नई दिल्ली। इतिहास में 16 अक्टूबर की तारीख कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इसी दिन वर्ष 1905 में बंगाल का विभाजन लागू हुआ था, जिसका देशभर में व्यापक विरोध हुआ। वहीं, वर्ष 1964 में चीन ने अपना पहला परमाणु परीक्षण किया और 1978 में करोल वोज्तिला पोप चुने गए, जिन्हें दुनिया ने पोप जॉन पॉल द्वितीय के नाम से जाना।
1788: मराठों ने मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय को दोबारा दिल्ली की गद्दी पर बैठाया।
1905: ब्रिटिश शासन के दौरान बंगाल का विभाजन लागू हुआ। इस फैसले के विरोध में स्वदेशी आंदोलन को व्यापक समर्थन मिला।
1915: ब्रिटेन ने बुल्गारिया के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।
1923: वॉल्ट डिज्नी और उनके भाई रॉय डिज्नी ने उस स्टूडियो की स्थापना की, जो आगे चलकर दुनिया की प्रमुख मनोरंजन कंपनियों में शामिल हुआ।
1934: चीन में साम्यवादी सेनाओं ने ऐतिहासिक दीर्घ मार्च शुरू किया।
1951: पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान की रावलपिंडी में एक जनसभा के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई।
1962: अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी को क्यूबा में सोवियत परमाणु मिसाइल ठिकानों की तस्वीरों की जानकारी दी गई। इसके बाद क्यूबा मिसाइल संकट की शुरुआत हुई।
1964: चीन ने अपना पहला परमाणु परीक्षण किया और परमाणु हथियार संपन्न देशों में शामिल हो गया।
1978: भारतीय क्रिकेटर कपिल देव ने पाकिस्तान के फैसलाबाद में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया। इसी दिन करोल वोज्तिला पोप चुने गए और उन्होंने पोप जॉन पॉल द्वितीय नाम अपनाया।
1984: दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ संघर्ष करने वाले आर्चबिशप डेसमंड टूटू को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की घोषणा हुई।
हेमा मालिनी (1948): हिंदी सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री और भरतनाट्यम नृत्यांगना का जन्म 16 अक्टूबर 1948 को हुआ था।
ऑस्कर वाइल्ड (1854): प्रसिद्ध आयरिश लेखक और नाटककार का जन्म 16 अक्टूबर को हुआ था।
16 अक्टूबर की घटनाएं राजनीति, स्वतंत्रता आंदोलन, विज्ञान, खेल और संस्कृति के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाती हैं। बंगाल विभाजन ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में स्वदेशी और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार को नई गति दी। चीन का पहला परमाणु परीक्षण वैश्विक शक्ति संतुलन के इतिहास की महत्वपूर्ण घटना बना, जबकि क्यूबा मिसाइल संकट ने दुनिया को परमाणु युद्ध के खतरे के करीब ला खड़ा किया।
इस तरह 16 अक्टूबर केवल बीते समय की घटनाओं को याद करने की तारीख नहीं है, बल्कि यह समझने का अवसर भी है कि इतिहास के फैसलों और आंदोलनों ने वर्तमान दुनिया को किस तरह आकार दिया।