नई दिल्ली। देश में मानसून की विदाई का दौर शुरू होने वाला है। केरल में 3 जून को दस्तक देने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी शनिवार से शुरू होने की संभावना है। राजस्थान के कुछ हिस्सों में मानसून की वापसी के अनुकूल परिस्थितियां बन गई हैं। इस बीच, इस वर्ष अब तक देश में सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। बारिश का वितरण भी पूरे देश में समान नहीं रहा है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 1 जून से 17 सितंबर के बीच देश में कुल 686.4 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश का आंकड़ा 806.8 मिलीमीटर है। यानी देश में सामान्य से करीब 120 मिलीमीटर कम बारिश हुई है। मानसून की विदाई शुरू होने के साथ अब इस कमी की भरपाई के लिए समय भी सीमित रह गया है।
बारिश की कमी अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग रही है। सबसे अधिक वर्षा वाले राज्यों में शामिल मेघालय में सामान्य से 59 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं अरुणाचल प्रदेश में 41 प्रतिशत, पंजाब में 39 प्रतिशत और बिहार में 36 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।
इसके विपरीत, ओडिशा में सामान्य से करीब 19 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। दिल्ली में सामान्य से 8 प्रतिशत और उत्तराखंड में 4 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है।
हालांकि, सामान्य से 15 प्रतिशत कम बारिश होने का मतलब यह नहीं है कि पूरे देश में सूखे की स्थिति पैदा हो गई है। सूखे का आकलन केवल कुल बारिश के आधार पर नहीं होता। बारिश का क्षेत्रवार वितरण, मिट्टी में नमी और जलाशयों में पानी की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण होती है।
मानसून की विदाई से पहले सितंबर के बचे हुए दिन खरीफ फसलों और आगामी रबी फसल के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि इस दौरान अच्छी बारिश होती है तो वर्षा की कमी की कुछ भरपाई हो सकती है।
बंगाल की खाड़ी में एक मौसम प्रणाली बनने की संभावना है, जिसके कारण अगले कुछ दिनों में देश के पूर्वी हिस्सों में अच्छी बारिश हो सकती है। हालांकि, तेज हवा और आंधी के साथ होने वाली बारिश से पकने की स्थिति में पहुंच चुकी खरीफ फसलों को नुकसान भी हो सकता है।
धान, मक्का, दलहन और तिलहन जैसी फसलों के लिए इस समय होने वाली हल्की बारिश दाने भरने और अंतिम बढ़वार में मददगार हो सकती है। वहीं, जिन क्षेत्रों में लंबे समय से बारिश कम हुई है, वहां मिट्टी में नमी की कमी से उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।
खरीफ की फसल के बाद गेहूं, चना, मसूर और सरसों जैसी रबी फसलों की बोआई शुरू होगी। इसके लिए खेतों में पर्याप्त नमी और सिंचाई के लिए पानी जरूरी होगा।
बिहार, पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और पूर्वोत्तर के कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश हुई है। यदि सितंबर के अंत तक इन क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो मिट्टी में नमी की कमी बनी रह सकती है। इससे रबी फसलों की बोआई और शुरुआती विकास पर असर पड़ने की संभावना है।
सामान्य से कम बारिश:
सामान्य से अधिक बारिश:
मानसून की वापसी के साथ अब किसानों और कृषि क्षेत्र की नजर सितंबर के बाकी दिनों में होने वाली बारिश पर रहेगी। आने वाले दिनों की वर्षा खरीफ फसलों की अंतिम स्थिति के साथ-साथ रबी की बोआई के लिए मिट्टी में नमी और पानी की उपलब्धता को प्रभावित कर सकती है।