नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद पर चुनाव आयोग ने दोनों गुटों के लिए अलग-अलग राजनीतिक पहचान तय कर दी है। आयोग के फैसले के बाद अब ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट आगामी विधानसभा उपचुनाव नए नाम और अलग चुनाव चिह्न के साथ लड़ेंगे। आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया है। वहीं ऋतब्रत बनर्जी के गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम के साथ ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न दिया गया है।
चुनाव आयोग के मुताबिक दोनों दलों को पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के तौर पर माना जाएगा। यह फैसला ऐसे समय आया है जब तृणमूल कांग्रेस के पुराने नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न पर दोनों पक्षों ने अपना दावा किया था। विवाद के चलते आयोग ने पहले अंतरिम आदेश के तहत पुराने नाम और चुनाव चिह्न को दोनों गुटों के इस्तेमाल के लिए रोक दिया था। आयोग के निर्देश के बाद दोनों पक्षों से नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प मांगे गए थे। शुक्रवार सुबह 11 बजे तक प्रस्ताव देने की समय सीमा तय की गई थी। दोनों गुटों ने निर्धारित समय से पहले अपनी पसंद के नाम और प्रतीकों की सूची आयोग को सौंप दी थी।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से आयोग के सामने ऐसे नाम प्रस्तावित किए गए थे, जिनमें ‘ममता’ और ‘तृणमूल कांग्रेस’ शब्द शामिल थे। चुनाव चिह्न के लिए भी खेल से जुड़े विकल्पों को प्राथमिकता दी गई थी। आखिरकार आयोग ने ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम को मंजूरी देते हुए फुटबॉल खिलाड़ी का प्रतीक आवंटित किया। फुटबॉल से जुड़े प्रतीक का चुनाव पार्टी के पुराने राजनीतिक नारों और खेल से जुड़े सार्वजनिक संदेशों के संदर्भ में भी चर्चा में है।
दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने ‘नेशनलिस्ट तृणमूल कांग्रेस’, ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और ‘पश्चिम बंगाल तृणमूल कांग्रेस’ जैसे नामों का विकल्प दिया था। चुनाव चिह्न के तौर पर टॉर्च और लिफाफे समेत कुछ अन्य विकल्प भी रखे गए थे। आयोग ने अंततः ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और लिफाफा चुनाव चिह्न आवंटित किया।
इस पूरे विवाद की शुरुआत तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों गुटों के दावे से हुई थी। जब दोनों पक्षों ने पुराने नाम और प्रतीक पर अपना अधिकार जताया, तब मामला चुनाव आयोग के समक्ष पहुंचा। आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अंतरिम व्यवस्था के तहत ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पुराने चुनाव चिह्न को फिलहाल फ्रीज कर दिया था। इसके साथ ही दोनों गुटों को आगामी उपचुनाव के लिए अलग नाम और प्रतीक चुनने का निर्देश दिया गया था।
अब आयोग के ताजा फैसले के बाद दोनों पक्षों के सामने चुनावी मैदान में अपनी नई पहचान के साथ उतरने की स्थिति साफ हो गई है। पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव में दोनों गुट इन नए नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल कर सकेंगे। दोनों पक्षों की ओर से इन सीटों पर पहले ही उम्मीदवार उतारे जा चुके हैं।
चुनाव आयोग के इस फैसले से उपचुनाव की तैयारियों में भी एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है। अब मतदाताओं के सामने दोनों गुट अलग-अलग नाम और प्रतीकों के साथ मौजूद होंगे। इससे चुनाव प्रचार, उम्मीदवारों की पहचान और राजनीतिक संदेश को नए सिरे से तैयार करने की जरूरत दोनों पक्षों के सामने होगी।
फिलहाल आयोग के निर्णय के बाद तृणमूल कांग्रेस से जुड़े विवाद में तत्काल चुनावी पहचान को लेकर तस्वीर स्पष्ट हो गई है। ममता बनर्जी का गुट ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और फुटबॉल खिलाड़ी के प्रतीक के साथ मैदान में उतरेगा, जबकि ऋतब्रत बनर्जी का गुट ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और लिफाफा चुनाव चिह्न के साथ चुनाव लड़ेगा। दोनों गुटों के लिए पश्चिम बंगाल के साथ मेघालय और त्रिपुरा में भी इन्हें मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में दर्ज किया गया है। अब आगामी उपचुनाव में दोनों नई राजनीतिक पहचान के साथ मतदाताओं के बीच जाएंगे।