1107 लाख हेक्टेयर में हुई खेती, सामान्य औसत से ज्यादा रकबा; रबी फसलों पर भी संकट की आशंका
नई दिल्ली। देश में इस साल खरीफ फसलों की कुल बुआई का रकबा पिछले साल की तुलना में 1 प्रतिशत से अधिक घटा है। हालांकि, मानसून की कमी को देखते हुए इस गिरावट का अनुमान पहले से ही लगाया जा रहा था। इसके बावजूद इस बार खरीफ फसलों की कुल बुआई पिछले पांच वर्षों के सामान्य औसत से अधिक दर्ज की गई है।
कृषि क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक, किसानों को अगर समय रहते मौसम की सही जानकारी और चेतावनी मिल जाए, तो वे मौसम के अनुसार अपनी बुआई की रणनीति में बदलाव कर सकते हैं।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार तक देश में करीब 1,107 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई हो चुकी है। यह सामान्य रकबे 1,104 लाख हेक्टेयर से करीब 3 लाख हेक्टेयर अधिक है।
यह स्थिति तब सामने आई है, जब 1 जून से 26 सितंबर के बीच देश में मानसूनी बारिश सामान्य से 12 प्रतिशत कम रही। इसके मुकाबले 2025 की इसी अवधि में सामान्य से 8 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई थी और उस समय खरीफ फसलों का कुल बुआई क्षेत्र 1,121 लाख हेक्टेयर रहा था।
खरीफ मौसम की प्रमुख और अधिक पानी की जरूरत वाली फसल धान के बुआई क्षेत्र में पिछले साल के मुकाबले 3.6 प्रतिशत की कमी आई है। हालांकि, धान का कुल रकबा अभी भी सामान्य औसत से 4.6 प्रतिशत अधिक है।
इसी तरह गन्ने की बुआई का क्षेत्र भी सामान्य औसत से अधिक रहा है। इससे संकेत मिलता है कि किसान बेहतर आमदनी की उम्मीद वाली फसलों को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि, अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों के लिए भूजल पर निर्भरता बढ़ने से जल संसाधनों पर दबाव बढ़ने की चिंता भी बनी हुई है।
मानसून की कमी का वास्तविक असर खरीफ फसलों की पैदावार पर दिखाई दे सकता है। इसके शुरुआती अनुमान जल्द ही केंद्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से जारी किए जाने की उम्मीद है।
मध्य भारत और बिहार के उन क्षेत्रों में स्थिति अधिक चिंता का विषय है, जहां सिंचाई के पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं और खेती काफी हद तक बारिश पर निर्भर रहती है। इन इलाकों में बारिश की कमी और असमान वितरण से दलहन, तिलहन, कपास और मोटे अनाज के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।
इसके अलावा बिहार और असम के कुछ हिस्सों में आई बाढ़ तथा महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसे हालात भी कुल कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं।
कम बारिश के कारण मिट्टी में नमी की कमी और सिंचाई के पानी की संभावित किल्लत को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसका असर आगामी रबी फसलों पर पड़ सकता है।
इसी को देखते हुए केंद्रीय कृषि मंत्रालय सोमवार से शुरू होने वाली दो दिवसीय उच्चस्तरीय बैठक में आकस्मिक कृषि योजना पर चर्चा करेगा। बैठक में कम बारिश, पानी की उपलब्धता और रबी फसलों के लिए संभावित चुनौतियों से निपटने की तैयारियों पर विचार किया जाएगा।