नयी दिल्ली: भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थान है और उसके कामकाज को लेकर राजनीतिक बहस के बीच संस्था की भूमिका को समझना जरूरी है। ईरानी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पार्टी चुनाव आयोग को लगातार निशाना बना रही है, क्योंकि उसे जनता के बीच अपने राजनीतिक समर्थन को लेकर निराशा है।
स्मृति ईरानी ने कांग्रेस के हालिया बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी के नेतृत्व की ओर से चुनाव आयोग को सवालों के घेरे में लाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पार्टी की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ उठाए जा रहे सवालों को राजनीतिक अभियान के तौर पर देखा जा रहा है। ईरानी के मुताबिक, चुनाव आयोग भारत में चुनाव कराने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को संचालित करने वाली प्रमुख संस्थाओं में शामिल है।
उन्होंने कहा कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने में चुनाव आयोग की भूमिका अहम है। ईरानी ने चुनाव आयोग को भारत के लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण व्यवस्था बताते हुए कहा कि संस्था पर सवाल उठाने से पहले उसके संवैधानिक दायित्वों और कार्यप्रणाली को ध्यान में रखना चाहिए।
भाजपा नेता ने कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को इस बात से परेशानी है कि उसे जनता का अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा है और इसी कारण पार्टी चुनाव आयोग पर निशाना साध रही है। यह स्मृति ईरानी का राजनीतिक आरोप है। कांग्रेस की ओर से चुनाव आयोग को लेकर लगाए गए आरोपों और उठाए गए सवालों पर पार्टी का अपना पक्ष है।
दरअसल, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूचियों में बदलाव को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव लगातार सामने आ रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हाल में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मतदाता सूचियों से जुड़े मुद्दों को उठाया था। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मतदाता सूची में होने वाले बदलावों को लेकर अधिक पारदर्शिता और राजनीतिक दलों को संबंधित आंकड़े उपलब्ध कराने की मांग की है।
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— BJP (@BJP4India) September 29, 2026
कांग्रेस की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। पार्टी ने उनके खिलाफ राजनीतिक स्तर पर कार्रवाई की मांग की है। वहीं चुनाव आयोग ने SIR से संबंधित निर्णयों और अपनी कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया है। आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े आदेश सभी तीन चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बाद जारी किए गए हैं। ऐसे में चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच मतदाता सूची तथा चुनाव प्रक्रिया को लेकर मतभेद सार्वजनिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं।
स्मृति ईरानी की टिप्पणी इसी राजनीतिक विवाद के बीच आई है। उन्होंने कांग्रेस पर चुनाव आयोग को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति लोगों का विश्वास बनाए रखना जरूरी है। उनका कहना था कि चुनाव आयोग देश की चुनावी प्रक्रिया का संचालन करता है और लोकतंत्र में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण है।
वहीं, कांग्रेस का तर्क है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह के बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और जिन लोगों के नाम हटाए जाएं, उन्हें इसकी जानकारी तथा अपनी आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलना चाहिए। पार्टी का कहना है कि मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी है।
इस तरह चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। एक ओर भाजपा नेता आयोग की संवैधानिक भूमिका और उसकी संस्थागत विश्वसनीयता का बचाव कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तथा पारदर्शिता की मांग कर रही है। आने वाले दिनों में SIR और मतदाता सूचियों से जुड़े मुद्दे विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बने रहने की संभावना है।