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मौसमी चटर्जी की बेटी को खास सलाह, शादी पर क्यों बदली सोच?

मौसमी ने बातचीत के दौरान बताया कि वह अपनी बेटी से कहती हैं कि जीवन में किसी के साथ रिश्ता होना और उसी व्यक्ति से शादी करना, दोनों अलग-अलग फैसले हैं।

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  • September 22, 2026 8:55 pm IST, Published 50 minutes ago

मनोरंजन डेस्क / नई दिल्ली : बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री मौसमी चटर्जी एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज और स्पष्ट विचारों को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उनके सुर्खियों में आने की वजह कोई फिल्म या अभिनय परियोजना नहीं, बल्कि अपनी बेटी मेघा मुखर्जी को लेकर दी गई एक निजी और महत्वपूर्ण सलाह है। जागरण फिल्म फेस्टिवल 2026 में पत्रकार नयनदीप रक्षित के साथ बातचीत के दौरान मौसमी ने रिश्तों, शादी, महिलाओं की स्वतंत्रता और बदलते सामाजिक नजरिए पर खुलकर बात की।

मौसमी ने बातचीत के दौरान बताया कि वह अपनी बेटी से कहती हैं कि जीवन में किसी के साथ रिश्ता होना और उसी व्यक्ति से शादी करना, दोनों अलग-अलग फैसले हैं। उन्होंने अपनी बेटी को यह समझने की सलाह दी कि किसी रिश्ते में होना अपने आप में शादी की बाध्यता नहीं बन जाता। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में खासा ध्यान खींचा है।

कम उम्र में शादी का अनुभव रहा खास वजह

मौसमी चटर्जी की अपनी जिंदगी इस सलाह को और भी खास बनाती है। उन्होंने बहुत कम उम्र में शादी की थी। उनका विवाह प्रसिद्ध गायक-संगीतकार हेमंत कुमार के बेटे जयंत मुखर्जी के साथ हुआ था। इसके बाद उन्होंने कम उम्र में ही मातृत्व का अनुभव भी किया। उनकी बड़ी बेटी पायल और छोटी बेटी मेघा हैं।

मौसमी ने अपने करियर की शुरुआत बंगाली फिल्म ‘बालिका बधू’ से की थी और इसके बाद हिंदी तथा बंगाली सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। अभिनय के क्षेत्र में लगातार काम करते हुए उन्होंने निजी जीवन और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच भी लंबा सफर तय किया। यही वजह है कि जब वह आज की पीढ़ी और रिश्तों को लेकर अपनी राय रखती हैं, तो उसमें उनके व्यक्तिगत अनुभवों की झलक भी दिखाई देती है।

बेटियों को खुद को प्राथमिकता देने की सलाह

फेस्टिवल में बातचीत के दौरान मौसमी ने केवल अपनी बेटी की बात नहीं की, बल्कि युवा महिलाओं को भी अपने जीवन के फैसलों में खुद को प्राथमिकता देने की सलाह दी। उनका कहना था कि बदलते समय में महिलाओं को केवल सामाजिक अपेक्षाओं के अनुसार जीवन नहीं जीना चाहिए। उन्हें अपने फैसलों, पसंद और भविष्य के बारे में भी गंभीरता से सोचना चाहिए।

अभिनेत्री ने इस संदर्भ में मौजूदा सामाजिक सोच पर भी सवाल उठाया। उनके अनुसार, लंबे समय से बेटियों को शादी के बाद ससुराल और परिवार की जिम्मेदारियों के लिए तैयार किया जाता रहा है, जबकि बेटों को समान घरेलू जिम्मेदारियों के लिए उसी तरह तैयार करने पर अपेक्षाकृत कम जोर दिया जाता है। मौसमी ने बदलते दौर में इस सोच पर पुनर्विचार की जरूरत की ओर इशारा किया।

रिश्ता और शादी एक ही फैसला नहीं’

