उठाएगी या पार्किंग संचालक को भुगतान करना होगा? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कई पार्किंग स्थलों पर पर्ची पर “वाहन मालिक की जिम्मेदारी” या “पार्किंग एट ओनर्स रिस्क” जैसी शर्तें लिखी होती हैं।

इस मामले में एक ही नियम हर परिस्थिति पर लागू नहीं होता। वाहन की बीमा पॉलिसी, पार्किंग की प्रकृति, पार्किंग संचालक को वाहन की वास्तविक सुपुर्दगी, पार्किंग रसीद, अनुबंध की शर्तें और चोरी की परिस्थितियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उपलब्ध न्यायिक फैसलों में भी अलग-अलग तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय की गई है।

सबसे पहले समझें बीमा में क्या कवर है

भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) के अनुसार केवल Third Party Liability पॉलिसी वाहन की अपनी चोरी या नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं होती। वाहन को हुए नुकसान के लिए Comprehensive/Package Policy या Standalone Own Damage कवर जैसी व्यवस्था जरूरी होती है।

इसलिए यदि किसी कार की केवल थर्ड पार्टी पॉलिसी है और कार पार्किंग से चोरी हो जाती है, तो वाहन मालिक को अपनी पॉलिसी के तहत चोरी के नुकसान की भरपाई मिलने की स्थिति नहीं बनती। वहीं ऐसी पॉलिसी जिसमें वाहन का Own Damage और Theft कवर शामिल है, उसमें चोरी का दावा किया जा सकता है, बशर्ते पॉलिसी की शर्तें पूरी हों।

IRDAI के अनुसार चोरी के दावे में आम तौर पर दावा फॉर्म, वाहन के दस्तावेज, एफआईआर और अन्य जरूरी कागजात मांगे जाते हैं। चोरी के मामलों में वाहन की चाबी तथा पुलिस की Non-Traceable/Final Report जैसे दस्तावेज भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

पार्किंग संचालक कब जिम्मेदार हो सकता है?

अगर वाहन किसी अधिकृत पार्किंग में शुल्क देकर जमा किया गया है और पार्किंग संचालक या उसके कर्मचारी ने वाहन को अपनी अभिरक्षा में लिया है, तो मामला केवल “पार्किंग शुल्क” तक सीमित नहीं रह सकता। भारतीय संविदा अधिनियम में Bailment यानी सुपुर्दगी से जुड़े प्रावधान हैं।

कानून की धारा 151 के अनुसार जिस व्यक्ति के पास किसी वस्तु की सुपुर्दगी की जाती है, उसे सामान्य विवेक वाले व्यक्ति की तरह उसकी उचित देखभाल करनी होती है। वहीं धारा 152 में उचित सावधानी बरतने की स्थिति में जिम्मेदारी से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।

यही कारण है कि कुछ मामलों में अदालतों ने पार्किंग संचालक की जिम्मेदारी पर विचार किया है, खासकर जब यह साबित हो कि वाहन वास्तव में उसकी पार्किंग में जमा हुआ था और वहीं से गायब हुआ।

2025 के एक मामले में सामने आया महत्वपूर्ण पहलू

दिल्ली की एक सिविल अदालत के 24 फरवरी 2025 के फैसले में ऐसा मामला सामने आया जिसमें एक वाहन बीमा कंपनी ने पार्किंग ठेकेदार से चोरी हुए वाहन की रकम की वसूली का दावा किया था। वाहन IFFCO Chowk Metro Station की पार्किंग से चोरी हुआ था और बीमा कंपनी ने वाहन मालिक को लगभग 3.19 लाख रुपये का भुगतान किया था।

अदालत ने मामले में सुप्रीम कोर्ट के Taj Mahal Hotel बनाम United India Insurance Co. Ltd. से जुड़े सिद्धांतों का उल्लेख किया। फैसले में कहा गया कि परिस्थितियों के आधार पर वाहन पार्किंग संचालक को सौंपे जाने से bailment संबंध बन सकता है और पार्किंग संचालक से वाहन की उचित सुरक्षा के संबंध में अपेक्षा की जा सकती है।

इसका मतलब यह नहीं है कि हर पार्किंग से चोरी होने पर पार्किंग संचालक स्वतः पूरी कार की कीमत देने के लिए बाध्य होगा। मामले के तथ्य और उपलब्ध सबूत निर्णायक हो सकते हैं।

