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TMC नाम-चिह्न विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की समयसीमा तय की

पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में चुनाव आयोग के उस अंतरिम फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत दोनों पक्षों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए गए हैं।

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Supreme Court
Gauravshali Bharat News
  • September 28, 2026 3:15 pm IST, Published 2 hours ago

सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद पर फैसला लेने के लिए चुनाव आयोग को चार महीने का समय दिया है। अदालत ने कहा कि पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर बनी स्थिति को अनिश्चित अवधि तक जारी नहीं रखा जा सकता। आयोग को तय समयसीमा के भीतर दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए मामले का निपटारा करना होगा। यदि किसी वजह से चार महीने में फैसला लेना संभव नहीं होता है, तो चुनाव आयोग अदालत का रुख कर सकता है।

यह विवाद टीएमसी के नाम और उसके पारंपरिक ‘घास-फूल’ चुनाव चिह्न पर अधिकार को लेकर दो गुटों के बीच चल रहा है। मामले में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में चुनाव आयोग के उस अंतरिम फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत दोनों पक्षों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि पार्टी का मूल नाम और चुनाव चिह्न बनाए रखने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने अदालत के सामने कहा कि मामला पार्टी के राजनीतिक अस्तित्व से जुड़ा है और इस पर उचित राहत दी जानी चाहिए। हालांकि, अदालत ने विवाद के अंतिम समाधान की जिम्मेदारी चुनाव आयोग पर ही रखी है।

चुनाव आयोग ने फिलहाल उपचुनावों को ध्यान में रखते हुए अंतरिम व्यवस्था की है। इसके तहत ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता टीएमसी’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है। वहीं, दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक टीएमसी’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। यह व्यवस्था तब तक लागू रहने वाली है, जब तक आयोग मूल विवाद पर अंतिम फैसला नहीं करता।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव आयोग से मामले को जल्द सुलझाने की जरूरत पर जोर दिया। अदालत के सामने यह भी बताया गया कि नवंबर में प्रस्तावित निगम चुनावों पर विवाद का असर पड़ सकता है। ममता बनर्जी गुट की ओर से कहा गया कि यदि मूल नाम और चुनाव चिह्न को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती है, तो चुनावी तैयारियों पर असर पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को चार महीने में प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। साथ ही, आयोग को यह स्वतंत्रता दी गई है कि यदि निर्धारित अवधि में किसी कानूनी या प्रक्रियात्मक कारण से फैसला लेना संभव नहीं हो पाता है, तो वह अदालत से अतिरिक्त निर्देश मांग सकता है।

इस मामले में आगे की कार्यवाही चुनाव आयोग की सुनवाई और दोनों पक्षों की दलीलों पर निर्भर करेगी। आयोग को यह तय करना होगा कि पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर किस पक्ष का दावा नियमों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर स्वीकार किया जा सकता है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद विवाद के अंतिम समाधान के लिए समयसीमा तय हो गई है।

 

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