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रेलवे ने बदले मार्ग के आदेश वापस लिए, ट्रेनें अब निर्धारित रूट पर चलेंगी

इससे पहले यात्रियों की सुविधा और परिचालन व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने कई ट्रेनों के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं की घोषणा की थी। इनमें कुछ ट्रेनों को दूसरे रास्ते से चलाना, कुछ को सीमित दूरी तक संचालित करना और कुछ के समय में बदलाव शामिल था...

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Gauravshali Bharat News
  • September 27, 2026 11:00 am IST, Published 1 hour ago

उत्तर प्रदेश में रेल यात्रियों के लिए राहत की खबर है। गोरखपुर-गोंडा रेलखंड पर प्रस्तावित नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य को रेलवे ने रद्द कर दिया है। इसके साथ ही इस काम के चलते ट्रेनों के संचालन में किए जाने वाले बदलाव से संबंधित पहले जारी आदेश भी वापस ले लिए गए हैं। अब यात्रियों को ट्रेनों के बदले हुए मार्ग से सफर नहीं करना पड़ेगा और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार ही ट्रेनों का संचालन किया जाएगा।

रेलवे की ओर से गोरखपुर-गोंडा रेलखंड के छपिया, मसकनवा, लखपतनगर और मनकापुर के बीच नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य प्रस्तावित किया गया था। इस कार्य का उद्देश्य रेलखंड पर ऑटोमेटिक सिगनलिंग प्रणाली की कमीशनिंग से जुड़ी प्रक्रिया को पूरा करना था। काम के दौरान रेल यातायात को सुरक्षित ढंग से संचालित करने के लिए कई ट्रेनों के मार्ग में बदलाव, कुछ ट्रेनों को आंशिक रूप से समाप्त करने या उनके प्रारंभिक स्टेशन में परिवर्तन करने और कुछ ट्रेनों के समय में संशोधन की योजना बनाई गई थी।

अब प्रस्तावित कार्य रद्द होने के बाद रेलवे ने इन सभी परिचालन संबंधी बदलावों को भी स्थगित कर दिया है। यानी जिन ट्रेनों को पहले वैकल्पिक मार्ग से चलाने का फैसला लिया गया था, वे अब अपने निर्धारित मार्ग पर ही चलेंगी। यात्रियों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि मार्ग परिवर्तन की स्थिति में कई ट्रेनों के यात्रा समय में बढ़ोतरी होने के साथ-साथ बीच के स्टेशनों पर ठहराव और परिचालन व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती थी।

रेलवे ने शॉर्ट टर्मिनेशन और शॉर्ट ओरिजिनेशन से संबंधित आदेश भी वापस ले लिए हैं। इसका मतलब है कि जिन ट्रेनों को पहले किसी स्टेशन से पहले ही समाप्त करने या किसी अन्य स्टेशन से शुरू करने की योजना बनाई गई थी, अब उनके परिचालन को लेकर पहले वाली व्यवस्था लागू नहीं होगी। इसी तरह ट्रेनों के पुनर्निर्धारण से संबंधित पूर्व में जारी आदेश भी स्थगित कर दिए गए हैं।

रेलवे के इस फैसले से गोरखपुर, गोंडा और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को राहत मिलेगी। इस रेलखंड से प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री विभिन्न शहरों की यात्रा करते हैं। गोरखपुर और गोंडा के बीच रेल संपर्क पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ दूसरे क्षेत्रों के लिए भी महत्वपूर्ण है। किसी बड़े तकनीकी कार्य के दौरान ट्रेनों के संचालन में बदलाव का सीधा असर दैनिक यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और अन्य यात्रियों पर पड़ता है।

ऑटोमेटिक सिगनलिंग प्रणाली रेलवे के सुरक्षित और अधिक कुशल परिचालन से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीक है। इसके माध्यम से रेलखंड पर ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने और परिचालन क्षमता को बेहतर करने में मदद मिलती है। हालांकि, इस व्यवस्था की कमीशनिंग के लिए प्रस्तावित नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य फिलहाल रद्द कर दिया गया है। रेलवे भविष्य में इस कार्य को किस समय और किस संशोधित कार्यक्रम के तहत करेगा, इसकी जानकारी बाद में जारी की जा सकती है।

इससे पहले यात्रियों की सुविधा और परिचालन व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने कई ट्रेनों के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं की घोषणा की थी। इनमें कुछ ट्रेनों को दूसरे रास्ते से चलाना, कुछ को सीमित दूरी तक संचालित करना और कुछ के समय में बदलाव शामिल था। अब मुख्य कार्य ही रद्द हो जाने के कारण इन व्यवस्थाओं की आवश्यकता नहीं रह गई है।

यात्रियों को सलाह दी जाती है कि यात्रा से पहले अपनी ट्रेन के समय और संचालन की स्थिति की जानकारी रेलवे के आधिकारिक माध्यमों से जरूर जांच लें। किसी तकनीकी या प्रशासनिक बदलाव की स्थिति में रेलवे की ओर से नई सूचना जारी की जा सकती है।

फिलहाल गोरखपुर-गोंडा रेलखंड पर प्रस्तावित नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य रद्द होने के साथ ट्रेनों के मार्ग परिवर्तन, शॉर्ट टर्मिनेशन, शॉर्ट ओरिजिनेशन और पुनर्निर्धारण से जुड़े आदेश भी स्थगित कर दिए गए हैं। इससे संबंधित ट्रेनों का संचालन अब पूर्व निर्धारित व्यवस्था के अनुसार किए जाने की उम्मीद है।

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