पार्किंग एट ओनर्स रिस्क” लिखे होने से मामला खत्म नहीं

कई पार्किंग पर्चियों पर लिखा होता है कि वाहन मालिक अपने जोखिम पर वाहन खड़ा कर रहा है। लेकिन केवल इस तरह की लाइन दिखाई देने से हर विवाद अपने आप समाप्त नहीं हो जाता। अदालत यह देख सकती है कि वास्तव में वाहन किस परिस्थिति में पार्क किया गया था, पार्किंग संचालक की भूमिका क्या थी और वाहन की सुरक्षा को लेकर क्या व्यवस्था थी।

एक पुराने उपभोक्ता मामले में होटल की पार्किंग से चोरी हुई कार के संबंध में भी पार्किंग की शर्तों और वाहन की सुपुर्दगी के पहलुओं पर विचार किया गया था।

दूसरी ओर, ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहां पार्किंग संचालक को जिम्मेदार नहीं माना गया क्योंकि वाहन की चोरी और संबंधित पार्किंग एजेंसी के बीच आवश्यक तथ्यात्मक संबंध साबित नहीं हो सका।

यानी सिर्फ पार्किंग की पर्ची या सिर्फ बीमा पॉलिसी देखकर अंतिम जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती।

कार चोरी होने पर तुरंत क्या करें?

यदि पार्किंग से वाहन चोरी हो जाए तो वाहन मालिक को सबसे पहले पुलिस में शिकायत/एफआईआर दर्ज करानी चाहिए। इसके बाद बीमा कंपनी को तत्काल सूचना देना जरूरी है।

साथ ही पार्किंग की रसीद, टोकन, सीसीटीवी फुटेज से संबंधित जानकारी, पार्किंग कर्मचारी का विवरण, प्रवेश-निकास रिकॉर्ड और वाहन की चाबी जैसी चीजें सुरक्षित रखनी चाहिए।

यदि पार्किंग संचालक की लापरवाही का दावा करना हो तो यह साबित करने वाले दस्तावेज भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं कि वाहन उसी पार्किंग में जमा किया गया था।

बीमा कंपनी पैसा दे तो पार्किंग संचालक की भूमिका खत्म नहीं?

जरूरी नहीं। 2025 के दिल्ली मामले में अदालत ने यह भी देखा कि बीमा कंपनी द्वारा वाहन मालिक को भुगतान किए जाने के बाद बीमा कंपनी ने जिम्मेदार पक्ष से रकम वसूलने के अधिकार का दावा किया था। इसे बीमा कानून में Subrogation के सिद्धांत से जोड़ा गया।

इसका व्यावहारिक अर्थ यह हो सकता है कि पहले बीमा कंपनी पॉलिसी के अनुसार वाहन मालिक के नुकसान का निपटारा करे और परिस्थितियों के आधार पर बाद में जिम्मेदार पक्ष से राशि की वसूली का प्रश्न उठे।

वाहन मालिकों के लिए सबसे जरूरी बात

कार चोरी होने की स्थिति में यह मान लेना सही नहीं होगा कि “पार्किंग ने पैसा लिया है, इसलिए वही पूरी कार की कीमत देगा” या इसके उलट “मेरे पास बीमा है, इसलिए पार्किंग संचालक की कोई जिम्मेदारी नहीं है।”

जिम्मेदारी परिस्थितियों पर निर्भर करती है। बीमा पॉलिसी में Theft/Own Damage कवर है या नहीं, वाहन पार्किंग में किस तरह जमा हुआ, पार्किंग संचालक ने वाहन की अभिरक्षा ली या नहीं, पर्ची की शर्तें क्या हैं, सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी और चोरी के संबंध में क्या सबूत उपलब्ध हैं—इन सभी पहलुओं को देखा जा सकता है।

इसलिए वाहन मालिकों को पार्किंग की रसीद संभालकर रखनी चाहिए और कार का बीमा लेते समय केवल प्रीमियम नहीं, बल्कि Theft Cover, IDV, Deductible और Policy Exclusions भी ध्यान से जांचने चाहिए। IRDAI भी बीमा लेते समय कवरेज, डिडक्टिबल और IDV की तुलना करने की सलाह देता है।

नोट: पार्किंग से वाहन चोरी होने पर वास्तविक दायित्व प्रत्येक मामले के तथ्यों, अनुबंध और बीमा पॉलिसी की शर्तों पर निर्भर कर सकता है। यह सामान्य कानूनी जानकारी है, व्यक्तिगत कानूनी सलाह नहीं।

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