कलकत्ता: तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा की सुरक्षा को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट ने बंगाल पुलिस को अहम निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि जब भी महुआ मोइत्रा अपने निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करें, उनकी सुरक्षा व्यवस्था में दो अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए जाएं। कोर्ट ने यह निर्देश उस मामले की सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें सांसद के साथ कथित तौर पर हुई अभद्रता और विरोध-प्रदर्शन से जुड़ी घटनाओं का मुद्दा उठाया गया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि एक निर्वाचित सांसद को यदि सार्वजनिक स्थान पर परेशान किया जाता है या उन पर अंडे जैसी चीजें फेंकी जाती हैं, तो यह सामान्य विरोध के दायरे से बाहर माना जा सकता है। कोर्ट ने सवाल किया कि यदि किसी सांसद के साथ इस तरह का व्यवहार होता है, तो राजनीतिक विरोध से जुड़े अन्य लोगों की सुरक्षा का क्या होगा।
अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जवाब मांगा। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि महुआ मोइत्रा को पहले से ही सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि यदि सुरक्षा पर्याप्त है, तो ऐसी घटनाएं कैसे हुईं जिनके बाद पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करनी पड़ी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी जनप्रतिनिधि के साथ कानून-व्यवस्था की सीमा पार करने वाला व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने राज्य प्रशासन को ऐसी घटनाओं से प्रभावी तरीके से निपटने की जरूरत बताई।
कोर्ट की टिप्पणी का जोर इस बात पर था कि अगर शुरुआती स्तर पर ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं की गई, तो हालात आगे चलकर प्रशासन के नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं। महुआ मोइत्रा कृष्णानगर लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं और कई मुद्दों पर मुखर राजनीतिक रुख के लिए जानी जाती हैं। उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान विरोध या राजनीतिक प्रदर्शन पहले भी चर्चा में रहे हैं।
अदालत ने पुलिस से यह सुनिश्चित करने को कहा कि सांसद के निर्वाचन क्षेत्र में पहुंचने पर उनकी सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त व्यवस्था उपलब्ध रहे। दो अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती का उद्देश्य किसी संभावित अप्रिय घटना को रोकना और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है।अदालत का रुख इस व्यापक सिद्धांत को रेखांकित करता है कि राजनीतिक विरोध शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए। किसी सांसद या अन्य जनप्रतिनिधि के खिलाफ शारीरिक रूप से परेशान करने, वस्तुएं फेंकने या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने जैसी गतिविधियों पर पुलिस को कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
इस मामले में कोर्ट की टिप्पणियां राज्य पुलिस की जवाबदेही से भी जुड़ी हैं। अदालत ने संकेत दिया कि केवल सुरक्षा उपलब्ध कराने का दावा पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीन पर उसकी प्रभावशीलता भी दिखाई देनी चाहिए। यदि किसी संरक्षित व्यक्ति के साथ बार-बार ऐसी घटनाएं होती हैं, तो सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है।
फिलहाल अदालत के निर्देश के बाद बंगाल पुलिस को महुआ मोइत्रा के निर्वाचन क्षेत्र के दौरों के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा उपलब्ध करानी होगी। मामले की आगे की सुनवाई में सुरक्षा व्यवस्था और पहले हुई घटनाओं को लेकर राज्य की ओर से दी गई जानकारी पर भी नजर रहेगी। अदालत की सख्त टिप्पणी से यह संदेश गया है कि राजनीतिक विरोध के नाम पर कानून-व्यवस्था से समझौता नहीं किया जा सकता।