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दुशांबे में SCO बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह

भारत के लिए कनेक्टिविटी का मुद्दा आर्थिक अवसरों के साथ-साथ क्षेत्रीय संपर्क और सहयोग की दृष्टि से भी अहम है। प्रभावी संपर्क व्यवस्था से व्यापार की लागत कम करने, बाजारों तक पहुंच बेहतर बनाने और विभिन्न क्षेत्रों के बीच आर्थिक…

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  • October 18, 2026 4:46 pm IST, Published 56 minutes ago
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 19 और 20 अक्टूबर को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शासनाध्यक्षों की 25वीं बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस बैठक में सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार, कनेक्टिविटी और नवाचार को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत बनाने और साझा विकास के नए अवसर तलाशने के लिहाज से यह बैठक अहम मानी जा रही है।

SCO सदस्य देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने वाला एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच है। इसके माध्यम से सदस्य देश साझा चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने के साथ-साथ व्यापार, परिवहन, तकनीक और विकास से जुड़े क्षेत्रों में आपसी तालमेल बढ़ाने का प्रयास करते हैं। दुशांबे में होने वाली बैठक भी इसी दिशा में सहयोग के नए रास्ते तलाशने का अवसर प्रदान करेगी।

व्यापार और आर्थिक सहयोग पर रहेगा फोकस

बैठक के प्रमुख विषयों में सदस्य देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना शामिल है। बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में क्षेत्रीय बाजारों तक पहुंच, निवेश के अवसर और व्यापारिक प्रक्रियाओं को आसान बनाना देशों की प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे में SCO मंच पर आर्थिक साझेदारी को व्यापक बनाने के उपायों पर विचार किया जा सकता है।

भारत के लिए क्षेत्रीय देशों के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करना महत्वपूर्ण है। व्यापारिक सहयोग बढ़ने से विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार के अवसर पैदा हो सकते हैं और उद्योगों को नए बाजार मिल सकते हैं। इसके साथ ही सदस्य देशों के बीच संवाद और सहयोग से आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन देने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।

कनेक्टिविटी और परिवहन नेटवर्क की अहमियत

क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था यानी कनेक्टिविटी भी बैठक के प्रमुख विषयों में शामिल रहेगी। बेहतर परिवहन नेटवर्क, व्यापार मार्गों और आपूर्ति शृंखलाओं का विकास देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

भारत के लिए कनेक्टिविटी का मुद्दा आर्थिक अवसरों के साथ-साथ क्षेत्रीय संपर्क और सहयोग की दृष्टि से भी अहम है। प्रभावी संपर्क व्यवस्था से व्यापार की लागत कम करने, बाजारों तक पहुंच बेहतर बनाने और विभिन्न क्षेत्रों के बीच आर्थिक संबंधों को विस्तार देने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इन प्रयासों की सफलता संबंधित देशों के बीच सहमति, व्यावहारिक सहयोग और परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।

नवाचार और तकनीकी सहयोग पर भी नजर

बैठक में नवाचार और तकनीकी सहयोग को भी महत्व दिए जाने की उम्मीद है। डिजिटल तकनीक, अनुसंधान, आधुनिक औद्योगिक समाधान और नए व्यावसायिक मॉडल आर्थिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सदस्य देशों के बीच अनुभव साझा करने और तकनीकी सहयोग बढ़ाने से विकास की नई संभावनाएं सामने आ सकती हैं।

भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में तकनीकी विकास और डिजिटल समाधानों को बढ़ावा दिया है। SCO जैसे मंच पर सहयोग से सदस्य देशों को साझा अनुभवों से सीखने और आपसी साझेदारी के नए अवसर तलाशने का मौका मिल सकता है।

भारत की भागीदारी का महत्व

दुशांबे की बैठक में राजनाथ सिंह की भागीदारी भारत की बहुपक्षीय कूटनीति और क्षेत्रीय सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करेगी। इस मंच पर भारत अन्य सदस्य देशों के साथ संवाद के माध्यम से साझा हितों से जुड़े विषयों को आगे बढ़ाने का अवसर प्राप्त करेगा।

कुल मिलाकर, SCO शासनाध्यक्षों की 25वीं बैठक का महत्व व्यापार, कनेक्टिविटी और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं से जुड़ा है। अब इस बैठक के परिणामों पर नजर रहेगी कि सदस्य देश साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए किस प्रकार की सहमति बनाते हैं और सहयोग की योजनाओं को ठोस रूप देने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

 

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