प्रयागराज: भारतीय रेलवे में कर्मचारियों की कमी से निपटने और जरूरी सेवाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए सेवानिवृत्त कर्मचारियों की संविदा पर दोबारा नियुक्ति की व्यवस्था को आगे बढ़ा दिया गया है। रेलवे बोर्ड ने इस योजना की अवधि में दो साल का विस्तार किया है। अब जरूरत पड़ने पर पात्र सेवानिवृत्त रेलकर्मियों को 15 अक्टूबर 2028 तक संविदा के आधार पर दोबारा जिम्मेदारी दी जा सकेगी। इस संबंध में रेलवे बोर्ड की ओर से सभी जोनल रेलवे के महाप्रबंधकों और उत्पादन इकाइयों को निर्देश जारी किए गए हैं।
रेलवे में बड़ी संख्या में पद खाली होने के कारण कई विभागों के नियमित कामकाज पर दबाव बना रहता है। ऐसे में अनुभवी सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सेवाओं का सीमित अवधि के लिए इस्तेमाल करने की व्यवस्था पहले से लागू है। इसके तहत विशेष परिस्थितियों में गैर-राजपत्रित पदों, रेलवे अस्पतालों और डिस्पेंसरियों में पैरामेडिकल स्टाफ तथा केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षक और वरिष्ठ प्रशिक्षक के रिक्त पदों को भरा जा सकता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य तत्काल जरूरत वाले पदों पर अनुभवी कर्मियों की सेवाएं लेकर कामकाज में बाधा को कम करना है।
रेलवे बोर्ड के पहले के निर्देशों के अनुसार इस योजना की मौजूदा अवधि 15 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित थी। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद व्यवस्था खत्म होने की स्थिति थी। हालांकि, रेलवे मंत्रालय ने योजना की समीक्षा करने के बाद इसे आगे जारी रखने का फैसला किया है। संशोधित व्यवस्था के तहत अब इसकी वैधता 15 अक्टूबर 2028 तक रहेगी। इसका मतलब है कि अगले दो वर्षों के दौरान रेलवे के संबंधित विभागों में जरूरत पैदा होने पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों की संविदा नियुक्ति की जा सकेगी।
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दोबारा सेवा में लेना कोई सामान्य या स्वचालित प्रक्रिया नहीं होगी। ऐसी नियुक्तियां केवल वास्तविक आवश्यकता और आपात स्थिति में ही की जाएंगी। संबंधित अधिकारियों को नियुक्ति से पहले मामले की जरूरत, कर्मचारी की उपयुक्तता और अन्य निर्धारित मानकों की जांच करनी होगी। यानी खाली पद होने मात्र से सेवानिवृत्त कर्मचारी की संविदा नियुक्ति का अधिकार स्वतः नहीं बन जाएगा।
संविदा पर वापस आने वाले कर्मचारियों के मानदेय, भत्तों और अवकाश से जुड़े नियम उनकी पेंशन व्यवस्था के आधार पर तय किए जाएंगे। पुरानी पेंशन योजना के अंतर्गत आने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए भुगतान और अन्य सेवा शर्तें वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की ओर से 9 दिसंबर 2020 को जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप निर्धारित की जाएंगी। दूसरी ओर राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए मानदेय और सेवा संबंधी शर्तें वित्त मंत्रालय के 18 अक्टूबर 2023 के आदेश के आधार पर लागू होंगी।
रेलवे बोर्ड ने पहले से तय किए गए कुछ मामलों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। ऐसे मामले जिनमें अलग व्यवस्था के तहत पहले ही निर्णय लिया जा चुका है, उन्हें सामान्य कार्यकाल पूरा होने तक या 15 अक्टूबर 2026 तक दोबारा नहीं खोला जाएगा। इसके बाद आगे की व्यवस्था संबंधित नियमों के अनुसार लागू होगी। बोर्ड ने यह भी कहा है कि योजना से जुड़े बाकी नियम और शर्तें पहले की तरह ही प्रभावी रहेंगी।
रेलवे में तकनीकी, परिचालन, चिकित्सा और प्रशिक्षण से जुड़े कामों के लिए अनुभवी कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सीमित अवधि के लिए वापस लेने की व्यवस्था से ऐसे विभागों में तत्काल उपलब्ध विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, रेलवे बोर्ड ने नियुक्तियों को जरूरत आधारित रखने और निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही करने पर जोर दिया है।
इस विस्तार के बाद जोनल रेलवे और उत्पादन इकाइयों को आने वाले दो वर्षों में आवश्यकतानुसार संविदा नियुक्तियों का विकल्प उपलब्ध रहेगा। संबंधित इकाइयों को खाली पदों और काम की वास्तविक जरूरत का आकलन करते हुए ही सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सेवाएं लेने का निर्णय करना होगा। इस तरह रेलवे ने एक ओर अनुभवी मानव संसाधन के इस्तेमाल का रास्ता खुला रखा है, वहीं दूसरी ओर नियुक्तियों को आवश्यकता और निर्धारित वित्तीय एवं प्रशासनिक नियमों से जोड़कर रखा है।