नई दिल्ली। नए विचारों को उपयोगी उत्पादों, आधुनिक तकनीक और कारोबार में बदलने की क्षमता के मामले में भारत दुनिया की 38वीं सबसे नवाचारी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) के वैश्विक नवाचार सूचकांक 2026 में भारत को 139 अर्थव्यवस्थाओं में 38वां स्थान मिला है। पिछले वर्ष भी भारत इसी स्थान पर था। इससे स्पष्ट है कि नवाचार के क्षेत्र में देश की स्थिति स्थिर बनी हुई है, लेकिन वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने के लिए अभी कई चुनौतियों पर काम करना बाकी है।
इस सूचकांक में स्विट्जरलैंड लगातार 16वें वर्ष पहले स्थान पर रहा। स्वीडन दूसरे और अमेरिका तीसरे स्थान पर हैं। एशियाई देशों में दक्षिण कोरिया और सिंगापुर ने भी मजबूत प्रदर्शन किया है। वहीं, चीन दसवें, जापान 12वें और मलेशिया 34वें स्थान पर रहा। दक्षिण और मध्य एशिया के देशों में भारत सबसे आगे है।
वैश्विक नवाचार सूचकांक में स्विट्जरलैंड ने 66.7 अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया। स्वीडन 63.2 अंकों के साथ दूसरे और अमेरिका 62.3 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। दक्षिण कोरिया 61.4 अंकों के साथ चौथे और सिंगापुर 61.0 अंकों के साथ पांचवें स्थान पर है।
इस सूची में ब्रिटेन छठे और नीदरलैंड सातवें स्थान पर रहे। चीन का दसवां स्थान भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह उच्च-मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं में सबसे आगे है। जापान ने 12वां स्थान हासिल किया।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि शोध, तकनीक और नए विचारों को बाजार तक पहुंचाने में यूरोपीय देशों के साथ एशियाई अर्थव्यवस्थाएं भी लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रही हैं।
भारत के प्रदर्शन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि नवाचार के लिए उपलब्ध संसाधनों और व्यवस्थाओं की तुलना में उसके परिणाम बेहतर हैं। सूचकांक के अनुसार, नवाचार के लिए जरूरी संसाधनों और व्यवस्थाओं के मामले में भारत 49वें स्थान पर है, जबकि नवाचार के नतीजों में उसे 25वां स्थान मिला है।
इसका अर्थ है कि शोध, तकनीकी विकास और अन्य उपलब्ध संसाधनों को उपयोगी परिणामों में बदलने के मामले में भारत अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। देश में डिजिटल सेवाओं, तकनीकी उद्यमों और नए कारोबारी विचारों के विस्तार ने भी नवाचार की चर्चा को व्यापक बनाया है।
हालांकि, केवल अच्छे परिणाम हासिल करना पर्याप्त नहीं है। इन परिणामों को लगातार बेहतर बनाने के लिए शोध में निवेश, तकनीकी विकास और नए उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी है।
वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत के सामने कुछ बड़ी चुनौतियां भी सामने आई हैं। कारोबार में नवाचार के मामले में देश 63वें, बुनियादी ढांचे में 62वें और संस्थागत व्यवस्था में 60वें स्थान पर है।
ये क्षेत्र बताते हैं कि भारत को नवाचार के अनुकूल माहौल तैयार करने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना है। नए विचारों को सफल कारोबार में बदलने, शोध संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा बेहतर बुनियादी सुविधाएं विकसित करने पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नवाचार को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा, शोध, उद्योग और सरकार के बीच तालमेल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साथ ही, नए उद्यमों को वित्तीय सहायता और आधुनिक तकनीक तक आसान पहुंच मिलने से भी देश की क्षमता बढ़ सकती है।
वैश्विक नवाचार सूचकांक देशों की शोध क्षमता, तकनीकी विकास, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और नए उत्पादों तथा विचारों को विकसित करने की क्षमता का आकलन करता है। विश्व बौद्धिक संपदा संगठन द्वारा जारी की जाने वाली यह वार्षिक रैंकिंग अर्थव्यवस्थाओं के नवाचार प्रदर्शन की तुलना करने का एक प्रमुख माध्यम है।
भारत का 38वें स्थान पर बने रहना एक ओर उसकी उपलब्धियों को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर यह संकेत भी देता है कि अब केवल मौजूदा स्थिति बनाए रखना पर्याप्त नहीं होगा। कारोबार में नवाचार, संस्थागत सुधार और बुनियादी ढांचे को मजबूत करके ही भारत वैश्विक सूची में और ऊपर पहुंच सकता है।
देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शोध और तकनीक के क्षेत्र में हासिल हो रहे परिणामों को व्यापक आर्थिक विकास, रोजगार और नए उद्योगों के अवसरों में बदला जाए। ऐसा होने पर भारत अपनी नवाचार क्षमता का बेहतर उपयोग कर सकेगा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थान बना पाएगा।