दिल्ली : दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी में हिंदी भाषा के प्रति विद्यार्थियों में रुचि, रचनात्मकता और अभिव्यक्ति-कौशल को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत विविध साहित्यिक एवं ज्ञानवर्धक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्रों-शिक्षकों ने दीप प्रज्वलित किया ।कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हिंदी के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने के साथ-साथ विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा को हिंदी माध्यम से अभिव्यक्त करने के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करना रहा।
श्रुति , भूमि ,नंदिनी , प्रिया , सरताज,भूमिका,शिखा ,सृष्टि ,मानसी आदि
छात्रों ने इस अवसर पर निबंध प्रतियोगिता, कविता-वाचन, प्रश्नोत्तरी, आशु-प्रतियोगिता तथा खेल एवं भाषा-पहेली जैसी गतिविधियों में भागीदारी की ।निबंध प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने हिंदी दिवस, मातृभाषा का गौरव, हिंदी और राष्ट्रीय एकता तथा विविधता में एकता जैसे समसामयिक एवं विचारोत्तेजक विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। कविता-वाचन में विद्यार्थियों ने अपनी सृजनात्मक प्रतिभा और प्रभावशाली वाचन-कौशल का परिचय दिया, जबकि प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों के हिंदी भाषा एवं सामान्य ज्ञान को परखने के साथ-साथ उनमें स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित की।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को उनकी उत्कृष्ट सहभागिता एवं प्रदर्शन के लिए पुरस्कार प्रदान किए गए। विजेता एवं प्रतिभागी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए संकाय सदस्यों ने उन्हें भविष्य में भी साहित्यिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का संचालन और समन्वयन डॉ ऋचा ने किया ।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ संजीव राय , विभागाध्यक्ष डॉ सरोज मलिक, डॉ शालू यादव , डॉ नसीरुद्दीन, डॉ राजेश प्रसाद सिंह, डॉ शगुफ्ता , डॉ पारुल गुप्ता आदि की उपस्थिति रही ।साथ ही गैर शैक्षणिक सदस्यों , अंकित , विशाल ,सौरभ आदि ने उत्साहपूर्वक गतिविधियों में सहभागिता की।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि हिंदी केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय समाज की विविध भाषाई एवं सांस्कृतिक परंपराओं के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। हिंदी का समृद्ध साहित्य, लोकभाषाओं से उसका निरंतर संवाद तथा विभिन्न भारतीय भाषाओं से उसका आदान-प्रदान इसकी व्यापकता और जीवंतता को दर्शाता है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में भाषा के प्रति आत्मीयता विकसित करने के साथ-साथ उनकी कल्पनाशक्ति, तार्किक चिंतन और अभिव्यक्ति-कौशल को भी सुदृढ़ करते हैं।
कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों, विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए हुआ। हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत आयोजित यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण में हिंदी के रचनात्मक, संवादात्मक और समावेशी स्वरूप को रेखांकित करने वाला सफल प्रयास रहा।
डॉ संजीव राय
कुल सचिव