सूरत: गुजरात के सूरत स्थित श्याम संगिनी टेक्सटाइल मार्केट में सितंबर की शुरुआत में लगी भीषण आग के मामले में पुलिस जांच के बाद एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। पुलिस के अनुसार, आग दुर्घटना नहीं बल्कि कथित रूप से जानबूझकर लगाई गई थी। इस मामले में एक पूर्व कर्मचारी विनोद साल्वे को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी का विवाद कथित तौर पर बकाया वेतन के करीब 10 हजार रुपये और नौकरी के दौरान हुए व्यवहार को लेकर था। आग की इस घटना में करीब 24 करोड़ रुपये के कपड़ा कारोबार को नुकसान पहुंचने का अनुमान सामने आया है।
आधी रात को धधक उठा था टेक्सटाइल मार्केट
यह घटना सूरत के सारोली क्षेत्र स्थित श्याम संगिनी टेक्सटाइल मार्केट में हुई। रिपोर्टों के अनुसार, 8 और 9 सितंबर की दरम्यानी रात मार्केट की ऊपरी मंजिल पर आग भड़क उठी। कुछ ही समय में आग ने वहां रखे कपड़े, पैकेजिंग सामग्री और अन्य ज्वलनशील सामान को अपनी चपेट में ले लिया।
आग की सूचना मिलने के बाद दमकल विभाग की कई गाड़ियां और बड़ी संख्या में कर्मी मौके पर पहुंचे। ऊंची मंजिल, घना धुआं और बड़ी मात्रा में कपड़ा एवं पैकिंग सामग्री होने के कारण राहत और बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण रहा। शुरुआती रिपोर्टों में कई दुकानों के प्रभावित होने की बात सामने आई थी। बाद की जांच में नुकसान का अनुमान करीब 24 करोड़ रुपये तक बताया गया।
करोड़ों का माल आग की लपटों में हुआ खाक
पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, आग से मुख्य रूप से तैयार कपड़ा और डिलीवरी के लिए रखा गया स्टॉक प्रभावित हुआ। यह माल आगामी त्योहारों के सीजन को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग राज्यों में भेजे जाने की तैयारी में था।
सूरत देश के प्रमुख टेक्सटाइल कारोबार केंद्रों में शामिल है और यहां बड़ी मात्रा में कपड़े का उत्पादन, व्यापार और वितरण होता है। ऐसे में किसी बड़े बाजार में आग लगने से केवल दुकानदारों को ही नहीं, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े दूसरे कारोबारियों पर भी असर पड़ सकता है।
जांच के दौरान पुलिस ने नुकसान का आकलन करने के साथ-साथ आग लगने के कारणों पर भी ध्यान केंद्रित किया। शुरुआती स्तर पर शॉर्ट सर्किट या अन्य तकनीकी कारणों की संभावना पर विचार किया गया था, लेकिन CCTV फुटेज सामने आने के बाद जांच की दिशा बदल गई।
CCTV फुटेज से सामने आया संदिग्ध व्यक्ति
पुलिस के अनुसार, बाजार में लगे CCTV कैमरों की फुटेज जांच का अहम आधार बनी। फुटेज में एक व्यक्ति चेहरे को कपड़े से ढककर बाजार के भीतर जाता दिखाई दिया। पुलिस का दावा है कि वह व्यक्ति कपड़ों के पार्सल के पास पहुंचा और कथित तौर पर किसी ज्वलनशील पदार्थ का इस्तेमाल करने के बाद वहां आग लगाता नजर आया।
जांचकर्ताओं ने बाजार के अंदर और बाहर लगे अलग-अलग CCTV कैमरों के फुटेज को मिलाकर संदिग्ध की गतिविधियों को ट्रैक किया। इसके बाद उसकी पहचान विनोद साल्वे के रूप में किए जाने की बात सामने आई। पुलिस ने सोमवार को उसे गिरफ्तार किया।
अप्रैल में अकाउंटेंट की नौकरी शुरू की थी
पुलिस के मुताबिक, विनोद साल्वे ने अप्रैल 2026 में बाजार की एक दुकान में अकाउंटेंट के तौर पर काम शुरू किया था। रिपोर्टों में उसका मासिक वेतन करीब 30 हजार रुपये बताया गया है। पुलिस के अनुसार, नौकरी छोड़ने के बाद उसके करीब 10 हजार रुपये कथित रूप से बकाया रह गए थे।
जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी ने पूछताछ के दौरान नौकरी के दौरान कथित रूप से परेशान किए जाने और अपमानित महसूस करने की बात कही। हालांकि, ये आरोप आरोपी के कथित बयान और पुलिस जांच के हिस्से हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग से नहीं हुई है।
पुलिस के अनुसार, इसी विवाद को लेकर आरोपी ने कथित तौर पर बाजार में आग लगाने की योजना बनाई। मामले की जांच अभी जारी है और आगजनी से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
पेट्रोल लेकर बाजार पहुंचने का पुलिस का दावा
जांच में पुलिस ने कथित तौर पर यह भी पाया कि आरोपी ने पेट्रोल खरीदा और उसे लेकर बाजार पहुंचा था। पुलिस के अनुसार, CCTV फुटेज में उसे कपड़ों के पार्सल के पास ज्वलनशील पदार्थ डालते हुए देखा गया।
इसके बाद आग तेजी से फैल गई। टेक्सटाइल मार्केट में बड़ी मात्रा में सिंथेटिक कपड़े, प्लास्टिक पैकिंग और कार्डबोर्ड जैसी सामग्री मौजूद थी। अग्निशमन अधिकारियों ने पहले भी बताया था कि ऐसी सामग्री आग को तेजी से फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
पुलिस ने आरोपी को कैसे पकड़ा?
आग लगने के बाद आरोपी के बारे में जानकारी जुटाने के लिए पुलिस ने CCTV फुटेज के अलावा अन्य स्रोतों से भी जांच की। रिपोर्टों के अनुसार, वह घटना के बाद सूरत से बाहर चला गया था। पुलिस ने उसके संभावित ठिकानों का पता लगाया और बाद में उसके सूरत लौटने पर उसे गिरफ्तार कर लिया।
अधिकारियों के अनुसार, मामले में CCTV फुटेज और अन्य जांच संबंधी सूचनाएं महत्वपूर्ण साबित हुईं। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आग लगाने की पूरी योजना कैसे तैयार की गई और घटना से पहले आरोपी की गतिविधियां क्या थीं।
एक छोटी रकम से करोड़ों के नुकसान तक पहुंचा मामला
इस पूरे मामले ने कारोबारी विवादों के गंभीर परिणामों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। यदि पुलिस की जांच में लगाए गए आरोप अदालत में साबित होते हैं, तो करीब 10 हजार रुपये के कथित वेतन विवाद से शुरू हुआ मामला करोड़ों रुपये के आर्थिक नुकसान तक पहुंचने वाला साबित होगा।
हालांकि, किसी भी आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अदालत के अंतिम निर्णय तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। फिलहाल पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे जारी है।
सूरत की इस घटना ने टेक्सटाइल बाजारों में अग्नि सुरक्षा, CCTV निगरानी, कर्मचारियों के प्रवेश-निकास रिकॉर्ड और ज्वलनशील सामग्री के सुरक्षित भंडारण जैसे मुद्दों पर भी ध्यान खींचा है। बड़े व्यावसायिक परिसरों में आग की घटना होने पर कुछ ही मिनटों में भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखना कारोबारियों और प्रशासन दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।