यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में रूस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि रूस यूक्रेन युद्ध के लिए 47 देशों के नागरिकों को अपने सैन्य अभियान में इस्तेमाल कर रहा है। जेलेंस्की के मुताबिक, इन देशों में भारत भी शामिल है। उन्होंने कहा कि कई विदेशी नागरिकों को कथित तौर पर नौकरी या अन्य माध्यमों से रूस लाया गया और बाद में युद्ध के मोर्चे पर भेज दिया गया। हालांकि, ये आरोप यूक्रेनी राष्ट्रपति के बयान पर आधारित हैं।
जेलेंस्की ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से संबंधित देशों की सरकारों से अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि दूसरे देशों के लोगों को रूस-यूक्रेन संघर्ष का हिस्सा बनने से रोकना जरूरी है। उनके मुताबिक, युद्ध में विदेशी नागरिकों की भागीदारी बढ़ने से संघर्ष का दायरा भी व्यापक हो सकता है। उन्होंने भारत समेत संबंधित देशों से रूस पर दबाव बढ़ाने की अपील की।
भारत से जुड़े मामले में विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 227 भारतीय नागरिक रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती हुए हैं। इनमें से 139 नागरिकों को रूसी सेना से छुट्टी मिल चुकी है, जबकि 51 लोगों की मौत होने की जानकारी भारत सरकार को मिली है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इस मुद्दे पर पहले बताया था कि भारतीय नागरिकों की रिहाई और वापसी को लेकर रूस के साथ विभिन्न स्तरों पर बातचीत चल रही है। शेष भारतीय नागरिकों को वापस लाने के प्रयास जारी हैं।
जेलेंस्की ने अपने संबोधन में रूस की युद्ध क्षमता और उसकी आर्थिक ताकत को लेकर भी दूसरे देशों से कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि रूस की आय के स्रोतों पर दबाव बढ़ाना युद्ध को जारी रखने की उसकी क्षमता को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने विशेष रूप से भारत, चीन और तुर्किये से रूस के साथ ऊर्जा कारोबार कम करने की अपील की। उनका तर्क था कि रूस की ऊर्जा से होने वाली कमाई में कमी आने पर मॉस्को पर युद्ध समाप्त करने के लिए दबाव बढ़ सकता है।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन पर रूस की सैन्य मदद करने का आरोप लगाया। जेलेंस्की के मुताबिक, उत्तर कोरिया की ओर से रूस को सैनिकों की मदद दी गई है और इसके बदले उसे सैन्य तकनीक हासिल हो रही है। उन्होंने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से संबंधित तकनीकी सहयोग का भी दावा किया। इन दावों का उल्लेख उन्होंने रूस-उत्तर कोरिया के बढ़ते सैन्य संबंधों के संदर्भ में किया।
जेलेंस्की ने यह भी बताया कि यूक्रेन के कब्जे में आए उत्तर कोरियाई सैनिकों का मुद्दा सामने आया है। उनके अनुसार, यूक्रेन ने दो उत्तर कोरियाई युद्धबंदियों को दक्षिण कोरिया भेजा है। उन्होंने कहा कि इन सैनिकों को जिंदा पकड़ना आसान नहीं था और उनका मामला रूस-उत्तर कोरिया सैन्य सहयोग की तस्वीर सामने लाता है।
अपने संबोधन में जेलेंस्की ने रूस के खिलाफ आर्थिक और राजनीतिक दबाव बढ़ाने के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र को लेकर भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर रूस यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर हमले जारी रखता है तो यूक्रेन रूस की ऊर्जा और हीटिंग से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बना सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने के लिए बातचीत और समझौते की कोशिश कर रहा है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच ऊर्जा ढांचे पर हमले दोनों पक्षों के लिए अहम मुद्दा बने हुए हैं। अमेरिका की ओर से संघर्ष के कुछ क्षेत्रों में तनाव कम करने और ऊर्जा सुविधाओं पर हमले रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में जेलेंस्की का संयुक्त राष्ट्र में दिया गया बयान विदेशी लड़ाकों की भागीदारी, रूस की ऊर्जा आय और युद्ध के विस्तार से जुड़े कई मुद्दों को एक साथ सामने लाता है।
भारत के लिए इस पूरे मामले में अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी प्रमुख मुद्दा है। विदेश मंत्रालय के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को रूसी सेना से मुक्त कराया जा चुका है, जबकि बाकी नागरिकों की वापसी के लिए रूस के साथ संपर्क जारी है। जेलेंस्की के बयान के बाद यह मुद्दा एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक मंच पर चर्चा में आया है।