• होम
  • देश
  • बिस्किट में पशु चारा और दूध में डिटर्जेंट? FSSAI की कार्रवाई से मचा हड़कंप

बिस्किट में पशु चारा और दूध में डिटर्जेंट? FSSAI की कार्रवाई से मचा हड़कंप

भारत : सोशल मीडिया पर प्रसारित एक खबर में बिस्किट में पशु आहार से जुड़े पदार्थों की कथित मिलावट और दूध में डिटर्जेंट पाए जाने के दावे ने खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। वायरल पोस्ट में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की कार्रवाई और तीन कंपनियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • October 19, 2026 8:30 pm IST, Published 2 hours ago

भारत : सोशल मीडिया पर प्रसारित एक खबर में बिस्किट में पशु आहार से जुड़े पदार्थों की कथित मिलावट और दूध में डिटर्जेंट पाए जाने के दावे ने खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। वायरल पोस्ट में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की कार्रवाई और तीन कंपनियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू होने का उल्लेख किया गया है। हालांकि, किसी भी कंपनी को दोषी ठहराने से पहले संबंधित जांच रिपोर्ट, आधिकारिक आदेश और मामले की वर्तमान स्थिति की पुष्टि करना जरूरी है।

मुख्य बातें एक नजर में

* प्रियागोल्ड बिस्किट बनाने वाली सूर्या फूड एंड एग्रो लिमिटेड के खिलाफ अभियोजन की कार्यवाही शुरू की गई है।

* डोडला डेयरी के फुल क्रीम दूध के नमूने में निर्धारित वसा मानक से कमी और डिटर्जेंट/कास्टिक सोडा की मौजूदगी की पुष्टि होने की खबर है।

* यूईआईआर ऑर्गेनिक फूड्स की पीली किशमिश के नमूने में कीटनाशक अवशेष पाए गए।

* इन मामलों में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने कानूनी कार्रवाई शुरू की है।

खाद्य सुरक्षा पर सवाल, तीन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई

खाने-पीने की वस्तुओं की गुणवत्ता और शुद्धता सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी होती है। ऐसे में बिस्किट, दूध और किशमिश जैसे रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों को लेकर सामने आई जांच संबंधी जानकारी ने उपभोक्ताओं का ध्यान खींचा है। खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI ने तीन खाद्य कारोबारियों के खिलाफ गंभीर नियम उल्लंघनों के मामले में अभियोजन की कार्यवाही शुरू की है। इस कार्रवाई में बिस्किट निर्माण में पशु आहार के लिए निर्धारित चोकर के इस्तेमाल, दूध के नमूने में असुरक्षित पदार्थों की मौजूदगी और किशमिश में कीटनाशक अवशेषों से जुड़े मामले शामिल हैं।

यह मामला केवल कंपनियों की गुणवत्ता जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि खाद्य उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल, फैक्ट्री की साफ-सफाई, भंडारण और प्रयोगशाला जांच की अहमियत को भी सामने लाता है।

1\. प्रियागोल्ड बिस्किट बनाने वाली कंपनी पर कार्रवाई

FSSAI की जांच के अनुसार, सूर्या फूड एंड एग्रो लिमिटेड के विनिर्माण परिसर में पशुओं के चारे के लिए निर्धारित चोकर का इस्तेमाल प्रियागोल्ड बिस्किट बनाने में किया जा रहा था। नियामक के मुताबिक, इस चोकर को बिस्किट में फाइबर के स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, जबकि संबंधित बोरियों पर पशु आहार के लिए होने का उल्लेख था।

यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि मानव उपभोग के लिए खाद्य पदार्थ बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रत्येक कच्चे माल की गुणवत्ता, उपयुक्तता और सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। केवल किसी पदार्थ में फाइबर मौजूद होने से यह साबित नहीं होता कि वह मानव उपभोग के लिए भी सुरक्षित है।

रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी के परिसर में निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई, कीट नियंत्रण, कच्चे माल के भंडारण और अलग-अलग सामग्रियों को व्यवस्थित रखने में भी कमियां पाई गईं। कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता, परिसर के रखरखाव और निर्माण के बीच तैयार होने वाले मिश्रणों को संभालने की प्रक्रिया में भी खामियों का उल्लेख किया गया।

इन गंभीर कमियों के बाद कंपनी का लाइसेंस पहले ही निलंबित किया जा चुका था। इसके बाद FSSAI ने अभियोजन की कार्यवाही शुरू की। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया शुरू होना और अदालत में दोष सिद्ध होना अलग-अलग बातें हैं।

2\. डोडला डेयरी के दूध के नमूने में क्या मिला?

