यमुना को प्रदूषण से बचाने की तैयारी

दिल्ली में बनेंगे 35 नए डीएसटीपी और 13 एसटीपी; 7,373 करोड़ रुपये होंगे खर्च नई दिल्ली। यमुना नदी में गिरने वाले गंदे पानी को रोकने और प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली में सीवेज प्रबंधन व्यवस्था को बड़े स्तर पर मजबूत करने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत अगले ढाई वर्षों में […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • October 9, 2026 8:17 am IST, Published 51 minutes ago

दिल्ली में बनेंगे 35 नए डीएसटीपी और 13 एसटीपी; 7,373 करोड़ रुपये होंगे खर्च

नई दिल्ली। यमुना नदी में गिरने वाले गंदे पानी को रोकने और प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली में सीवेज प्रबंधन व्यवस्था को बड़े स्तर पर मजबूत करने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत अगले ढाई वर्षों में राजधानी की सीवेज शोधन क्षमता को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के अंतर्गत 35 विकेंद्रीकृत सीवेज उपचार संयंत्र (डीएसटीपी) और 13 नए सीवेज उपचार संयंत्र (एसटीपी) स्थापित किए जाएंगे।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 7,373 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) की वित्तीय सहायता से प्रस्तावित इस योजना को दिल्ली जल बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। जल्द ही परियोजना के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

328 एमजीडी होगी नए संयंत्रों की क्षमता

योजना के तहत स्थापित किए जाने वाले नए संयंत्रों की कुल शोधन क्षमता 328 मिलियन गैलन प्रतिदिन (एमजीडी) होगी। दिल्ली में वर्तमान में 37 सीवेज उपचार संयंत्र संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता लगभग 814 एमजीडी है। राजधानी में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में गंदा पानी उत्पन्न होता है, लेकिन सीवर नेटवर्क की कमी और कुछ संयंत्रों के निर्धारित मानकों के अनुरूप काम नहीं करने के कारण यमुना में प्रदूषण की समस्या बनी हुई है।

नई परियोजना का उद्देश्य सीवेज को नदी में पहुंचने से पहले उपचारित करना और गंदे पानी के प्रबंधन की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। विकेंद्रीकृत संयंत्रों के माध्यम से उन क्षेत्रों में भी सीवेज का उपचार किया जा सकेगा, जहां मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है।

एसटीपी के उन्नयन से भी बढ़ेगी क्षमता

नए संयंत्र स्थापित करने के साथ-साथ दिल्ली में पहले से मौजूद सीवेज उपचार संयंत्रों का उन्नयन भी किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 28 एसटीपी का उन्नयन कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष नौ संयंत्रों का काम अगले वर्ष दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

पुराने एसटीपी के उन्नयन से दिसंबर 2027 तक लगभग 56 एमजीडी अतिरिक्त शोधन क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, 35 नए विकेंद्रीकृत सीवेज उपचार संयंत्रों से करीब 170 एमजीडी क्षमता में वृद्धि होगी।

2028 तक 1,500 एमजीडी क्षमता का लक्ष्य

दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2028 तक राजधानी की कुल सीवेज शोधन क्षमता बढ़ाकर 1,500 एमजीडी करने की योजना है। इस लक्ष्य को हासिल करने में कई नए एसटीपी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

प्रस्तावित संयंत्र जागृति, कोंडली, रोहिणी, पप्पनकलां, रिठाला, केशवपुर, कोरोनेशन पिलर, आईएसपी बुराड़ी परिसर, निलोठी, कैलाश नगर, शास्त्री पार्क, आरएमई-180 ड्रेन इंटरसेप्शन और दिल्ली गेट सहित विभिन्न स्थानों पर स्थापित किए जाने हैं।

यमुना की सफाई को मिलेगी गति

दिल्ली में सीवेज शोधन क्षमता बढ़ाना यमुना नदी को स्वच्छ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, नदी में प्रदूषण कम करने के लिए केवल नए संयंत्र स्थापित करना ही पर्याप्त नहीं होगा। सीवर नेटवर्क का विस्तार, मौजूदा संयंत्रों का निर्धारित मानकों के अनुसार संचालन और नालों में बहने वाले गंदे पानी पर नियंत्रण भी जरूरी होगा।

यदि परियोजना निर्धारित समयसीमा में पूरी होती है और सभी संयंत्र प्रभावी ढंग से काम करते हैं, तो इससे सीवेज प्रबंधन में सुधार होने और यमुना में बिना उपचारित गंदा पानी जाने की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।

Advertisement