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ECI की पारदर्शिता पर प्रशांत किशोर ने उठाए गंभीर सवाल

आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका की भी वकालत की। उनका मानना है कि नियुक्ति प्रक्रिया में न्यायपालिका की भागीदारी बढ़ने से चुनाव आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता और लोगों के भरोसे को मजबूत करने में मदद मिल सकती है

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Gauravshali Bharat News
  • September 28, 2026 10:36 am IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन करते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी व्यवस्था में व्यापक बदलाव की जरूरत बताई है। किशोर ने कहा कि केवल एक व्यक्ति को पद से हटाने या बदलने से चुनाव प्रक्रिया में भरोसा बहाल नहीं होगा। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग की पारदर्शिता और विश्वसनीयता के लिए पूरी व्यवस्था में सुधार जरूरी है।

प्रशांत किशोर ने चुनाव सुधारों के संदर्भ में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के कार्यकाल का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए उसी तरह के संस्थागत सुधारों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की साख किसी एक रिपोर्ट के कारण प्रभावित नहीं हुई है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में आयोग के फैसलों और उसके काम करने के तरीके को लेकर उठे सवालों ने यह बहस पैदा की है।

प्रशांत किशोर ने मतदाता सूची, आदर्श आचार संहिता और चुनाव कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मामलों में चुनाव आयोग के फैसलों पर भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में होने की छाप दिखाई देती है। हालांकि, ये किशोर के राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।  चुनाव सुधारों को लेकर किशोर ने कुछ ठोस सुझाव भी रखे। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को तकनीक का ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए और ऐसी मतदाता सूची उपलब्ध करानी चाहिए, जिसे मशीन के जरिए आसानी से पढ़ा और जांचा जा सके।

किशोर ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका की भी वकालत की। उनका मानना है कि नियुक्ति प्रक्रिया में न्यायपालिका की भागीदारी बढ़ने से चुनाव आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता और लोगों के भरोसे को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। उनके अनुसार, चुनावी संस्थाओं में पारदर्शिता केवल किसी एक अधिकारी के इस्तीफे से नहीं, बल्कि नियुक्ति, मतदाता सूची, मतदान और मतगणना से जुड़े पूरे तंत्र में सुधार से आएगी।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के मुद्दे पर विपक्षी दलों की प्रस्तावित बैठक को लेकर पूछे जाने पर किशोर ने कहा कि उन्हें इसमें विशेष रुचि नहीं है। उन्होंने अपनी राजनीतिक भूमिका को फिलहाल बिहार तक सीमित बताया और कहा कि देश से जुड़े बड़े मुद्दों पर बड़े राजनीतिक दल अपनी भूमिका निभा सकते हैं। इससे संकेत मिलता है कि जन सुराज फिलहाल राष्ट्रीय विपक्षी राजनीति की बजाय अपने संगठन और क्षेत्रीय विस्तार पर ज्यादा ध्यान दे रहा है।

इसी बीच प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने दिल्ली में संगठन विस्तार की संभावनाओं पर काम शुरू कर दिया है। हाल में दिल्ली में पार्टी से जुड़े समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक हुई, जिसमें राजधानी में संगठन खड़ा करने और भविष्य में चुनावी भागीदारी को लेकर चर्चा हुई। पार्टी से जुड़े लोगों की ओर से दिल्ली में औपचारिक इकाई बनाने की मांग भी सामने आई है।

दिल्ली नगर निगम चुनाव में उतरने को लेकर किशोर ने तत्काल अंतिम फैसला घोषित नहीं किया है। उनका कहना है कि किसी दूसरे राज्य में संगठन बनाने से पहले वहां की स्थानीय समस्याओं को समझना और उनके समाधान का ठोस खाका तैयार करना जरूरी है। दिल्ली में भी संगठन और चुनावी रणनीति पर विचार के बाद निर्णय लेने की बात कही गई है। फिलहाल राजधानी में जन सुराज से जुड़े लोगों का मंच एनआरबी यानी नॉन रेजिडेंट बिहारी के रूप में सक्रिय है। पार्टी के दिल्ली विस्तार की चर्चा प्रशांत किशोर की बांकीपुर उपचुनाव जीत के बाद तेज हुई है।

 

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