नई दिल्ली/कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद के बीच पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें आयोग ने दोनों गुटों को मूल पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया था।
चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी कर ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के पारंपरिक दो फूल और घास वाले चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी। यह फैसला पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले आया है।
इसके बाद 18 सितंबर को चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया। वहीं दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया।
चुनाव आयोग के फैसले के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी के पास लंबे समय से यह चुनाव चिह्न रहा है। उन्होंने फैसले का विरोध करते हुए कहा कि वह पीछे नहीं हटेंगी और इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रखेंगी।
ममता बनर्जी की ओर से दायर याचिका में चुनाव आयोग के उस अंतरिम आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत दोनों गुटों को आगामी उपचुनाव में पुराने पार्टी नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है। मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 21 सितंबर को होने की संभावना बताई जा रही है।
चुनाव आयोग के फैसले के बाद आगामी उपचुनाव में दोनों गुट अलग-अलग पहचान के साथ मैदान में उतरेंगे।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ये नाम और चुनाव चिह्न आगामी उपचुनावों के लिए लागू किए गए हैं। पार्टी के नाम और मूल चुनाव चिह्न पर अंतिम निर्णय के लिए आगे की प्रक्रिया जारी रहेगी।
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। दोनों सीटों पर तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी की थी।
ममता बनर्जी के गुट ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, संचिता प्रधान ने शुक्रवार को नंदीग्राम से अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली।
वहीं, दूसरे गुट की ओर से मोहम्मद एतेशामुल हक को नंदीग्राम और सफीउद्दीन शेख को रेजीनगर से उम्मीदवार बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।
अब इस विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर दोनों पक्षों की नजर है। साथ ही, चुनाव आयोग की आगे की प्रक्रिया से यह तय होगा कि पार्टी के मूल नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद का अंतिम प्रशासनिक समाधान किस तरह आगे बढ़ता है।