कटक : पुरी टाइटंस के लिए भारत मसाला ओडिशा T20 लीग – CM Trophy सिर्फ मैच जीतने या ट्रॉफी हासिल करने का मंच नहीं है। फ्रेंचाइजी के सह-मालिक नितेश चौधरी के लिए असली लक्ष्य मैदान की सीमा रेखा से कहीं आगे है—ओडिशा की युवा क्रिकेट प्रतिभाओं को पहचानना, उन्हें तराशना और भारतीय क्रिकेट के उच्चतम स्तर तक पहुंचने का रास्ता तैयार करना।
ओडिशा T20 लीग में शामिल होने के फैसले पर बात करते हुए चौधरी ने कहा, “खिलाड़ी ही हमारे यहां होने की सबसे बड़ी वजह हैं। हम उनके विकास के लिए यहां हैं।”
उनका विजन साफ है—सिर्फ एक सीजन के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के लिए खिलाड़ियों और टीम को तैयार करना।
उड़ीसा के मैदानों से राष्ट्रीय मंच तक
चौधरी का मानना है कि ओडिशा में खेलों के लिए अच्छी सुविधाएं मौजूद हैं और राज्य में युवा प्रतिभाओं की भी कोई कमी नहीं है। जरूरत है तो सिर्फ उन्हें सही अवसर और मंच देने की।
उन्होंने कहा, “ओडिशा ने अलग-अलग खेलों के खिलाड़ियों को बड़ी संख्या में खेल सुविधाएं दी हैं। जब ओडिशा में कोई अच्छी चीज शुरू होती है, तो वह एक अच्छे नाम से शुरू होती है—जय जगन्नाथ।”
उनके मुताबिक, ओडिशा T20 लीग सिर्फ एक घरेलू प्रतियोगिता नहीं, बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए एक लॉन्चपैड बन सकती है।
उन्होंने कहा, “इस तरह की लीग युवा खिलाड़ियों को अगला कदम उठाने का मंच देती हैं। स्काउट्स आते हैं, खिलाड़ियों को देखते हैं, प्रतिभाओं की पहचान करते हैं और उन्हें अगले स्तर तक तेजी से पहुंचने में मदद करते हैं—चाहे वह IPL हो या राष्ट्रीय टीम।”
ग्रासरूट क्रिकेट पर रहेगा खास फोकस
पुरी टाइटंस की नजर सिर्फ स्थापित खिलाड़ियों पर नहीं है। फ्रेंचाइजी ओडिशा के ग्रासरूट क्रिकेट से उभर रही नई प्रतिभाओं को भी तलाशना चाहती है।
चौधरी ने कहा, “आने वाले समय में हम ग्रासरूट खिलाड़ियों के विकास के लिए काम करेंगे। जितना ज्यादा हम युवा खिलाड़ियों पर ध्यान देंगे, उतना ही बेहतर मंच हम उन्हें दे पाएंगे।”
फ्रेंचाइजी क्रिकेट अकादमियों और स्थानीय कार्यक्रमों के जरिए प्रतिभाओं की पहचान करने की दिशा में काम करने की योजना बना रही है।
उन्होंने कहा, “अगर हमारी फ्रेंचाइजी का कोई खिलाड़ी IPL में खेलने का मौका हासिल करता है, तो इससे पुरी और ओडिशा की फ्रेंचाइजी के रूप में हमारी ग्रोथ में भी मदद मिलेगी।”
टीम तैयार करना सामूहिक फैसला
युवा खिलाड़ियों के विकास का लक्ष्य भले ही दीर्घकालिक हो, लेकिन मौजूदा टीम के गठन को लेकर चौधरी ने इसे पूरी मैनेजमेंट और कोचिंग टीम का सामूहिक प्रयास बताया।
उन्होंने कहा, “यह किसी एक व्यक्ति का काम नहीं है। हमारे पास स्टाफ और मैनेजमेंट की पूरी टीम है। हमने मिलकर फैसले लिए और कोचों के साथ लगातार संपर्क में रहे।”
टीम तैयार करते समय टॉप-ऑर्डर बल्लेबाजों, स्पिनरों, तेज गेंदबाजों और ऑलराउंडरों की जरूरत के साथ-साथ ओडिशा की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा गया।
चौधरी ने कहा, “इन्हीं जरूरतों के आधार पर हमने ओडिशा के उन खिलाड़ियों को चुना, जिन्हें हमने सबसे उपयुक्त माना।”
क्रिकेट से आगे: न्यूट्रिशन और वेलनेस पर भी जोर
चौधरी के लिए खिलाड़ियों का विकास सिर्फ तकनीकी कौशल और मैदान पर प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। उनके अपने खेल के अनुभव ने उन्हें न्यूट्रिशन, फिटनेस और वेलनेस की अहमियत समझाई है।
पूर्व फुटबॉलर रहे चौधरी ने कहा, “मैं खुद एक खिलाड़ी रहा हूं, इसलिए जानता हूं कि खिलाड़ियों के लिए न्यूट्रिशन और वेलनेस कितना महत्वपूर्ण है।”
फ्रेंचाइजी की Livya Wellness के साथ साझेदारी के जरिए खिलाड़ियों को उचित न्यूट्रिशन और वेलनेस सपोर्ट उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “मैं खिलाड़ियों को ऐसा प्लेटफॉर्म देना चाहता हूं, जहां वे सही न्यूट्रिशन और वेलनेस सपोर्ट से जुड़ सकें और लगातार आगे बढ़ सकें।”
भविष्य के लिए बड़ा वादा
पुरी टाइटंस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी महत्वाकांक्षा शायद यही है कि फ्रेंचाइजी आने वाले वर्षों में भारतीय क्रिकेट के लिए एक खिलाड़ी तैयार करे।
चौधरी ने कहा, “हम वादा करते हैं कि आने वाले वर्षों में हम कम से कम एक ऐसा खिलाड़ी तैयार करेंगे, जो भारतीय क्रिकेट के सर्वोच्च स्तर तक पहुंच सके।”
यह महत्वाकांक्षा पुरी टाइटंस के प्रोजेक्ट को सिर्फ एक सीजन की प्रतियोगिता से आगे ले जाती है—ओडिशा के ग्रासरूट मैदानों से भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े मंच तक।
स्कोरबोर्ड आज की कहानी बता सकता है, लेकिन पुरी टाइटंस की असली कहानी कल के सितारे तैयार करने की है।
फ्रेंचाइजी के लिए सफलता का पैमाना सिर्फ यह नहीं होगा कि इस सीजन में कितनी ट्रॉफियां जीती गईं। असली सवाल यह भी होगा कि कितने युवा खिलाड़ियों को यहां से एक बड़े मंच तक पहुंचने का मौका मिला।