काठमांडू/मनांग। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के बीच भूस्खलन की एक भयावह घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। मनांग जिले के चामे गांव का बताया जा रहा यह वीडियो प्राकृतिक आपदा के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के सामने आने वाले खतरों को उजागर करता है। वीडियो में एक मकान के आसपास की जमीन अचानक धंसती दिखाई देती है। कुछ ही पलों में मकान और उसके आसपास की जमीन का बड़ा हिस्सा नीचे की ओर खिसक जाता है।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो के अनुसार, यह घटना मनांग जिले के चामे गांव में लगातार बारिश के बीच हुई। हालांकि, वीडियो की सटीक तारीख, मकान के मालिक और घटना में किसी के हताहत होने की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
देखते ही देखते जमीन में समाया मकान
वायरल वीडियो में पहाड़ी क्षेत्र में स्थित एक मकान और उसके आसपास का प्राकृतिक वातावरण दिखाई देता है। मकान के नजदीक पानी की टंकी और कुछ घरेलू सामान भी नजर आ रहे हैं।
अचानक मकान के आसपास की जमीन खिसकने लगती है। भूस्खलन के कारण मकान का आधार प्रभावित होता है और देखते ही देखते जमीन का बड़ा हिस्सा धंस जाता है। यह दृश्य पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन से उत्पन्न होने वाले गंभीर खतरों को दर्शाता है।
लगातार बारिश से पांच मकान बहने की खबर
नेपाल के स्थानीय समाचार माध्यमों की 27 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, मनांग जिले के मुख्यालय चामे और आसपास के इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन से व्यापक नुकसान हुआ है। स्थानीय लोगों ने पांच मकान बहने की जानकारी दी है।
ठाडो खोला और मर्स्याङ्दी नदी में आई बाढ़ के कारण कई बस्तियों में कीचड़ और मलबा भर गया। चामे के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी छोइदेन यांगचेन लामा के अनुसार, प्रभावित क्षेत्र में चार से पांच मकान बह गए, लेकिन उस समय किसी के हताहत होने की सूचना नहीं थी।
जान बचाने के लिए जंगल की ओर भागे ग्रामीण
बाढ़ और भूस्खलन के कारण चामे के निवासियों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा। कई ग्रामीणों ने जंगल और ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में शरण ली। बच्चों और बुजुर्गों सहित प्रभावित परिवारों को मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, बाढ़ से दो लकड़ी के पुल भी बह गए और सड़क संपर्क बाधित हो गया। इसके चलते प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो गया। विस्थापित लोगों और फंसे हुए यात्रियों के लिए भोजन, गर्म कपड़ों तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की कमी की खबरें भी सामने आईं।
मर्स्याङ्दी नदी का रास्ता रुका, बढ़ा बाढ़ का खतरा
27 सितंबर की शाम चामे में भूस्खलन का मलबा मर्स्याङ्दी नदी में गिरने से पानी का प्रवाह बाधित हो गया। नदी में मलबा जमा होने के कारण अस्थायी झील जैसी स्थिति बन गई।
जिला प्रशासन ने नदी के निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी जारी की। अधिकारियों को आशंका थी कि यदि जमा हुआ पानी अचानक बाहर निकला तो निचले इलाकों में तेज बाढ़ आ सकती है। प्रशासन ने लोगों को अनावश्यक रूप से नदी के किनारे नहीं जाने की सलाह दी।
28 सितंबर को हालात में सुधार, घर लौटने लगे लोग
28 सितंबर 2026 को प्रकाशित समाचार रिपोर्टों के अनुसार, बारिश कम होने और मौसम साफ होने के बाद चामे में स्थिति धीरे-धीरे सुधरने लगी। मर्स्याङ्दी नदी का जलस्तर लगभग एक मीटर कम हो गया। इसके बाद जंगलों और अन्य सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने वाले कुछ परिवार अपने घरों की ओर लौटने लगे।
मनांग जिला पुलिस कार्यालय के कार्यवाहक प्रमुख विनोद बोहरा ने बताया कि सोमवार सुबह से स्थिति में सुधार हो रहा था। हालांकि, नदी के आसपास जमा मलबे और अस्थिर जमीन के कारण खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ था।
पहाड़ी क्षेत्रों में क्यों होता है भूस्खलन?
नेपाल के हिमालयी क्षेत्रों में खड़ी पहाड़ियां, कमजोर चट्टानें और भारी वर्षा भूस्खलन के खतरे को बढ़ाती हैं। लगातार बारिश के दौरान पानी मिट्टी की परतों में प्रवेश करता है, जिससे ढलानों की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
जब पहाड़ी ढलान पर मिट्टी और चट्टानों का भार उन्हें स्थिर रखने वाली ताकत से अधिक हो जाता है, तो जमीन अचानक खिसक सकती है। ऐसी घटनाओं में मकानों, सड़कों, पुलों और कृषि भूमि को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जमीन में नई दरारें दिखाई देना, पेड़ों का अचानक झुकना और ढलान से मिट्टी या पत्थरों का गिरना खतरे के संकेत हो सकते हैं। ऐसे संकेत दिखाई देने पर सुरक्षित स्थान पर जाना और स्थानीय प्रशासन को सूचना देना जरूरी है।
वायरल वीडियो ने दिखाई प्राकृतिक आपदा की भयावहता
मनांग में सामने आए भूस्खलन के वीडियो ने एक बार फिर यह दिखाया है कि प्राकृतिक आपदा के दौरान परिस्थितियां कितनी तेजी से बदल सकती हैं। किसी मकान के आसपास जमीन धंसने की स्थिति में वहां खड़े लोगों के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
इस तरह की घटनाओं में वीडियो बनाने के लिए भूस्खलन के नजदीक जाना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि जमीन का दूसरा हिस्सा भी बिना चेतावनी के खिसक सकता है।
नेपाल में हुई इस घटना से पहाड़ी क्षेत्रों में समय रहते चेतावनी, सुरक्षित निकासी, मजबूत संचार व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की तैयारियों का महत्व सामने आया है। प्रभावित क्षेत्रों में हालात सुधरने के बावजूद अस्थिर ढलानों और नदी के आसपास सतर्कता बनाए रखना आवश्यक है।