देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र की मजबूती के लिए शिक्षित और संस्कारवान समाज का निर्माण बेहद जरूरी है। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को याद करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिकता, राष्ट्रप्रेम, सामाजिक समरसता और व्यावहारिक समझ विकसित करना भी होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने ये बातें देहरादून में आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय उत्कृष्टता पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए कहीं।
मुख्यमंत्री धामी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय को बहुआयामी व्यक्तित्व का धनी बताते हुए कहा कि उनका जीवन समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणा देने वाला है। वह एक कुशल राजनेता होने के साथ-साथ समाजसेवी, शिक्षाविद् और दूरदर्शी विचारक भी थे। उनके विचारों में समाज के समग्र विकास और राष्ट्र निर्माण को विशेष स्थान प्राप्त था। मुख्यमंत्री के अनुसार, उनके विचार आज भी देश की सामाजिक और शैक्षिक व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
धामी ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय शिक्षा को व्यक्ति के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण माध्यम मानते थे। उनके विचारों के अनुसार, शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो विद्यार्थियों को केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने तक सीमित न रखे, बल्कि उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार करे। शिक्षा के माध्यम से बच्चों में अच्छे संस्कार, जिम्मेदारी की भावना और समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान उपलब्ध कराना जरूरी है। इससे वे अपने सीखे हुए सिद्धांतों को वास्तविक जीवन में इस्तेमाल कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से जुड़ी शिक्षा विद्यार्थियों को बेहतर नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एक शिक्षित समाज ही देश की प्रगति, सामाजिक एकता और मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार बन सकता है।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस नीति का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और अधिक व्यावहारिक बनाना है। बदलते समय के साथ शिक्षा के तरीकों में सुधार करना आवश्यक है, ताकि विद्यार्थियों को वर्तमान जरूरतों के अनुरूप ज्ञान और कौशल मिल सके। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को देश की शिक्षा प्रणाली में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
धामी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रयोगों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य में डिजिटल माध्यमों से पढ़ाई को प्रोत्साहित करने, आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ाने और भारतीय संस्कृति एवं मूल्यों पर आधारित शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा उपलब्ध कराना है, जो उन्हें तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के साथ-साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं से भी जोड़े रखे।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार की भूमिका लगातार बढ़ रही है। डिजिटल शिक्षण और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से विद्यार्थियों तक ज्ञान पहुंचाने के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था को समय के अनुरूप विकसित करना और उसकी गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, शिक्षा में आधुनिकता और भारतीय मूल्यों के बीच संतुलन स्थापित करना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय उत्कृष्टता पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान उनके विचारों और योगदान को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों के महत्व को भी रेखांकित किया। ऐसे आयोजन शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और बेहतर कार्य करने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने का माध्यम बन सकते हैं।
मुख्यमंत्री धामी के संबोधन का मुख्य संदेश यही रहा कि शिक्षा को व्यापक दृष्टिकोण के साथ विकसित किया जाना चाहिए। ज्ञान, नैतिकता, राष्ट्रप्रेम, सामाजिक सद्भाव और व्यावहारिक कौशल का समन्वय विद्यार्थियों के भविष्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। राज्य सरकार ने आधुनिक तकनीक और भारतीय मूल्यों के मेल से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के अपने संकल्प को दोहराया।