मौसमी चटर्जी की बात का सबसे चर्चित हिस्सा यही रहा कि प्रेम संबंध और विवाह को उन्होंने दो अलग-अलग निर्णयों के रूप में देखने की बात कही। उनके अनुसार, किसी के साथ भावनात्मक रिश्ता होना जरूरी नहीं कि भविष्य में विवाह का अंतिम फैसला भी उसी व्यक्ति के साथ हो। उनका मानना है कि विवाह जैसे महत्वपूर्ण निर्णय में व्यक्ति को अपनी परिस्थितियों और इच्छाओं को समझकर आगे बढ़ना चाहिए।

उनकी यह बात खास तौर पर इसलिए चर्चा में है क्योंकि भारतीय समाज में लंबे समय तक प्रेम संबंधों और विवाह को एक-दूसरे से सीधे जोड़कर देखा जाता रहा है। मौसमी का बयान इस सोच से अलग व्यक्तिगत चुनाव और बदलते सामाजिक नजरिए की बात करता है।

बदलते समय को लेकर मौसमी का संदेश

अभिनेत्री ने बातचीत में समय के बदलाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी पहले की तुलना में अलग परिस्थितियों में बड़ी हो रही है। युवा लोगों पर पढ़ाई, करियर, रिश्तों और सामाजिक अपेक्षाओं का दबाव भी है। ऐसे में अपने लिए समय निकालना और अपनी प्राथमिकताओं को समझना जरूरी हो सकता है।

मौसमी ने महिलाओं से सावधान रहने और अपने हितों के बारे में सोचने की अपील भी की। उनकी बातचीत में यह संदेश प्रमुख रहा कि दूसरों को खुश करने या किसी को कुछ साबित करने के दबाव में जीवन के बड़े फैसले नहीं लेने चाहिए। हालांकि, व्यक्तिगत परिस्थितियां हर व्यक्ति के लिए अलग होती हैं और रिश्तों तथा विवाह से जुड़े फैसले भी व्यक्ति की अपनी पसंद और परिस्थिति पर निर्भर करते हैं।

गीता के ‘परिवर्तन’ वाले संदेश का किया उल्लेख

मौसमी ने अपनी बात समझाते हुए भगवद्गीता में बताए गए परिवर्तन के विचार का भी संदर्भ दिया। उन्होंने समय के साथ सामाजिक परिस्थितियों और सोच में आने वाले बदलाव की ओर ध्यान दिलाया। उनके मुताबिक नई पीढ़ी के लिए जरूरी है कि वह बदलती परिस्थितियों को समझे और पुराने सामाजिक दबावों को बिना सोचे स्वीकार करने के बजाय अपने विवेक से फैसले करे।

निजी अनुभवों ने बदला नजरिया

मौसमी की इस सलाह को उनके जीवन के अनुभवों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। कम उम्र में विवाह और मातृत्व का अनुभव करने के बाद उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में लंबा और सफल करियर बनाया। समय के साथ उनके विचारों में आए बदलाव को वह स्वयं बदलती परिस्थितियों से जोड़ती दिखाई देती हैं। उनकी छोटी बेटी मेघा को दी गई सलाह इसी व्यक्तिगत अनुभव और वर्तमान समय की सामाजिक सोच के बीच एक संवाद के रूप में सामने आई है।

मौसमी चटर्जी का यह बयान भले ही निजी बातचीत का हिस्सा था, लेकिन इसके जरिए रिश्तों और शादी को लेकर एक व्यापक सामाजिक चर्चा फिर शुरू हो गई है। उनकी बात का केंद्र यह है कि जीवन के बड़े फैसले केवल सामाजिक दबाव के आधार पर नहीं, बल्कि समझदारी और व्यक्तिगत पसंद को ध्यान में रखकर लिए जाने चाहिए। यही वजह है कि 2026 के जागरण फिल्म फेस्टिवल से सामने आया उनका यह बयान मनोरंजन जगत के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

नोट: ऊपर का लेख उपलब्ध रिपोर्टों के तथ्यों के आधार पर नए शब्दों और स्वतंत्र संरचना में तैयार किया गया है। मौसमी चटर्जी की उम्र को लेकर कुछ वायरल पोस्टों में अलग-अलग आंकड़े दिए गए हैं; हालिया प्रमुख रिपोर्टों में उनकी उम्र 78 वर्ष बताई गई है।

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