इस कार्रवाई में डोडला डेयरी लिमिटेड का मामला भी शामिल है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी के फुल क्रीम दूध का एक नियामकीय नमूना जांच में निर्धारित वसा मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया था।

इसके बाद कंपनी की अपील पर नमूने को रेफरल फूड लैबोरेटरी में भेजा गया। रिपोर्टों में बताया गया है कि प्रयोगशाला ने नमूने को डिटर्जेंट या कास्टिक सोडा की मौजूदगी के कारण असुरक्षित और निर्धारित न्यूनतम वसा सीमा से कम होने के कारण घटिया गुणवत्ता का बताया। इसके बाद संबंधित खाद्य सुरक्षा कानून के तहत अभियोजन की कार्यवाही शुरू करने की मंजूरी दी गई।

दूध बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के दैनिक आहार का हिस्सा है। इसलिए इसकी गुणवत्ता में कमी या असुरक्षित पदार्थों की मौजूदगी का मामला गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उपभोक्ताओं को दूध की पैकिंग, निर्माण एवं समाप्ति तिथि, भंडारण संबंधी निर्देश और विश्वसनीय खरीद स्रोतों पर ध्यान देना चाहिए।

साथ ही, किसी एक नमूने में सामने आई गड़बड़ी के आधार पर किसी कंपनी के सभी उत्पादों या बाजार में उपलब्ध प्रत्येक पैकेट के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। जांच के निष्कर्ष संबंधित नमूने और मामले के संदर्भ में समझे जाने चाहिए।

3\. पीली किशमिश में कीटनाशक अवशेष का मामला

तीसरी कंपनी यूईआईआर ऑर्गेनिक फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ पीली किशमिश के नमूने में कीटनाशक अवशेष पाए जाने के मामले में कार्रवाई की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, जांच में सामने आए अवशेष खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन से संबंधित चिंता का विषय बने।

सूखे मेवे अक्सर घरों, मिठाइयों, बेकरी उत्पादों और त्योहारों के पकवानों में इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे उत्पादों में कच्चे माल की गुणवत्ता, आपूर्ति श्रृंखला और प्रयोगशाला परीक्षण की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

कीटनाशकों का इस्तेमाल कृषि में फसलों को कीटों से बचाने के लिए किया जाता है, लेकिन खाद्य पदार्थों में इनके अवशेष निर्धारित नियमों के अनुरूप होने चाहिए। तय सीमा से अधिक अवशेष मिलने की स्थिति में संबंधित उत्पाद की सुरक्षा और नियामकीय अनुपालन की जांच जरूरी हो जाती है।

इस मामले में भी अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित जांच रिपोर्ट और कार्यवाही के परिणाम पर निर्भर करेगा।

4\. FSSAI की कार्रवाई क्यों है महत्वपूर्ण?

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण देश में खाद्य पदार्थों की सुरक्षा और गुणवत्ता से जुड़े मानकों के अनुपालन की निगरानी करता है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत संबंधित अधिकारियों को निर्धारित परिस्थितियों में निरीक्षण, नमूना जांच और कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त है।

खाद्य उद्योग में गुणवत्ता नियंत्रण केवल तैयार उत्पाद की जांच तक सीमित नहीं होना चाहिए। कच्चे माल की खरीद से लेकर उत्पादन, पैकेजिंग, भंडारण और वितरण तक प्रत्येक चरण में सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है।

यदि निरीक्षण के दौरान गंभीर कमियां मिलती हैं, तो नियामक कार्रवाई उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ कंपनियों को अपनी प्रक्रियाओं में सुधार करने का संदेश भी देती है। इस तरह की जांच से खाद्य कारोबार में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

5\. उपभोक्ता अपनी सुरक्षा के लिए क्या करें?

खाद्य सुरक्षा से जुड़े ऐसे मामलों के सामने आने के बाद घबराने के बजाय जागरूक रहना अधिक उपयोगी है। उपभोक्ता कुछ सामान्य सावधानियां अपना सकते हैं।

* पैकेट पर निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि, बैच नंबर और निर्माता का विवरण देखें।

* पैकिंग खुली हुई हो, उसमें नमी हो या उत्पाद की गंध और बनावट असामान्य लगे, तो उसका सेवन न करें।

* दूध और अन्य जल्दी खराब होने वाले उत्पादों को पैकेट पर दिए गए तापमान संबंधी निर्देशों के अनुसार रखें।

* खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर संदेह होने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराएं।

* सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी खबर के आधार पर बिना पुष्टि के सभी उत्पादों को असुरक्षित न मानें।

उपभोक्ता खाद्य सुरक्षा से संबंधित शिकायतों के लिए FSSAI के आधिकारिक माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं। किसी शिकायत के साथ उत्पाद का पैकेट, बिल, बैच नंबर और उपलब्ध तस्वीरें रखना जांच में सहायक हो सकता है।

निष्कर्ष

प्रियागोल्ड बिस्किट निर्माण में पशु आहार के लिए निर्धारित चोकर के इस्तेमाल, डोडला डेयरी के दूध के नमूने में असुरक्षित पदार्थों की मौजूदगी और यूईआईआर ऑर्गेनिक फूड्स की किशमिश में कीटनाशक अवशेषों से जुड़े मामलों ने खाद्य सुरक्षा निगरानी की अहमियत को फिर सामने ला दिया है। FSSAI की कार्रवाई यह रेखांकित करती है कि खाद्य कारोबार में गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की अनदेखी गंभीर नियामकीय परिणामों का कारण बन सकती है।

अब इन मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया और संबंधित पक्षों के जवाब महत्वपूर्ण होंगे। उपभोक्ताओं के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि वे प्रमाणित जानकारी पर भरोसा करें और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर सतर्क रहें।

Advertisement