कांग्रेस के समर्थन से बदले बंगाल के राजनीतिक समीकरण

ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। इसके बाद पश्चिम बंगाल में दोनों दल लंबे समय तक एक-दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे। दूसरी ओर

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  • September 21, 2026 10:14 am IST, Published 41 minutes ago

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा उपचुनावों से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। नंदीग्राम में तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी नेतृत्व वाले गुट ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान के समर्थन का ऐलान किया है। इसके साथ ही रेजीनगर में भी ममता गुट के प्रत्याशी द्वारा नामांकन वापस लिए जाने के बाद राज्य में तृणमूल और कांग्रेस के बीच संभावित राजनीतिक तालमेल को लेकर चर्चा बढ़ गई है।

नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। शुरुआत में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने दोनों क्षेत्रों में अपने प्रत्याशी उतारे थे। नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को मैदान में उतारा गया था। बाद में दोनों ने अपना नामांकन वापस ले लिया। रेजीनगर से नामांकन वापस लेने वाले रबीउल आलम चौधरी ने नए नाम और चुनाव चिह्न के साथ मतदाताओं के बीच कम समय में पहुंच बनाने की चुनौती का उल्लेख किया था।

नंदीग्राम में अपने प्रत्याशी के हटने के बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की। उन्होंने कांग्रेस को अपनी ‘सिस्टर पार्टी’ और स्वाभाविक सहयोगी बताया। हालांकि इस समर्थन को लेकर कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रियाएं एक जैसी नहीं रही हैं। ऐसे में नंदीग्राम का घटनाक्रम दोनों दलों के मौजूदा रिश्तों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के बीच संबंधों का इतिहास भी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। इसके बाद पश्चिम बंगाल में दोनों दल लंबे समय तक एक-दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे। दूसरी ओर, राष्ट्रीय राजनीति में दोनों दल कई बार विपक्षी गठबंधन का हिस्सा भी रहे हैं। नंदीग्राम में कांग्रेस प्रत्याशी को मिला समर्थन इसी व्यापक राजनीतिक पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।

उपचुनाव से पहले दोनों दलों के बीच सीटों को लेकर संभावित तालमेल की खबरें भी सामने आई थीं। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि नंदीग्राम में कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन के बदले रेजीनगर में कांग्रेस के पीछे हटने की संभावना पर बातचीत हुई थी। हालांकि कांग्रेस ने दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार बनाए रखे और तृणमूल की ओर से भी ऐसे किसी औपचारिक समझौते से इनकार किया गया था।

इन राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच तृणमूल कांग्रेस के भीतर संगठन और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद भी सामने आया है। चुनाव आयोग की अंतरिम व्यवस्था के तहत ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम के साथ ‘फुटबॉल प्लेयर’ चुनाव चिह्न दिया गया है। वहीं अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चिह्न आवंटित किया गया है। यह व्यवस्था आगामी उपचुनावों के लिए लागू की गई है।

नंदीग्राम में कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन और रेजीनगर से ममता गुट के उम्मीदवार के हटने के बाद अब बंगाल की राजनीति में आगे की रणनीति पर नजर है। फिलहाल दोनों दलों के बीच किसी व्यापक नए गठबंधन की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में 6 अक्टूबर के उपचुनावों से पहले सामने आने वाले फैसले और बयान राज्य में बदलते राजनीतिक समीकरणों की दिशा को लेकर महत्वपूर्ण होंगे।

 

 

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