नई दिल्ली। स्वास्थ्य और मोटर बीमा लेने वाले ग्राहकों को आने वाले समय में राहत मिल सकती है। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण यानी इरडा ने बीमा क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और ग्राहकों से वसूले जाने वाले खर्च को कम करने के लिए एजेंटों और वितरकों के कमीशन में कटौती का प्रस्ताव दिया है।
इरडा ने इस संबंध में मसौदा जारी किया है। इसमें स्वास्थ्य बीमा से लेकर मोटर बीमा तक विभिन्न बीमा योजनाओं की बिक्री पर मिलने वाले कमीशन को कम करने की बात कही गई है। इसके साथ ही बीमा की गलत बिक्री पर भी सख्ती का प्रस्ताव है।
इरडा ने संबंधित पक्षों से 25 अक्टूबर तक इस प्रस्ताव पर अपनी राय और सुझाव देने को कहा है।
मसौदे के अनुसार, स्वास्थ्य बीमा की बिक्री पर पहले वर्ष में वितरक को मिलने वाले कमीशन को 40 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। वहीं एजेंट को पहले वर्ष में 20 प्रतिशत कमीशन देने की बात कही गई है।
बीमा के नवीनीकरण के समय वितरक को 5 प्रतिशत और एजेंट को 10 प्रतिशत कमीशन देने का प्रस्ताव रखा गया है। वर्तमान व्यवस्था में नवीनीकरण के दौरान भी कई मामलों में 10 से 15 प्रतिशत तक कमीशन दिया जाता है।
जानकारों के मुताबिक, यदि कमीशन में कटौती लागू होती है तो इसका असर बीमा की लागत पर पड़ सकता है और ग्राहकों को राहत मिल सकती है।
हालांकि, बीमा कंपनियों की ओर से प्रीमियम तय करने में कई अन्य कारक भी शामिल होते हैं। इसलिए कमीशन में कटौती का पूरा लाभ सीधे ग्राहकों तक कितना पहुंचेगा, यह प्रस्ताव लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
इरडा ने मोटर बीमा में भी कमीशन व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। प्रस्ताव के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में मोटर बीमा के प्रीमियम में करीब 34 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि कमीशन में 259 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई।
वित्त वर्ष 2025 में मोटर बीमा के प्रीमियम के रूप में करीब 29 हजार करोड़ रुपये एकत्र किए गए। इनमें से लगभग 7,050 करोड़ रुपये कमीशन के रूप में गए।
इरडा के अनुसार, मोटर बीमा के प्रीमियम में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं है और कुछ मामलों में ग्राहकों से बीमा की राशि का 50 प्रतिशत तक कमीशन लिया गया।
इरडा ने बीमा की गलत बिक्री पर भी सख्ती का प्रस्ताव दिया है। नए प्रस्ताव के तहत ऋण लेते समय ग्राहक को गैर-जरूरी बीमा बेचने पर रोक लगाने की बात कही गई है।
प्राधिकरण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहक को उसकी जरूरत के अनुसार ही बीमा योजना दी जाए और ऋण या अन्य वित्तीय सेवा के साथ उस पर अनावश्यक बीमा खरीदने का दबाव न डाला जाए।
नई कार खरीदने पर कम से कम तीन वर्ष का तृतीय-पक्ष मोटर बीमा अनिवार्य होता है। इसके अलावा वाहन को नुकसान से बचाने के लिए अलग बीमा भी लिया जाता है।
इरडा का प्रस्ताव लागू होने पर मोटर और स्वास्थ्य बीमा के वितरण में कमीशन व्यवस्था में बदलाव आ सकता है। हालांकि, फिलहाल यह प्रस्ताव मसौदा स्तर पर है और संबंधित पक्षों से सुझाव मिलने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।