नयी दिल्ली: प्रख्यात पत्रकार, प्रज्ञा संस्थान के संस्थापक न्यासी और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय के 80 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, एसजीटी विश्वविद्यालय के प्रबंध न्यासी मनमोहन चावला,राजस्थान पत्रिका के संपादक गुलाब सिंह कोठारी, सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। इस दौरान रामबहादुर राय को उनके दीर्घ पत्रकारिता जीवन और सार्वजनिक सरोकारों के लिए सम्मानित किया गया।
समारोह के दौरान रामबहादुर राय के जीवन और पत्रकारिता पर केंद्रित पुस्तक ‘अस्सी के राय साहब’ का भी लोकार्पण किया गया। पुस्तक का विमोचन राजनाथ सिंह, भूपेंद्र यादव और वरिष्ठ पत्रकार बनवारी जी ने किया। पुस्तक में राय के लंबे पत्रकारिता जीवन, विचारों और सामाजिक सरोकारों से जुड़े पहलुओं को सामने रखा गया है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने रामबहादुर राय की पत्रकारिता यात्रा और उनके सिद्धांतों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि राय साहब ने लंबे समय तक पत्रकारिता के मूल्यों के साथ खड़े रहकर अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके मुताबिक लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वतंत्र और सक्षम पत्रकारिता जरूरी है। राजनाथ सिंह ने कहा कि पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं है, बल्कि समाज और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम भी है।
राजनाथ सिंह ने राय की कार्यशैली का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी प्रतिबद्धता को लगातार कायम रखा। उन्होंने राय की तुलना साहित्य और भारतीय परंपरा से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्वों के गुणों से करते हुए उनकी भाषा, विचार और अभिव्यक्ति की विशेषताओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि राय शब्दों के साधक हैं और उनके लिए पत्रकारिता जनसेवा का एक अवसर रही है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि रामबहादुर राय के सामने सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ने के दूसरे विकल्प भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने पत्रकारिता को ही अपनी कर्मभूमि बनाया। उन्होंने कहा कि राय साहब ने पत्रकारिता के क्षेत्र में बुनियादी स्तर से काम करते हुए अपनी लंबी यात्रा तय की। राजनाथ सिंह के अनुसार राय साहब की पत्रकारिता कई मौकों पर अपने विचारधारा से जुड़े लोगों से भी सवाल करती रही है। उनके इस पक्ष को लोकतांत्रिक विमर्श में असहमति के महत्व से जोड़कर देखा गया।
समारोह में यह भी कहा गया कि पत्रकारिता का मूल दायित्व सत्य के साथ खड़ा होना, असहमति के अधिकार का सम्मान करना और समाज के प्रति जिम्मेदार रहना है। रामबहादुर राय के आठ दशकों के जीवन और उनके सार्वजनिक कार्यों का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने निष्पक्षता, निर्भीकता और नैतिक प्रतिबद्धता जैसे मूल्यों को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि इंटरनेट और सोशल मीडिया ने सूचना के प्रसार की गति को कई गुना बढ़ा दिया है। अब खबरें बहुत कम समय में बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंच जाती हैं। हालांकि, इस तेजी के साथ सूचना की विश्वसनीयता बनाए रखने की चुनौती भी बढ़ी है। ऐसे दौर में पत्रकारों के लिए तथ्य, सत्यापन और सामाजिक जिम्मेदारी का महत्व पहले से अधिक हो गया है।
वक्ताओं ने कहा कि रामबहादुर राय का पत्रकारिता जीवन ऐसे समय में भी प्रासंगिक है, जब सूचना के कई माध्यम मौजूद हैं और पाठकों के सामने बड़ी मात्रा में सामग्री उपलब्ध है। उनके लंबे अनुभव से पत्रकारिता में विचार, अनुशासन और विश्वसनीयता की भूमिका को समझा जा सकता है।

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपने संबोधन में रामबहादुर राय के संघर्ष और जमीनी अनुभवों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राय ने धरातल से जुड़े मुद्दों और संघर्षों को करीब से देखा है और इन्हीं अनुभवों के आधार पर अपनी पत्रकारिता को दिशा दी। यादव ने कहा कि राय ने पत्रकारिता में लगातार सत्य से जुड़े सवाल उठाए और अपने विचारों को स्पष्टता के साथ सामने रखा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार बनवारी जी ने की। उन्होंने रामबहादुर राय के व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। बनवारी जी ने कहा कि राय के व्यक्तित्व में विनम्रता, अनुशासन और निष्ठा दिखाई देती है। उन्होंने भारतीय परंपरा में शील और विनय के महत्व का उल्लेख करते हुए राय के व्यक्तित्व को इन मूल्यों से जोड़ा।
बनवारी जी ने कहा कि रामबहादुर राय के व्यक्तित्व में राजनीतिक समझ भी रही है, लेकिन पत्रकार के रूप में उन्होंने पत्रकारिता की मर्यादाओं का पालन किया। उन्होंने राय की सादगी और सहजता का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके व्यक्तित्व में किसी प्रकार का दिखावा नहीं है और अंत में कहा की उनके अंदर किसी तरह का साहब का भाव नहीं है। समारोह में मौजूद वक्ताओं ने राय के आठ दशक के जीवन को पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन से जुड़े अनुभवों की लंबी यात्रा के रूप में रेखांकित किया ।
‘अस्सी के राय साहब’ पुस्तक के लोकार्पण के साथ समारोह में रामबहादुर राय के जीवन और पत्रकारिता पर व्यापक चर्चा हुई। वक्ताओं ने उनके कार्यों को पत्रकारिता में मूल्यों, सामाजिक सरोकार और सार्वजनिक जिम्मेदारी के संदर्भ में याद किया। समारोह का केंद्र राय का आठ दशक लंबा जीवन रहा, जिसमें पत्रकारिता के विभिन्न दौर और बदलते मीडिया परिवेश के अनुभव शामिल रहे हैं।